NHAI के अनुसार, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का काम 99 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है। बचे हुए छोटे-मोटे काम अगले 10 दिनों में पूरे कर लिए जाएंगे, जिसके बाद इसे ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा।
इस कॉरिडोर का विकास चार चरणों में किया गया है। पहला चरण अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक, दूसरा बागपत से सहारनपुर बाइपास तक, तीसरा सहारनपुर बाइपास से उत्तराखंड के गणेशपुर तक और चौथा चरण गणेशपुर से देहरादून तक। इनमें से ज्यादातर हिस्से अब पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।
दूसरे चरण में स्थानीय किसानों की मांगों को ध्यान में रखते हुए कई बदलाव किए गए। मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे इलाकों में गन्ने से लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही के लिए अंडरपास की ऊंचाई बढ़ाई गई और कुछ जगहों पर नए इंटरचेंज भी जोड़े गए।
उत्तराखंड के हिस्से में यह हाइवे राजाजी नेशनल पार्क और हाथी कॉरिडोर से होकर गुजरता है। यहां रात में निर्माण पर रोक, एलिवेटेड रोड और वन्यजीवों को प्रभावित न करने वाली लाइटिंग जैसी विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जिससे काम में कुछ देरी हुई।
कॉरिडोर खुलने के बाद कार से दिल्ली से देहरादून का सफर तीन घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। FASTag के सालाना पास पर चार टोल प्लाजा पार करने का खर्च मात्र 60 रुपये होगा, जबकि बिना पास के यह करीब 500 रुपये एक तरफ का पड़ सकता है।
छह लेन वाले इस हाइवे पर कारों के लिए अधिकतम गति 100 किमी प्रति घंटा और ट्रकों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय की गई है। सड़क को मानसून से पहले बिछाकर सेटल होने दिया गया, जिससे राइड क्वालिटी पहले से बेहतर बनी है।
हाइवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए पिट स्टॉप तैयार किए जा रहे हैं, जहां चाय-पानी और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। कुछ स्थानों पर इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।