बिहार की आर्थिक कुंडली: जानें राज्य में कौन सा जिला है सबसे 'अमीर'

Bihar Economic Survey 2025-26: बिहार की आर्थिक सेहत को दर्शाने वाली नई रिपोर्ट ने राज्य के भीतर विकास की एक नई बहस छेड़ दी है। सोमवार को बिहार विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी पटना न केवल शासन का केंद्र है, बल्कि वह धन-दौलत के मामले में भी राज्य के बाकी जिलों से कोसों आगे है। यह सर्वेक्षण न केवल आय के आंकड़े पेश करता है, बल्कि यह भी बताता है कि बिहार के अलग-अलग कोनों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में कितनी गहरी असमानता है।

Authored by: Nishant TiwariUpdated Feb 3 2026, 15:50 IST
पटनाImage Credit : Canva01 / 07

पटना

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, पटना बिहार का निर्विवाद रूप से सबसे समृद्ध जिला बना हुआ है। यहां की प्रति व्यक्ति आय 1,31,332 रुपये दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य की औसत प्रति व्यक्ति आय (76,490 रुपये) से लगभग दो गुना ज्यादा है। पटना की यह संपन्नता यहां की बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे का परिणाम है।

बेगूसराय और मुंगेरImage Credit : Canva02 / 07

बेगूसराय और मुंगेर

अमीरी की इस रेस में पटना के बाद बेगूसराय दूसरे स्थान पर काबिज है, जहां प्रति व्यक्ति आय 61,566 रुपये है। वहीं, तीसरे स्थान पर मुंगेर ने अपनी जगह बनाई है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 54,469 रुपये आंकी गई है। इन जिलों की रैंकिंग यह साबित करती है कि औद्योगिक विकास ने इन क्षेत्रों के लोगों की क्रय शक्ति में बड़ा इजाफा किया है।

शिवहर Image Credit : Canva03 / 07

शिवहर

जहां एक तरफ पटना चमक रहा है, वहीं शिवहर जिला राज्य के सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। यहां की प्रति व्यक्ति आय महज 18,980 रुपये है। पटना और शिवहर के बीच की आर्थिक खाई इतनी बड़ी है कि पटना की आय शिवहर की तुलना में छह गुना से भी अधिक है। शिवहर के बाद अररिया और सीतामढ़ी भी राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल हैं।

पेट्रोल और डीजल की खपतImage Credit : Canva04 / 07

पेट्रोल और डीजल की खपत

आर्थिक संपन्नता को मापने के लिए सर्वेक्षण में ईंधन की खपत को भी आधार बनाया गया है। पेट्रोल के उपयोग में पटना, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया शीर्ष पर रहे हैं। वहीं, भारी वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों का संकेत देने वाले डीजल की खपत में पटना, शेखपुरा और औरंगाबाद सबसे आगे हैं। इसके विपरीत शिवहर, सीवान और कैमूर में डीजल की खपत सबसे कम पाई गई।

रसोई गैस (LPG) का इस्तेमाल और जीवन स्तरImage Credit : Canva05 / 07

रसोई गैस (LPG) का इस्तेमाल और जीवन स्तर

LPG की खपत से परिवारों की आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इस मामले में भी पटना, बेगूसराय और गोपालगंज के लोग सबसे आगे हैं, जो यह दर्शाता है कि यहां के घरों में आधुनिक ईंधन की पहुंच और उसे खरीदने की क्षमता बेहतर है। वहीं अररिया, बांका और मधेपुरा जैसे जिलों में LPG का उपयोग सबसे कम पाया गया है।

सर्वे में शामिल लघु बचतImage Credit : Canva06 / 07

सर्वे में शामिल लघु बचत

सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति लघु बचत (Per Capita Small Saving) के आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। समृद्ध जिलों के लोग न केवल खर्च ज्यादा कर रहे हैं, बल्कि उनकी बचत करने की क्षमता भी गरीब जिलों की तुलना में कहीं अधिक है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसे पैमानों के साथ-साथ बचत के आंकड़े भी पटना और बेगूसराय की मजबूत आर्थिक स्थिति की पुष्टि करते हैं।

विकास की असमानता बड़ी चुनौतीImage Credit : Canva07 / 07

विकास की असमानता बड़ी चुनौती

यह आर्थिक सर्वेक्षण बिहार के भीतर बढ़ती क्षेत्रीय विषमता को उजागर करता है। पटना, बेगूसराय और मुंगेर जैसे कुछ पॉकेट्स को छोड़ दें, तो राज्य का एक बड़ा हिस्सा अब भी बुनियादी आर्थिक समृद्धि के लिए संघर्ष कर रहा है। औसत आय और न्यूनतम आय के बीच का यह फासला राज्य सरकार के लिए भविष्य की योजनाएं बनाने में एक बड़ी चुनौती पेश करता है।

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