हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बदलेगा सफर, आगरा से 40 मिनट में पहुंचेंगे जेवर एयरपोर्ट, दिल्ली-वाराणसी होंगे और करीब

आगरा और नई दिल्ली के बीच रेल यात्रा ने नई रफ्तार पकड़ ली है, जिसकी शुरुआत सेमी-हाईस्पीड गतिमान एक्सप्रेस से हुई। अब प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर आगरा को दिल्ली, जेवर एयरपोर्ट, लखनऊ और वाराणसी से बेहद कम समय में जोड़ने वाला है। इस परियोजना से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि आगरा और आसपास के क्षेत्रों में विकास के नए द्वार भी खुलेंगे।

आगरा और नई दिल्ली के बीच यात्रा आसान
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​आगरा और नई दिल्ली के बीच यात्रा आसान

देश की पहली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस ने आगरा और नई दिल्ली के बीच यात्रा को बेहद आसान बना दिया। यह ट्रेन 5 अप्रैल 2016 से चालू हुई थी और इसके जरिए यात्री केवल एक घंटे 40 मिनट में इस दूरी को तय कर सकते हैं। उस समय यह किसी ने भी नहीं सोचा था कि भारतीय ट्रेनों की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

रेल बजट में बड़ी सौगात
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​रेल बजट में बड़ी सौगात

जागरण.कॉम पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अब आगरा को रेल बजट में एक और बड़ी सौगात मिली है। नई दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनने के बाद आगरा से यात्री केवल 40 मिनट में जेवर एयरपोर्ट, एक घंटे में नई दिल्ली और ढाई घंटे में वाराणसी पहुंच सकेंगे। वहीं, लखनऊ की दूरी तय करने में लगभग एक घंटे का समय लगेगा। यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर यमुना नदी के किनारे से होकर गुजरेगा।

हर एक घंटे में बुलेट ट्रेन सेवा उपलब्ध होगी
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​हर एक घंटे में बुलेट ट्रेन सेवा उपलब्ध होगी

बुढ़ाना मुस्तकिल से गुजरते हुए यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर एत्मादपुर मदरा गांव के पास इनर रिंग रोड को पार करेगा। इसी क्षेत्र के पास ही एक स्टेशन का निर्माण होगा, जिसे लखनऊ एक्सप्रेसवे या इनर रिंग रोड से सीधे जोड़ा जाएगा। इस कॉरिडोर पर हर एक घंटे में बुलेट ट्रेन सेवा उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार ने बजट में नई दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर समेत कुल सात कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इस परियोजना को साल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल लंबाई 865 किलोमीटर होने वाले इस कॉरिडोर में 12 रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे।

रेल कॉरिडोर बनने से क्या होगा लाभ
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​रेल कॉरिडोर बनने से क्या होगा लाभ?

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनने से आगरा को कई महत्वपूर्ण लाभ होंगे। वर्तमान में कोई भी ट्रेन सीधे जेवर एयरपोर्ट तक नहीं जाती, लेकिन बुलेट ट्रेन एयरपोर्ट से सीधा जुड़ा होगा। इसके अलावा, यह कॉरिडोर मथुरा से आगरा तक पहुंचेगा और आगरा में इसे यमुना एक्सप्रेसवे और यमुना नदी के बीच से होकर गुजरने का मार्ग मिलेगा, यानी यह मुख्य रूप से नदी के किनारे-किनारे चलेगा। बुढ़ाना होते हुए यह ट्रैक तहसील सदर के एत्मादपुर मदरा क्षेत्र तक पहुंचेगा और वहां से इनर रिंग रोड को पार करेगा। ऐसे में इसी स्थान पर रेलवे स्टेशन बनने की मजबूत संभावना है।

आगरा परियोजना को भी किया जा रहा है विकसित
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​आगरा परियोजना को भी किया जा रहा है विकसित

जिन क्षेत्रों से होकर यह रेल ट्रैक गुजरेगा, वहां वर्तमान में सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम हैं। कॉरिडोर के दोनों ओर तेजी से विकास गतिविधियां शुरू होंगी और नई आवासीय कॉलोनियों का निर्माण होगा। इसके परिणामस्वरूप इन इलाकों में जमीन के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसी क्रम में आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा ग्रेटर आगरा परियोजना को भी विकसित किया जा रहा है।

न्यू आगरा अर्बन सेंटर का प्रस्ताव
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​न्यू आगरा अर्बन सेंटर का प्रस्ताव

ग्रेटर आगरा का विकास रायपुर, रहनकलां, एत्मादपुर मदरा और बुढ़ाना क्षेत्रों में किया जाएगा। इसके अलावा खंदौली से अलीगढ़ के बीच न्यू आगरा अर्बन सेंटर का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसी अर्बन सेंटर से कुछ ही दूरी पर रहनकलां गांव में 1058 एकड़ क्षेत्रफल में एक एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं के कारण एक से पांच किलोमीटर के दायरे में सबसे तेज विकास होने की संभावना है। वहीं, इनर रिंग रोड के तीसरे चरण का निर्माण कार्य इसी वर्ष पूरा होने की उम्मीद है।

350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार
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​350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार

बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि इसकी परिचालन गति 320 किमी प्रति घंटा और औसत गति लगभग 250 किमी प्रति घंटा होगी। यदि ट्रैक गेज की बात करें तो इसे 1435 मिलीमीटर रखा जाएगा। एक बुलेट ट्रेन में अधिकतम 750 यात्री यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन संचालन के लिए 25 केवी एसी ओवरहेड कैटेनरी ट्रैक्शन सिस्टम का उपयोग होगा। साथ ही, भूकंप जैसी आपात स्थिति में ट्रेन को खुद ही रोकने के लिए तत्काल भूकंप पहचान और अलार्म सिस्टम भी लगाया जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो जाएगी।

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