जब दुनिया के सबसे लंबे पुल की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है चीन के डेनयांग–कुनशान ग्रैंड ब्रिज (Danyang-Kunshan Grand Bridge) का। यह पुल न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया का सबसे लंबा रेलवे ब्रिज है। इसकी कुल लंबाई करीब 164.8 किलोमीटर है, जो इसे एक इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना बनाती है। ऐसे में आइए जानते हैं इसको बनाने में कितने रुपए खर्च हुए?
इस विशाल पुल को बनाने में करीब 8.5 अरब डॉलर का खर्च आया था। अगर इसे भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम लगभग 47,000 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। इतनी बड़ी लागत इसे दुनिया के सबसे महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी शामिल करती है।
डेनयांग-कुनशान ग्रैंड ब्रिज चीन के दो बड़े शहरों शंघाई और नानजिंग को जोड़ता है। यह पुल बीजिंग-शंघाई हाई-स्पीड रेलवे लाइन का अहम हिस्सा है। इस ब्रिज की वजह से इन बड़े औद्योगिक और व्यापारिक शहरों के बीच सफर काफी तेज और आसान हो गया है।
इस पुल का निर्माण कार्य साल 2006 में शुरू हुआ था और करीब चार साल में इसे पूरा कर लिया गया। साल 2010 में यह ब्रिज पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था और इसके बाद इसे रेल यातायात के लिए खोल दिया गया।
चीन में बड़े पैमाने पर नदियां, झीलें और दलदली जमीनें हैं। ऐसे इलाकों में रेलवे लाइन बिछाना आसान नहीं होता। डेनयांग-कुनशान ब्रिज का एक बड़ा हिस्सा पानी और दलदली जमीन के ऊपर बना है। इस पुल की मदद से ट्रेनों को बिना रुकावट तेज रफ्तार से चलाया जा सकता है।
इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए करीब 10,000 से ज्यादा इंजीनियर और मजदूरों ने काम किया था। पुल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह तेज हवाओं, भूकंप और भारी ट्रेनों के वजन को आसानी से सह सके। इसकी मजबूती इसे आने वाले कई दशकों तक सुरक्षित बनाए रखेगी।
यह पुल खासतौर पर हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बनाया गया है। इस पर चलने वाली ट्रेनें 300 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से सफर कर सकती हैं। इससे चीन के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को जबरदस्त मजबूती मिली है और लॉजिस्टिक्स व व्यापार को भी बड़ा फायदा हुआ है।
डेनयांग-कुनशान ग्रैंड ब्रिज सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि चीन की आधुनिक इंजीनियरिंग और आर्थिक ताकत का प्रतीक है। इतनी बड़ी लागत और तकनीक से बना यह पुल दिखाता है कि चीन इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। आज यह पुल न सिर्फ यातायात का साधन है, बल्कि चीन की विकास कहानी का मजबूत उदाहरण भी है।