देश की इस कंपनी को मिला नवरत्न का दर्जा, अब देश में कितनी नवरत्न कंपनियां
Navratna PSU: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) को नवरत्न का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इससे पहले एनआरएल मिनीरत्न कैटेगरी में था। यह दर्जा एनआरएल के लिए विकास के नए अवसर खोलेगा। आइए जानते हैं देश में अब कितनी नवरत्न कंपनियां हैं और ये दर्जा मिलने से क्या फायदा होगा।
NRL बनी 27वीं नवरत्न कंपनी
वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर जानकारी शेयर की कि वित्त मंत्री ने नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) को नवरत्न का दर्जा देने की अनुमति दे दी है। अब कंपनी को केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSE) की लिस्ट में 27वीं नवरत्न कंपनी के रूप में शामिल कर लिया गया है। यानी देश में अब कुछ 27 नवरत्न कंपनियां हो गई हैं। इस घोषणा के बाद कंपनी के कर्मचारियों और प्रबंधन में खुशी का माहौल है, क्योंकि यह दर्जा उसकी क्षमता और प्रदर्शन की सरकारी स्वीकार्यता को दर्शाता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है NRL
नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करती है। इसे पूर्वोत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरियों में से एक माना जाता है। कंपनी लंबे समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है, जिसके कारण उसे नवरत्न दर्जा दिए जाने का रास्ता खुला।
नवरत्न दर्जा क्यों है खास
नवरत्न दर्जा किसी भी सार्वजनिक उपक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दर्जे से कंपनी को वित्तीय और परिचालन यानी ऑपरेशनल स्वायत्तता मिलती है। इसका मतलब है कि एनआरएल कई बड़े फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकेगी। यह स्वायत्तता कंपनी को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से प्रतिस्पर्धा करने में मदद करेगी।
बड़े निवेश में मिलेगी स्वतंत्रता
नवरत्न दर्जा मिल जाने के बाद एनआरएल अब किसी भी परियोजना में 1,000 करोड़ रुपये तक का निवेश सरकारी मंजूरी के बिना कर सकेगी। इसके अलावा, वह अपनी नेट वर्थ के 15 प्रतिशत तक की राशि का निवेश खुद तय कर सकती है। इससे परियोजनाओं के फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे और कंपनी नए कारोबार या विस्तार योजनाओं पर फौरन काम शुरू कर पाएगी।
मजबूत कारोबार और बढ़ता मुनाफा
नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) का वित्तीय प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। कंपनी का सालाना कारोबार 25,147 करोड़ रुपये है, जो उसके बढ़ते उत्पादन और बाजार विस्तार का संकेत है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 1,608 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। लाभ में यह वृद्धि कंपनी की दक्षता, बेहतर प्रबंधन और बाजार में मजबूत पकड़ का परिणाम है।
ऑयल इंडिया की बड़ी हिस्सेदारी
नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) के मालिकाना ढांचे में ऑयल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख हिस्सेदारी है। ऑयल इंडिया के पास कंपनी के 69.63 प्रतिशत शेयर हैं। इसके अलावा, असम सरकार के पास 26 प्रतिशत और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के पास 4.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह शेयर वितरण दर्शाता है कि कंपनी पर सरकारी नियंत्रण मजबूत है, लेकिन संचालन में उसे अच्छी आजादी भी मिलती है।
पूर्वोत्तर में उद्योग विकास को मिलेगा बढ़ावा
नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) का नवरत्न बनना पूर्वोत्तर भारत के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है। इससे क्षेत्र में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास में बढ़ोतरी की उम्मीद है। एनआरएल पहले से ही क्षेत्र में ऊर्जा क्षेत्र का बड़ा योगदानकर्ता है, और अब इस दर्जे के बाद वह और भी बड़े स्तर पर काम कर सकेगी। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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