OMG! 1 डॉलर 12 लाख ईरान रियाल के बराबर, भारतीय रुपया के सामने कितना दम
Iranian rial vs US dollar: ईरान की आर्थिक परेशानी और तेज हो गई है। बुधवार को ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 12 लाख रियाल प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब देश पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। यहां जानिए 1 भारतीय रुपया कितने ईरानी रियाल के बराबर है।
बढ़ी महंगाई, जनता की जेब पर पड़ा असर
करेंसी के कमजोर होने का सीधा असर ईरान की जनता की जेब पर पड़ रहा है। आयातित सामान महंगा होने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरुरत की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। मांस, चावल, दालें और सब्जियों जैसे जरूरी सामान की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि सामान्य आय वाले परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।
बाजारों में अस्थिरता, 1 रुपया बराबर कितने ईरानी रियाल?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने इसकी नई दर मंगलवार को ही घोषित कर दी थी, जो बुधवार से बाजार में लागू हो गई। अगर भारतीय रुपया से तुलना करें तो 1 रुपया करीब 500 ईरानी रियाल के बराबर है। रियाल की रिकॉर्ड टूटने से बाजारों में अनिश्चितता और डर का माहौल बना हुआ है। व्यापारी भी कच्चे माल और आयातित वस्तुओं के महंगे होने का हवाला देकर अपने दाम बढ़ा रहे हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि लगातार बदलती मुद्रा दरों की वजह से उन्हें कीमतें तय करने में कठिनाई हो रही है। इससे बाजार में अस्थिरता और भी बढ़ गई है।
प्रतिबंधों का भारी दबाव
ईरान की इस आर्थिक गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए गए परमाणु प्रतिबंध हैं। इन प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रतिबंधों का सबसे बड़ा असर तेल निर्यात पर पड़ा है, जो देश की आय का मुख्य स्रोत रहा है। तेल बिक्री कम होने से सरकारी आय घटी है और अर्थव्यवस्था में नकदी की कमी बढ़ती जा रही है।
ईरान सरकार की मुश्किलें बढ़ीं
रियाल की गिरावट और महंगाई बढ़ने के बाद आम जनता सरकार से राहत की मांग कर रही है। हालांकि सरकार पहले से ही आर्थिक दबाव में है और उसके पास सीमित संसाधन बचे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटते, तब तक ईरान की आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है।
संघर्ष की आशंका से बढ़ी बेचैनी
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी से स्थिति को और गंभीर बना रही है। लोगों में डर है कि अगर दोबारा संघर्ष भड़कता है तो इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था, आपूर्ति सीरीज और आम जीवन पर पड़ेगा। ईरानी नागरिक चिंतित हैं कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से महंगाई और बेरोजगारी और अधिक बढ़ सकती है।
पिछले वर्ष का संघर्ष लोगों को अभी भी याद
लोगों को पिछले जून का वह दौर याद है, जब ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन तक भीषण संघर्ष चला था। उस समय अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद स्थितियों पर काबू पाया गया था लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब फिर से संबंधों में खटास बढ़ने की खबरों ने जनता की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
भविष्य को लेकर गहरी चिंता
ईरान की आर्थिक कमजोरी, चल रहे प्रतिबंध और क्षेत्रीय तनाव ने मिलकर एक ऐसी स्थिति बना दी है जिसने आम लोगों का जीवन कठिन कर दिया है। कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, आय घट रही है और रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं। जनता को डर है कि अगर हालात ऐसे ही खराब होते रहे, तो आने वाले महीनों में जीवन और मुश्किल हो सकता है।
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