जापान ने चीन की आर्थिक घेराबंदी को तोड़ने के लिए एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। जापान अब समुद्र की गहराई में जमा 'कीचड़' से बेशकीमती खनिज निकालकर अरबों की कमाई करने की तैयारी में है।
वर्तमान में पूरी दुनिया 'रेयर अर्थ मिनरल्स' के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है। स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कारों और लड़ाकू विमानों तक में इन खनिजों का इस्तेमाल होता है। चीन इस निर्भरता का फायदा अपनी कूटनीति में उठाता रहा है। जापान का यह मिशन सीधे तौर पर चीन के इस एकाधिकार (Monopoly) को खत्म करने के लिए बनाया गया है, ताकि दुनिया को एक सुरक्षित विकल्प मिल सके।
जापान के टोक्यो से लगभग 1,900 किलोमीटर दूर 'मिनिमिशिमा' द्वीप के पास समुद्र की तली में इन खनिजों का विशाल भंडार पाया गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यहाँ इतना कीचड़ और खनिज मौजूद है कि यह कई दशकों तक दुनिया की जरूरतों को पूरा कर सकता है। यह खोज जापान को वैश्विक सप्लाई चेन में एक 'कीचड़ किंग' के रूप में स्थापित कर सकती है।
समुद्र की 6,000 मीटर से अधिक गहराई से कीचड़ निकालना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए जापान अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक और गहरे समुद्र में ड्रिलिंग करने वाले जहाजों का उपयोग कर रहा है। चुनौती केवल कीचड़ निकालने की नहीं, बल्कि उससे खनिजों को अलग (Refine) करने की भी है, जिसमें जापान ने अब महारत हासिल कर ली है।
ये 'रेयर अर्थ मिनरल्स' आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। सेमीकंडक्टर, हाई-पावर मैग्नेट, बैटरी और ऑप्टिकल फाइबर जैसे उद्योगों के लिए ये अनिवार्य हैं। जापान खुद एक टेक्नोलॉजी हब है, इसलिए अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने और अन्य देशों को निर्यात करने के लिए यह प्रोजेक्ट उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हाल के वर्षों में चीन ने कई बार रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर पाबंदी लगाकर जापान और अमेरिका जैसे देशों को परेशान किया है। जापान ने इस दबाव को सहने के बजाय अपना खुद का स्रोत विकसित करने का फैसला किया। यह प्रोजेक्ट जापान की 'आर्थिक सुरक्षा' (Economic Security) की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
जापान ने अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर समुद्र की गहराई में मौजूद कीचड़ (Deep Sea Mud) से दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) को निकालने और उन्हें रिफाइन करने की तकनीक विकसित कर ली है। जिसे दुनिया अब तक महज कचरा या कीचड़ समझ रही थी, जापान ने उसमें छिपा हुआ भविष्य का 'खजाना' ढूंढ निकाला है। यह कदम वैश्विक बाजार में एक बड़ी क्रांति ला सकता है।