14
January
2026
30, एकादशी
कृष्ण पक्ष, 2082 विक्रम सम्वत, अनुराधा,
नई दिल्ली,India

Chandra Gochar 2026: खुल गया इन 4 राशियों का नसीब, कन्या में गोचर कर गए चंद्रमा
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आज का पंचांग 08-01-2026: तिथि, नक्षत्र, योग और मुहूर्त की सम्पूर्ण जानकारी

शुभ मुहूर्त

विवाह मुहूर्त 2025

वाहन खरीद मुहूर्त 2025

गृह प्रवेश मुहूर्त 2025

नामकरण मुहूर्त 2025

मुंडन मुहूर्त 2025

अन्नप्राशन मुहूर्त 2025
FAQs
मासिक पंचांग क्या होता है?
क्या मासिक पंचांग सभी स्थानों के लिए समान होता है?
मासिक पंचांग कहां से प्राप्त करें?
मासिक पंचांग का क्या महत्व है?
मासिक पंचांग क्या है
हिंदू धर्म में पंचांग का बहुत ही विशेष स्थान होता है। जैसे कि दैनिक पंचांग हमें रोज़मर्रा के शुभ-अशुभ समय, तिथि, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी देता है, वैसे ही मासिक पंचांग (Monthly Panchang) पूरे महीने के महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योगों, व्रत-त्योहारों और ग्रह गोचर की स्थिति का संपूर्ण विवरण प्रदान करता है।
मासिक पंचांग क्या होता है?
मासिक पंचांग एक प्रकार का हिंदू कैलेंडर है, जिसमें एक पूर्ण मास के सभी दिन, तिथियाँ, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्रमा की स्थिति, सूर्य की राशि परिवर्तन (सूर्य संक्रांति) और प्रमुख पर्वों का विवरण शामिल होता है। यह पंचांग न केवल धार्मिक कार्यों के लिए उपयोगी होता है बल्कि जीवन के हर क्षेत्र — जैसे विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय आरंभ या यात्रा — के लिए भी शुभ समय जानने में सहायक होता है।
मासिक पंचांग का महत्व
मासिक पंचांग हमें यह बताता है कि आने वाले महीने में कौन-कौन से शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार, अमावस्या-पूर्णिमा, एकादशी, प्रदोष, संक्रांति, और ग्रहों के गोचर कब पड़ रहे हैं। यह जानकारी व्यक्ति को अपने कार्यों की योजना बनाने में मदद करती है ताकि वह गलत समय या अशुभ योग में कोई बड़ा कार्य आरंभ न करे। वैदिक परंपरा में माना गया है कि समय का अपना एक प्रभाव होता है, और सही समय पर किए गए कार्यों का फल भी अधिक शुभ और स्थायी होता है।
मासिक पंचांग कैसे बनाया जाता है?
मासिक पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है। इसमें मुख्यतः पाँच अंग होते हैं —
1 तिथि (Tithi) – चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोण से तय होती है।
2 वार (Vaar) – सात दिनों के नाम जैसे रविवार, सोमवार आदि।
3 नक्षत्र (Nakshatra) – चंद्रमा जिस नक्षत्र में रहता है, वही उस दिन का नक्षत्र कहलाता है।
4 योग (Yoga) – सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनने वाले योग।
5 करण (Karana) – आधी तिथि को दर्शाने वाला भाग।
इन सभी पाँच अंगों को मिलाकर "पंचांग" कहा जाता है। संस्कृत में ‘पंचांग’ शब्द ‘पंच’ (अर्थात पाँच) और ‘अंग’ (अर्थात भाग) से मिलकर बना है। इसलिए, वह हिंदू कैलेंडर जो इन सभी पाँच अंगों को प्रदर्शित करता है, पंचांग कहलाता है। दक्षिण भारत में इसे ‘पंचांगम’ के नाम से जाना जाता है।
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