योगी सरकार ने शिक्षक दिवस पर किया गुरुओं का सम्मान, राज्य पुरस्कार से नवाजे गए देवब्रत त्रिपाठी

कोरोना की पहली लहर में जब प्रवासी मजदूर अपने घर लौट रहे थे तब भी प्रधानाचार्य देवब्रत न सिर्फ जनजागरूकता अभियाना चलाया था बल्कि शिक्षकों के साथ मिलकर लोगों को रहने और खाने की व्यवस्था भी की थी।

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शिक्षकों का सम्मान 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरूओं का सम्मान किया। फतेहपुर जिला स्थित अर्जुनपुर गढ़ा प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक देवब्रत त्रिपाठी का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार 2019 के लिए किया गया है। उनको यह सम्मान योगी सरकार के खाद्य एवं रसद मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह और जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने दिया है। यमुना कटरी स्थित अर्जुनपुर गढ़ा का यह प्राइमरी स्कूल अपनी कई और विशेषताओं के लिए भी सुर्खियों में है। यहां बेहतर शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों को दोपहर का भोजन कराने के लिए डाइनिंग हॉल भी बनवाया गया है, जिसमें करीब 200 बच्चे साथ बैठकर खाना खा सकते हैं। इस शिक्षा की बगिया को सजाने का श्रेय यहां के प्रधानाचार्य देवब्रत को जाता है। जिन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा व सुविधाएं मुहैया कराने के लिए शासन की मदद का इंतजार नहीं किया। उन्होंने खुद के खर्चे पर विद्यालय का सौन्दर्यीकरण कराया।

उन्होंने स्कूल का सौंदर्यीकरण कराने के साथ-साथ यहां के बच्चों को शिक्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक समय जब पूरे जनपद के स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठकर खाना खाते थे, उस समय इस विद्यालय के बच्चों के लिए डॉयनिंग टेबल की व्यवस्था उन्होंने की थी। बेसिक शिक्षा विभाग की संस्तुति पर उनका नाम राज्य अध्यापक पुरस्कार 2019 के लिए उनका चयन हुआ।

कोरोना की पहली लहर में जब प्रवासी मजदूर अपने घर लौट रहे थे तब भी प्रधानाचार्य देवब्रत न सिर्फ जनजागरूकता अभियाना चलाया था बल्कि शिक्षकों के साथ मिलकर लोगों को रहने और खाने की व्यवस्था भी की थी। इस विद्यालय को आदर्श क्वारंटाइन सेंटर भी बनाया था। इसके बाद उन्होंने बंद स्कूल के दौरान विद्यालय के आस-पास रह रहे लोगों को भी जागरूक किया था। यमुना नदी से कुछ दूरी पर स्थित स्कूल बुनियादी सुविधाओं को दुरूस्त करने के साथ विद्यालय को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए देवब्रत ने बहुत काम किया। उन्होंने बच्चों के अंदर शिक्षा की अलख जगाने के लिए कई प्रयास किये।

प्रधानाध्यापक के तौर पर सेवारत त्रिपाठी ने बताया कि 10 सितम्बर 1982 को प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर गढ़ा में बतौर सहायक अध्यापक नियुक्त हुए थे। तब इसका भवन जर्जर था और उसमें भी ग्रामीणों का अवैध कब्जा था। उन्होंने अधिकारियों के माध्यम से कई प्रयास किए। जिससे स्कूल की चहारदीवारी का निर्माण हुआ और कब्जा खत्म हो सका। अन्य सरकारी स्कूलों की तरह इस प्राथमिक पाठशाला में भी विद्यार्थियों की संख्या को बढ़ाने में उन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

प्रधानाचार्य ने बताया कि अक्सर पानी की दिक्कत से जूझने वाले इस इलाके में पूर्व में, स्कूल के छात्रों और शिक्षकों को कुएं से खींचकर पानी लाना पड़ता था। उन्होंने विद्यालय में हैण्डपम्प लगवाया और सबमर्सिबल मोटर की व्यवस्था की। छह कमरों वाले इस स्कूल की कक्षाओं और फर्श पर टाइल्स भी लगवाये गये हैं। कक्षा तीन, चार और पांच के विद्यार्थियों के बैठने के लिये फर्नीचर की व्यवस्था है, जो उन्होंने खुद ही की है।

उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था को मनोवैज्ञानिक तरीके से ऐसा रूप दिया गया कि बच्चों को पढ़ाई बोझ ना लगे। परिसर को कौतूहलपूर्ण बनाने के लिये फुलवारी तैयार की गयी, जिसमें फलदार वृक्ष लगाये गये। इसकी देखभाल वह खुद करते हैं। बच्चों को बागवानी से जोड़ने के मकसद से इस बगीचे में कई चीजें उगायी जाती हैं। उन्होंने बताया कि अब पुरस्कार पाने के बाद जिम्मेंदारी और बढ़ गयी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों को शिक्षा के लिए और जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाका होंने के कारण जो बच्चे घर से नहाकर नहीं आते हैं, उन्हें विद्यालय में स्नान करवाने के लिये साबुन, तौलिये, कंघा, तेल इत्यादि की व्यवस्था है।

विद्यालय के समीप रहने वाले करूणा शंकर मिश्र ने बताया कि महज कुछ वर्षो में गांव के इस प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर बदल गयी है। विद्यालय को अवैध कब्जामुक्त कराने में देबब्रत का अहम योगदान है। पहले स्कूल में गिने-चुने बच्चे आते थे, लेकिन अब संख्या में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। प्रधानाध्यापक देवब्रत त्रिपाठी की स्कूल के प्रति व्यक्तिगत लगनशीलता सराहनीय है। यह स्कूल एक मिसाल बन गया है।

शिक्षक दिवस पर इस बार राज्यस्तरीय आयोजन भले न हुआ हो, लेकिन, जिलों में उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान किया गया। पहली बार बड़ी संख्या में उच्च, माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग ने हर जिले में अपने स्कूलों के 75-75 शिक्षकों को सम्मानित हुए। यानी तीनों विभागों के मिलाकर हर जिले में 225 शिक्षक सम्मानित किए गए। 

वर्ष 2020 के राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित माध्यमिक शिक्षकों को अनिवार्य रूप से सम्मानित कराने के निर्देश दिए थे। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से सम्मान समारोह नहीं हुआ था। बेसिक शिक्षा निदेशक ने भी राज्य अध्यापक पुरस्कार 2019 के लिए चयनित 73 शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर सम्मानित करने का निर्देश दिया है। चयन सूची 2020 में जारी हुई थी। इसमें दो जिलों हाथरस व कौशांबी को छोड़कर हर जिले के एक शिक्षक को सम्मानित हुए है।

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