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Temple Wedding Trend: जब खर्च सकते हैं लाखों तो क्यों फिल्मी सितारे कर रहे हैं मंदिर में शादी?

Temple Wedding Trend 2026: सेलेब्रिटी कपल्स के मंदिर में शादी करने से Temple Wedding आने वाले साल का वेडिंग का सबसे बड़ा ट्रेंड बन गया है। कपल्स भीड़, खर्च और लाइमलाइट से बचकर शांत, निजी और आध्यात्मिक शादी चुन रहे हैं। तो सोशल मीडिया पर वायरल मंदिर वेडिंग तस्वीरों ने इस ट्रेंड को और लोकप्रिय किया है। वहीं वेडिंग इंडस्ट्री भी अब मिनिमल और इंटीमेट वेडिंग पैकेज तैयार कर रही है। और कैसे ये समाज में रिश्तों की बदलती रूपरेखा से प्रभावित हो रहा है। पढ़ें मंदिर में शादी के चलन पर ये जानकारी।

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Temple Wedding Trend 2026: क्यों बढ़ रहा है सादगी और मंदिर में शादी का चलन

Temple Wedding Trend 2026: सोशल मीडिया पर इन दिनों सामंथा रूथ प्रभु की शादी की तस्वीरें छाई हैं। लाल साड़ी में सामंथा का पारंपरिक लुक जितना वायरल है, उतनी ही चर्चा उनके वेडिंग वेन्यू की हो रही है। सामंथा ने कोयंबटूर स्थित ईशा योगा सेंटर के लिंग भैरवी मंदिर में डायरेक्टर राज निदिमोरू से दूसरी शादी की है। कुछ दिन पहले टीवी एक्टर जोड़ी अश्लेषा सावंत और संदीप बसवाना ने भी एक्सॉटिक लोकेशंस छोड़कर वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर में विवाह किया था।

भगवान की शरण में सादगी से शादी करना नई बात नहीं है, लेकिन स्टार स्टेटस के बावजूद सेलेब्स का इतना सिंपल वेडिंग करना हैरान जरूर करता है - और शायद इसी के साथ 2026 के लिए एक नया वेडिंग ट्रेंड भी सेट हो रहा है।

सामांथा और राज ने लिंग भैरवी मंदिर में विवाह किया है

सामांथा और राज ने लिंग भैरवी मंदिर में विवाह किया है

धीरे-धीरे उभरता ट्रेंड

ग्लैमर की दुनिया में कई कपल्स ने पिछले कुछ वर्षों में बिना तामझाम वाली, आध्यात्मिक शादी को चुना है। साउथ और बॉलीवुड की लोकप्रिय जोड़ी अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ ने तेलंगाना के 400 साल पुराने रंगनायक स्वामी मंदिर में शादी की थी। इशिता दत्ता और वत्सल सेठ ने जुहू के इस्कॉन मंदिर में सात फेरे लिए थे। 2018 में नेहा धूपिया और अंगद बेदी ने गुरुद्वारे में सिंपल वेडिंग कर सबको चौंका दिया था। वहीं नागा चैतन्य और शोभिता धूलिपाला की शादी में मंदिर जैसा मंडप तैयार किया गया था।

वेडिंग प्लानर प्रशांत मित्तल के अनुसार- आज कपल्स शादी को अपने पर्सनल मोमेंट की तरह देख रहे हैं। उन्हें बस दूल्हा-दुल्हन और करीबी लोग चाहिए—भीड़ नहीं। साथ ही मंदिरों में मिलने वाला आध्यात्मिक माहौल भी इस ट्रेंड को बढ़ाने लगा है।

अदिति और सिद्धार्थ की शादी 400 साल पुराने मंदिर में हुई

शादी में लौटती शांति

फिल्मी दुनिया में शादी हमेशा ग्रैंड समझी जाती रही है- डेकोर, मेन्यू, गेस्ट लिस्ट, प्री-वेडिंग शूट और इंस्टा-परफेक्ट सेटअप। लेकिन अब कई कपल इस शोर-शराबे से दूरी बनाते दिखते हैं। शायद कहीं न कहीं यह भाव उभर रहा है कि भव्यता में शादी का मूल भाव यानी शांति, आत्मीयता और पवित्रता - कहीं पीछे छूट जाती है। इसलिए मंदिर वेडिंग धीरे-धीरे 'रिलेशनशिप रीसेट' जैसा भाव पैदा कर रही है, जहां कपल पूरी व्यवस्था नहीं बल्कि सिर्फ अपने रिश्ते पर फोकस करता है।

वेडिंग प्लानर निशिता कहती हैं कि वेडिंग को लेकर ट्रेंड्स आते-जाते हैं। जैसे विराट-अनुष्का और रणवीर-दीपिका के बाद डेस्टिनेशन वेडिंग की लहर चली। फिर रणबीर-आलिया के बाद होम वेडिंग्स का ट्रेंड आया। बीच-बीच में आलीशान शादियों के साथ उदयपुर लुभावना वेडिंग डेस्टिनेशन बना ही हुआ है। इसी के साथ अब लोग मंदिर में पवित्रता और शांति तलाश रहे हैं।

नेहा धूपिया और अंगद बेदी ने गुरुद्वारे में शादी की थी

ताकि शादी शुभ रहे…

हालांकि मनोवैज्ञानिक डॉ. वैभव चतुर्वेदी के अनुसार यह ट्रेंड सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक व्यवहार का संकेत भी है। उनका कहना है - आज की पीढ़ी रिश्तों को लेकर पहले से कहीं ज्यादा एक्सपोज्ड है। डेटिंग ऐप्स, शादी से पहले साथ रहने की आजादी, सोशल मीडिया और बदलते रिश्तों ने कमिटमेंट को कहीं ज्यादा जटिल बना दिया है। नई जनरेशन शादी को लेकर ज्यादा कंफ्यूज्ड, कम स्टेबल और भावनात्मक रूप से सतर्क हो गई है।

भव्यता से भरी बड़ी शादी उन्हें फैसलों का दबाव देती है, जबकि मंदिर में होने वाली शांत और सरल शादी कम तनावपूर्ण लगती है। यह एक तरह से दो विपरीत भावनाओं- अविश्वास और आस्था - के बीच संतुलन बनाती है। ऐसे में कपल्स को लगता है कि इस तरह शादी सामाजिक दिखावे से हटकर एक निजी, पवित्र और अर्थपूर्ण शुरुआत बन जाती है।

क्यों नई पीढ़ी मंदिर विवाह चुन रही है

क्यों नई पीढ़ी मंदिर विवाह चुन रही है

लाइमलाइट में दूल्हा-दुल्हन

भव्य शादियों में दूल्हा-दुल्हन अक्सर एक 'पब्लिक इवेंट' का सेंटर बन जाते है और इस दबाव में रहते हैं कि हर फोटो, हर एंट्री, हर लुक परफेक्ट होना चाहिए। कैमरों और मेहमानों की भीड़ उनकी निजी सहजता छीन लेती है।

इसी वजह से कई कपल इस लाइमलाइट से दूर रहकर मंदिर का विकल्प चुन रहे हैं जहां वे सामाजिक दबाव में नहीं, बल्कि भाव से भावी जीवन की शुरूआत कर सकें।यहां कोई मेहमान उनकी लाइमलाइट नहीं छीनता और न ही वे कैमरों के निर्देशों में उलझते हैं।

अश्नेषा और संदीप ने वृंदावन के मंदिर में विवाह रचाया

अश्नेषा और संदीप ने वृंदावन के मंदिर में विवाह रचाया

सिंपल शादी और ग्रैंड रिसेप्शन

वेडिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले सालों में एक नया कॉम्बिनेशन सबसे लोकप्रिय रहेगा - सिंपल शादी और ग्रैंड रिसेप्शन। प्रशांत का कहना है कि कई कपल चाहते हैं कि शादी आध्यात्मिक और निजी हो, लेकिन सेलिब्रेशन, फैशन और धूमधाम का मजा भी मिले। ऐसे में मंदिर में सादगी से शादी करने और बाद में बड़े रिसेप्शन का विकल्प दोनों जरूरतों को पूरा करता है। इस तरह रस्में पवित्रता वाली भावनाएं बरकरार रखते हुए होंगी और ग्रैंड सजावट, फूड, फैशन और एंटरटेनमेंट के साथ रिसेप्शन हो जाएगा।

सोशल मीडिया की भूमिका

इसमें कोई दो राय नहीं है कि इंस्टाग्राम और पिंटरेस्ट पर वायरल मंदिर वेडिंग की तस्वीरों ने इस ट्रेंड को नई ऊंचाई दी है। लाल साड़ी, फूलों से सजा मंदिर, मंत्रों की ध्वनि - ये विजुअल्स आज के कपल्स को भव्य होटलों से ज्यादा खूबसूरत लगने लगे हैं। जब सेलेब्स की सिंपल शादी पर लाखों लाइक्स आते हैं, आम लोग भी महसूस करने लगते हैं कि कम बजट, कम शोर, लेकिन हाई एस्थैटिक वैल्यू वाली शादी भी उतनी ही यादगार हो सकती है। सोशल मीडिया ने मंदिर वेडिंग्स को सिर्फ पवित्र नहीं, बल्कि एक 'एस्थेटिक लाइफस्टाइल आइडिया' बना दिया है।

इशिता और वत्सल ने इस्कॉन में शादी रचाई थी

इशिता और वत्सल ने इस्कॉन में शादी रचाई थी

वेडिंग इंडस्ट्री का बदलता बिजनेस मॉडल

मंदिर वेडिंग्स ने वेडिंग इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला दिया है। बड़े डेकोर प्रोजेक्ट्स की जगह अब 'इंटीमेट वेडिंग पैकेज' तैयार हो रहे हैं जिनमें परमिशन, मिनिमल डेकोर, छोटे मंडप, सीमित फोटोग्राफी और कॉम्पैक्ट गेस्ट मैनेजमेंट शामिल है। होटल्स भी अब मंदिरों के आसपास के शांत ओपन-एयर स्पेसेज को प्रमोट करने लगे हैं। यानी यह सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के लिए एक नए सेगमेंट की शुरुआत है।

क्या यह ट्रेंड टिकेगा?

निशिता का मानना है कि मंदिर वेडिंग सिर्फ एक फेज नहीं, बल्कि शादी के अर्थ में आए बदलाव का संकेत है। आज की युवा पीढ़ी खर्च से ज्यादा अनुभव, आध्यात्मिकता और प्राइवेसी को महत्व देती है। डेस्टिनेशन वेडिंग्स और ग्रैंड बॉल-रूम सेरेमनीज अपनी जगह रहेंगी, लेकिन मंदिर वेडिंग्स आने वाले समय में एक स्थायी विकल्प के रूप में और मजबूत होंगी। खासकर मिडल क्लास और अर्ली-थर्टीज कपल्स के बीच इसका चलन खूब होगा। यानी मतलब साफ है कि बजट-फ्रेंडली, भावनात्मक रूप से अर्थपूर्ण और सोशल मीडिया-फ्रेंडली शादी का यह कॉम्बिनेशन 2026 में आया तो फिर लंबे समय तक चलने वाला है।

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