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Vande Mataram: वह गीत जिसमें पहली बार 'देवी' बना देश, जानिए क्या कहता है राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम

Vande Mataram Lyrics in Hindi: भारतीय समाज की खासियत यह रही है कि यहां देवताओं की कल्पना से पहले देवी के स्वरूप को स्वीकार करना ज्यादा सहज माना गया। शक्ति, प्रकृति और सृजन, इन सबका मूल स्त्रोत स्त्री ही समझी गई। यही वजह है कि जब राष्ट्र की अवधारणा को सरल भाषा में समझाने की आवश्यकता होती है, तो उसे माता के रूप में ही देखा जाता है।

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वंदे मातरम लिरिक्स इन हिंदी

Vande Mataram Meaning, Lyrics in Hindi: संसद के शीतकालीन सत्र और भारतीय राजनीति में इन दिनों देश के राष्ट्रगीत वंदे भारत की चर्चा जोरों पर है। वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय भावना को जाग्रत करने वाला गीत है। इस गीत के हर एक शब्द में भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कार झलकते हैं। इस गीत को लिखा था लेखक और विचारक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने। 150 साल पहले लिखा गया यह गीत हमेशा से देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

जब वंदे मातरम में 'देवी' बना देश

भारत की प्राचीन परंपराओं और सनातन विचारधारा में मां और मातृभूमि को एक ही दृष्टि से देखने की संस्कृति रही है। हमारे सामाजिक ढांचे में धरती सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि ममता और पोषण का प्रतीक मानी जाती है। यही भाव आदिवासी परंपराओं में भी दिखाई देता है, जहां जल, जंगल और जमीन को माई कहा जाता है।

भारतीय समाज की खासियत यह रही है कि यहां देवताओं की कल्पना से पहले देवी के स्वरूप को स्वीकार करना ज्यादा सहज माना गया। शक्ति, प्रकृति और सृजन, इन सबका मूल स्त्रोत स्त्री ही समझी गई। यही वजह है कि जब राष्ट्र की अवधारणा को सरल भाषा में समझाने की आवश्यकता होती है, तो उसे माता के रूप में ही देखा जाता है।

vande Mataram (2)

वंदे मातरम

राष्ट्र और भूमि को मां का रूप देना सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से गहराई से जुड़ा हुआ विचार रहा है। इसी परंपरा को भारत माता और भारत भूमि के दैवीकरण में देखा जा सकता है। यह दैवीकरण किसी कृत्रिम प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक चेतना का सहज विस्तार है।

इसी भाव को वंदे मातरम् जैसे गीत अत्यंत सरल और प्रभावशाली रूप में व्यक्त करते हैं जहां राष्ट्र भूमि एक देवी के रूप में उभरती है, जो स्नेह, सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक होती है। इस प्रकार भारत में राष्ट्र की अवधारणा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी मां के स्वरूप से जुड़ी हुई है।

वंदे मातरम हिंदी लिरिक्स

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

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राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम

भावार्थ: हे मातृभूमि मैं, तुम्हारी वंदना करता हूं. पानी से सींची, फलों से भरी, दक्षिण की वायु (वह हवा जो मलय पर्वत के उस पार से आती है) के साथ शान्त, फसलों से लहलहाती हमारी मातृभूमि, आपकी वंदना करता हूं।

जिस भूमि पर आने वाली रातें चांदनी की गरिमा में प्रफुल्लित हो रही हैं, जिसकी जमीन खिलते फूलों वाले पौधों और मौसमी फलों वाले वृक्षों से ढकी हुई बड़ी ही सुंदर और मनभावन लगती है। जिसके निवासियों के मुखड़ों पर हंसी की मिठास और वह मधुर वाणी के साथ बोलते है। अपने पुत्रों को ऐसा सुंदर वरदान देने वाली ओ माता, प्यारी मातृभूमि मैं तुम्हारी वंदना करता हूं।

माता! वरदान देने वाली, आनन्द देने वाली। हमारी यह मातृभूमि हम सभी को सुख समृद्धि (आनन्द) का वरदान देने वाली है। मैं इस मातृभूमि की वन्दना करता हूं।

सप्तकोटि कण्ठ कल कल निनाद कराले

द्विसप्त कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले

के बोले मा तुमी अबले

बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्

रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥

भावार्थ: हे मातृभूमि! तेरे सात करोड़ पुत्रों की कल-कल ध्वनियों से तू प्रचंड और गूंजती हुई लगती है और इससे दोगुने वीर भुजाओं में धारण किए हुए तेज़ अस्त्र-शस्त्र तुझे और भी भयानक, शक्तिशाली और विजयी रूप प्रदान करते हैं. ऐसी स्थिति में, हे मां! कौन यह कहने का साहस कर सकता है कि तू अबला या कमजोर है?

तू तो असंख्य शक्तियों की धारिणी है, उद्धार करने वाली तुम्हें नमस्कार, क्योंकि तुम तो शत्रुओं की असंख्य सैनिकों वाली सेना का पल में विनाश कर डालने वाली हो। हे मां! मैं तुझे नमन करता हूं।

तुमि विद्या तुमि धर्म,

तुमि हृदि तुमि मर्म,

त्वम् हि प्राणाः शरीरे,

बाहुते तुमि मां शक्ति,

हृदय़े तुमि मां भक्ति,

तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे।

वन्दे मातरम् ।।

भावार्थ: हे मातृभूमि! तुम ही हमारी विद्या हो, तुम ही हमारा धर्म हो। तुम ही हमारे हृदय में निवास करती हो, और तुम ही हमारे जीवन का मूल तत्व और चेतना हो जिससे शरीर का प्राण उसकी आत्मा कहते हैं।

हेहे मां! तुम ही हमारे शरीर की जीवन-शक्ति हो. जो साहस और सामर्थ्य हमारी बाहों में है वह भी तुम्हीं से प्राप्त है. हमारे हृदय में जितनी भक्ति और आस्था है वह भी तुम्हारे ही प्रति है।

इसलिए हम तुम्हारी ही प्रतिमाएं हर मंदिर में स्थापित करते हैं, क्योंकि तुम केवल भूमि नहीं, तुम हमारी आराध्य देवी हो, हमारा ज्ञान, हमारा धर्म, हमारी शक्ति और हमारी भक्ति का स्वरूप हो।

त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,

कमला कमलदलविहारिणी,

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,

नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,

सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्।।

vande Mataram (1)

वंदे मातरम पीडीएफ

भावार्थ: हे मां! तुम ही दुर्गा हो और दस महाविद्याओं की तरह दस-दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली, सुरक्षा और शक्ति का अद्वितीय रूप हो. तुम ही कमला (लक्ष्मी) हो, कमल के कोमल दलों पर विहार करने वाली, समृद्धि और सौभाग्य देने वाली हो. तुम ही वाणी हो, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री, विद्या प्रदान करने वाली देवी यानी सरस्वती।

हे मां! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं, तुम्हें, जो कमला के समान उज्ज्वल हो, मलिनता से रहित, पवित्र, अद्वितीय हो, सुजल (जल-सम्पन्न), और सुफल (फल-सम्पन्न) समृद्ध और कल्याणकारी मातृभूमि हो. मैं तुम्हारी वंदना करता हूं।

श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्,

धरणीम् भरणीम् मातरम्।

वन्दे मातरम्।

भावार्थ: हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं। तुम श्यामल हो, हरियाली से ढकी, सौम्य, जीवन से भरी हुई। तुम सरल हो, अपनी प्रकृति और स्वभाव में उदार, निर्मल और सुलभ। तुम सुस्मित हो। अपनी सुंदरता में मुस्कान बिखेरती हुई, फूलों, खेतों और प्रकृति की सौम्य दीप्ति से शोभित। तुम भूषित हो, धान्य, पुष्प, वृक्ष और वन-संपदा से सजी हुई।

तुम धरणी हो, जीवन को धारण करने वाली, सबकी पोषक धरती और तुम भरणी हो, अपने बच्चों का पालन-पोषण करने वाली, उनकी आवश्यकता पूरी करने वाली.। हे मां! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं।

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