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बेटे ने पिता की मौत पर लिखा गाना, सबने समझा प्यार का नगमा, क्यों हकीकत जान रो पड़े लोग

Tere Bin Sanu Soneya: सबसे पहले यह गाना सुनाई दिया साल 2004 में। तब रब्बी शेरगिल ने रब्बी नाम से एक एल्बम रिलीज किया था। यह वही एल्बम था जिसमें 'बुल्ले दी जाणा मैं कौन' ब्लॉकबस्टर साबित हुआ था। इसी एल्बम का यह गाना 'तेरे बिन सानु सोणिया' भी खूब हिट हुआ। इतना हिट हुआ कि साल 2007 में आई बॉलीवुड फिल्म दिल्ली हाइट्स में भी यह सुनाई दिया। फिल्म में यह गाना फिल्माया गया था जिमी शेरगिल और नेहा धूपिया पर।

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प्यार का नगमा नहीं पिता को खोने का दर्द है यह गाना, हकीकत जान रो पड़ेंगे आप

बहुत से गाने ऐसे होते हैं जो हमें सुनने में अच्छे लगते हैं। हम सुनते हैं, सुनाते हैं और अकसर अकेले में गुनगुनाते भी हैं। लेकिन कई दफा ये भी होता है कि हम उस गीत का असली मतलब ही नहीं समझते। ऐसा ही एक गाना है जिसे हम करीब 20 सालों से सुनते आ रहे हैं। कोई इसे लव सॉन्ग समझता है तो कोई इस प्यार में बिछड़ने की कसक का राग। हकीकत में तो ये कुछ और ही है। इस गाने को लोगों ने पहली बार सुना साल 2004 में। गाने के बोल थे- तेरे बिन सानु सोणिया, कोई होर नहियो लभना..। गाने को लोगों ने पसंद तो खूब किया लेकिन सालों तक इसका दर्द कोई नहीं समझ पाया।

इस गाने को गाया था सिख परिवार में जन्मे गुरप्रीत सिंह शेरगिल ने। इन्हें दुनिया आज रब्बी शेरगिल के नाम से जानती है। रब्बी के पिता जागीर सिंह सिख धर्म प्रचारक थे। वह गुरबानी और सिख साहित्य के विद्वान भी थे। रब्बी की मां मोहिंदर कौर गिल दिल्ली के माता सुंदरी कॉलेज की प्रिंसिपल थीं और पंजाबी कवयित्री भी। रब्बी की चार बहनें हैं, जिनमें से एक गगन गिल प्रसिद्ध हिंदी कवयित्री हैं।

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रब्बी शेरगिल का पहला म्युजिक एल्बम रब्बी (Photo: Rabbi Shergill fb)

खैर लौटते हैं रब्बी शेरगिल के 'तेरे बिन सानु सोणिया' पर। यह गाना हम पिछले 21 सालों से सुन रहे हैं। इसे सुनते ही दिल एक अजीब तरह की उदासी में डूब जाता है। सबसे पहले यह गाना सुनाई दिया साल 2004 में। तब रब्बी शेरगिल ने रब्बी नाम से एक एल्बम रिलीज किया था। यह वही एल्बम था जिसमें 'बुल्ले दी जाणा मैं कौन' ब्लॉकबस्टर साबित हुआ था। इसी एल्बम का यह गाना 'तेरे बिन सानु सोणिया' भी खूब हिट हुआ। इतना हिट हुआ कि साल 2007 में आई बॉलीवुड फिल्म दिल्ली हाइट्स में भी यह सुनाई दिया। फिल्म में यह गाना फिल्माया गया था जिमी शेरगिल और नेहा धूपिया पर।

फिल्म में आने के बाद तो यह गाना पंजाब की सरहदें तोड़ पूरे देश में गाया और गुनगुनाया जाने लगा। यह गाना युवाओं के बीच खूब पॉपुलर हुआ। लड़के लड़कियां इसे रोमांटिक लव सॉन्ग मान एक दूसरे के लिए गाने लगे। फिल्म में भी प्रेमी-प्रेमिका के बिछड़ने पर ही इस गाने को फिल्माया गया।

देखते देखते यह गाना दिल्ली के आसपास पंजाबी समझने वाले युवाओं का लव एंथम बन गया। इतना सबकुछ होने के बीच लोग इस गाने की हकीकत से अनजान थे। इतने अनजान थे कि जिस गाने को वह प्यार और जुदाई का नगमा समझ कर गा बजा रहे थे वह तो एक बेटे ने अपने पिता की मौत पर श्रद्धांजलि के तौर पर रचा था।

जी हां, युवाओं का यह लव एंथम दरअसल रब्बी शेरगिल ने अपने पिता की मौत के बाद उन्हें याद करते हुए बनाया था। इस गाने में किसी प्रेमी-प्रेमिका का गम नहीं बल्कि एक बेटे की अपने पिता से शिकायत, दर्द और उस प्रेम की कहानी कैद है जिसे कभी बयां नहीं किया जा सका।

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पिता की मौत पर रचा गीत (Photo: Rabbi Shergill fb)

हुआ ये था कि रब्बी शेरगिल के पिता जगीर सिंह अपने अंतिम समय में किसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे थे। यह बात उन्हें और डॉक्टरों को तो पता थी लेकिन उन्होंने कभी अपने इकलौते बेटे रब्बी को नहीं बताया। वह जब तक जिंदा रहे इस बात को बेटे से छुपाए रखा। एक रोज पिता जागीर सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। रब्बी के सिर से पिता का साया उठ गया।

पिता के देहांत के कुछ समय बाद रब्बी को किसी और से पता चला कि उनके पिता किसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे थे। यह राज खुला तो रब्बी को बड़ा झटका लगा। रब्बी समझ गए कि अपने सबसे बुरे और मुश्किल समय में भी उन्होंने अपने बेटे को इन सारी परेशानियों से दूर रखा। वो नहीं चाहते थे कि उनका बेटा इन सब चीजों के कारण तनाव में आए। लेकिन जब यह राज खुला तो रब्बी टूट गए। उनका दर्द और भी ज्यादा बढ़ गया।

इंतेहां तो तब हो गई जब रब्बी को उनके पिता के निधन के बाद उनका एक खत मिला जो उन्होंने रब्बी के लिए लिखा था। उस खत को पढ़ने के बाद रब्बी शेरगिल ने जो महसूस किया उसी भाव को उन्होंने अपने इस गीत में उतार दिया। पिता की मौत के बाद तैयार किया गया रब्बी शेरगिल का यह गाना एक तरह की श्रद्धांजलि और शिकायत का मिला जुला एहसास था।

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अपने पिता के साथ रब्बी (Photo: Rabbi Shergill fb)

इस गाने के बोल खुद रब्बी शेरगिल ने लिखे हैं। इसमें वारिस शाह के एक शेर का भी जिक्र है। यह शेर रब्बी के पिता ने बेटे के नाम लिखे अपने उस आखिरी खत में भी किया था। इसी पर रब्बी ने अपने इस गाने के अंतिम अंतरे में लिखा:

मिलिया सी अज्ज मैनूं

तेरा ऐक पत्रा

लेखेया सी जेस ते

तू शेर वारेशाह दा

पड़ के सी ओस नूं

हन्जू ऐक दुलिया

अक्खां चु बंद सी

एह राज़ आज्ज खुलिया

की तेरे बिन एह मेरे हन्जू

किसे होर नहियो चोमणा

की तेरे बिन एह मेरे हन्जू

मिट्टी विच रोलणा

तेरे बिन सानु....

यहां रब्बी बता रहे हैं कि पिता का एक पुराना पत्र मिला, जिसमें वारिस शाह का शेर लिखा था। उसे पढ़कर आंसू आ गए और दिल का राज खुल गया। इसके बाद वह अपने पिता से शिकायत कर रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को अपने दर्द से अलग क्यों रखा। क्यों उन्होंने अपना यह राज मुझे नहीं बताया।

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रब्बी शेरगिल (Photo: Rabbi Shergill fb)

जिवे रुकिया सी तु ज़रा

नहिओ भलणा मैं सारी उम्र

जिवे आन्खेयां सी अखां चुरा

रोवेगा सानु याद कर

हसेयां सी मैं हंसा अजीब

पर तू नहीं सी हसेयां

रब्बी बता रहे हैं कि अपने अंतिम दिनों में उनके पिता ने आंखें चुराकर मुझसे कहा था कि मुझे याद करके रोओगे। मैने इसे मजाक में लिया और हंस दिया था। लेकिन पिता बिल्कुल भी हंसे नहीं। दरअसल वो जानते थे उनकी बीमारी बहुत गंभीर है और बाप बेटे का यह साथ बहुत ज्यादा दिन तक नहीं रहने वाला। जब रब्बी को वो बातें याद आईं तो वो टूट गए। अपने इसी बिखरने को समेट कर रब्बी ने लिखा:

दिल विच तेरा जो राज सी

मैनू तू क्यों नई दसेयां

तेरे बिन सानु एह रा

किसे होर नहियो दसना

तेरे बिन पीड़ दा इलाज

किस वैद कोलो लभणा

तेरे बिन सानु...

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अपने पिता के बेहद करीब थे रब्बी (Photo: Rabbi Shergill fb)

यहां रब्बी अपने पिता से शिकायत करते हुए कह रहे हैं आपके दिल में जो राज था वो आपने क्यों नहीं बताया। अपने दर्द को मुझसे क्यों नहीं बांटा। आपके सिवा मुझे जब ये किसी और से पता चला तो मैं पूरी तरह से बिखर गया। यह गाना हमें यह भी बताता है कि आप पूरी दुनिया घूम लें लेकिन जो प्यार और अपनापन पिता के होने से हमारी जिंदगी में होता हैवो कोई और नहीं दे सकता। तभी तो उन्होंने लिखा:

वे मैं सारे घुम्म के वेखिया

अमरीका, रूस, मलेशिया

न कित्ते वि कोई फर्क सी

हर किसे दी कोई शर्त सी

कोई मंगदा मेरा सी समां

कोई हौंदा सूरत ते फ़िदा

कोई मंगदा मेरी सी वफ़ा

ना तो मंगदा मेरियां बला

तेरे बिन होर ना किसे

मंगणी मेरियां बला

तेरे बिन होर ना किसे

करनी धौप वैच छां

तेरे बिन सानु...

रब्बी अपने पितो को याद कर लिखते हैं कि मैंने पूरी दुनिया घूम कर देख ली। अमेरिका, रूस से मलेशिया तक, कोई ऐसा नहीं मिला जो पिता की तरह मेरे अंदर के दर्द को समझ ले। कोई नहीं मिला जो मेरे नखरे उठा सके। किसी को मेरा समय चाहिए तो कोई मेरी सूरत पर फिदा है। कोई मेरी वफा चाहता है लेकिन कोई मेरी बलाएं (परेशानियां) नहीं मांगता। पापा एक आप ही थे जो बिना शर्त सब सहते थे।

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आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है तेरे बिन (Photo: Rabbi Shergill fb)

इस पूरे गाने में बार बार सोणिया शब्द का इस्तेमाल हुआ है। यही शब्द लोगों के भ्रम का सबसे बड़ा कारण भी है। उन्हें लगा कि यह सोणिया शब्द गीतकार ने किसी प्रेमिका के लिए चुना है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। यहां यह सोणिया पिता के लिए सम्मान के इजहार का सबसे मजबूत शब्द है। यही इस गाने की सबसे बड़ी यूएसपी भी है।

यह गाना जब साल 2004 में पहली बार रिलीज हुआ तो बतौर पंजाबी एल्बम यह बहुत बड़ा हिट साबित हुआ। जो लोग इस गाने के पीछे का मर्म समझते थे वो इसे सुनकर एक अलग दुनिया में होते। वहीं जो इसे प्रेम का अंदाज-ए-बयां समझ रहे थे वह भी जार-जार होकर रोए।

अपने पिता से हमेशा के लिए बिछड़ने के इस विरह गीत में पंजाबी रॉक और सूफी संगीत की ऐसी जुगलबंदी हुई कि आज 21 साल बाद भी यह सुनने वालों के रोंगटे खड़े कर देता है। जो इस गाने का असली मकसद औऱ अर्थ समझते हैं उनके लिए तो यह गाना कुछ और ही है।

कुल मिलाकर यह गाना बाप-बेटे के रिश्ते की उस अधूरी बातचीत का दर्द है, जो कभी पूरी हुई ही नहीं। रब्बी शेरगिल के इस गाने ने सही मायने में साबित कर दिखाया कि संगीत सिर्फ वो नहीं है जो हमारा-आपका मनोरंजन करे, यह तो उसे रचने वाले के दिल में दबे सबसे गहरे राज का उजागर होना है जिसे वह चाहकर भी बयां नहीं कर पाता है।

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