Sari Saga: सदियों पुरानी कढ़ाई, आज भी सुपरहिट! पढ़ें क्या है पारसी गारा साड़ी की कहानी, कीमत और खासियत
Sari Saga, Parsi Gara Saree: भारत के अलग अलग हिस्सों में बेहद खूबसूरत प्रकार की साड़ियां मिलती हैं। उन्हीं में से एक है पारसी गारा साड़ी, जिसका इतिहास सदियों पुराना है और समुद्र पार से आया है। आज ये साड़ियां विरासत ही नहीं बल्कि स्टाइल स्टेटमेंट भी हैं। देखें क्या है गारा साड़ियों की कहानी, कीमत और खासियत।
- Authored by: अवनी बागरोला
- Updated Jan 20, 2026, 02:14 PM IST
Sari Saga, Parsi Gara Saree: भारतीय साड़ियां केवल एक पहनावा नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और बहुत ही खूबसूरत विरासत का हिस्सा हैं। जो पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी सादगी और सुंदरता से महिलाओं की अलमारी की शान बढ़ाती आई हैं। देश के कोने कोने में बहुत ही खूबसूरत और अनोखी साड़ियां मिलती हैं। जो अपने अलग कपड़े, कारीगरी और बुनाई के लिए जानी जाती हैं। साड़ियों की बुनाई की जहां बात आती है, वहां आपके दिमाग में भी बेशक ही चिकनकारी से लेकर जरदोजी, फुलकारी जैसी बुनाई तक का ख्याल आता होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, इनके अतिरिक्त भी एक खास तरह की एम्ब्रॉयडरी होती है, जो आज के दौर में एक बार फिर ट्रेंड में आ रही है। बीते दिनों में इस खास बुनाई वाली साड़ी को नीता अंबानी से लेकर कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेस ने स्टाइल किया है।
कौन सी साड़ी है ये
यहां हम बात कर रहे हैं, सदियों पुराना इतिहास रखने वाली गारा साड़ियों की.. पारसी गारा साड़ी का इतिहास करीब 150–200 साल पुराना है। 19वीं सदी में जब गुजरात के पारसी व्यापारी चीन के कैंटन बंदरगाह से चाय का व्यापार करते थे। तब वे वहां से अपनी पत्नियों के लिए चीन का रेशमी कपड़ा गाज लेकर आया करते थे। इन्हीं चाइनीज सिल्क पर ड्रैगन, फूल, पक्षी और बेल-बूटों की बारीक हाथ कढ़ाई को गारा एम्ब्रॉयडरी कहा गया। यह साड़ी पारसी महिलाओं की पहचान बन गई और पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के रूप में सौंपी जाने लगी। और आज इसे दुनिया भर में पारसी गारा साड़ी के नाम से जाना जाता है।
क्यों होती हैं गारा साड़ियां इतनी खास
गारा साड़ी पूरी तरह हाथ से कढ़ी जाती है। एक साड़ी तैयार होने में 6 महीने से लेकर एक-दो साल तक का समय लग सकता है। इसकी कढ़ाई इतनी बारीक होती है कि इसे दोनों तरफ से एक जैसा माना जाता है। यही वजह है कि ये साड़ियां बेहद कीमती और दुर्लभ मानी जाती हैं।
ऐसा होता है डिजाइन
पारसी गारा साड़ियों पर खास तरह के चित्रों की बुनाई की जाती है। जिनको बनाने के पीछे बहुत ही गहरा मतलब भी होता है। इन साड़ियों पर खास मोटिफ्स होते हैं, जिसमें फूल, पत्तियां, चीना-चीनी, रूस्टर फैमिली, फीनिक्स, बर्ड्स, कांदा-बटाटा, क्रेन, करोलिया स्पाइडर हाथ से बुने जाते हैं।
आज भी फैशन स्टेटमेंट
पारसी शादियों, त्योहारों और विरासत के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपी जाने वाली ये साड़ियां आज भी शान और स्टेटस सिंबल मानी जाती हैं। आज पारसी गारा साड़ी सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं रही। फैशन डिजाइनर्स इसे मॉडर्न ब्लाउज, बेल्ट, जैकेट और मिनिमल ज्वेलरी के साथ स्टाइल कर रहे हैं। बॉलीवुड और फैशन इवेंट्स में भी सेलेब्रिटीज इसे रॉयल और एलीगेंट लुक के लिए चुन रही हैं। नताशा पूनावाला ने मेट गाला के लिए खास पारसी गारा एम्ब्रॉयडरी वाला गाउन बहुत ही फैशनेबल और यूनीक अंदाज में स्टाइल किया था।
कितनी होती है कीमत
भारत में पारसी गारा साड़ी की कीमत आमतौर पर ₹3 लाख से शुरू होकर ₹15–20 लाख तक जाती है। एंटीक या विंटेज गारा साड़ियां इससे भी ज्यादा महंगी हो सकती हैं। वहीं अगर आपको नई डिजाइन वाली मशीन या हल्की एम्ब्रॉयडरी वाली गारा साड़ी लेनी है तो वो आपको 20 से 80 हजार के बीच मिल जाएगी।
