World Cancer Day: किचन से कैसे शुरू होता है कैंसर, लाइफस्टाइल की कौन सी गलतियां बढ़ा रहीं खतरा, डॉक्टर से जानिए
Lifestyle Mistakes That Increase Risk Of Cancer: अक्सर जब भी कैंसर की बात होती है, तो हमारे दिमाग में एक ही सवाल आता है कि आखिर यह अचानक कैसे हो गया? लेकिन कैंसर एक दिन में नहीं होता, यह धीरे-धीरे, सालों में बनता है और इसके खतरे को बढ़ाने में योगदान देती हैं हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें, खानपान का तरीका, लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी गलतियां। आज जानिए आप रोज ऐसा क्या कर रहे हैं, जिससे कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है।
- Authored by: Vineet
- Updated Feb 3, 2026, 05:34 PM IST
Lifestyle Mistakes That Increase Risk Of Cancer: हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवर (World Cancer Day) आता है। इस दिन हम कैंसर अवेयरनेस को लेकर तरह-तरह के पोस्ट देखते हैं, कई आंकड़े पढ़ते हैं और फिर अगली सुबह अपनी वही पुरानी जिंदगी जीने लगते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं कि कैंसर की कहानी किसी एक दिन नहीं बनती। वह धीरे-धीरे, हमारी रोज की आदतों के साथ आगे बढ़ती है। कई बार बीमारी बाहर से नहीं आती, हम खुद उसे रोज थोड़ा-थोड़ा बढ़ाते रहते हैं।
सीनियर कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत मेहता की मानें तो इसके पीछे हमारी लाइफस्टाइल से जुड़ी गलतियां भी हो सकती हैं जैसे - गलत खानपान, बिगड़ा हुआ रुटीन और इस सोच से कि 'अभी तो सब ठीक है।' बता दें कि यह लेख आपको डराने के लिए नहीं है, बल्कि उन रोजमर्रा की गलतियों के बारे में बताने के लिए है, जो दिखती छोटी हैं लेकिन सालों में बड़ा जोखिम बन सकती हैं - खासकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के विकास में। चलिए जानते हैं आखिर रोजमर्रा की वो कौन सी आदतें हैं जो आपको कैंसर के खतरे में डाल रही हैं।
गलती 1: नींद पूरी न लेना
अमृता हॉस्पिटल फरीदाबाद के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत मेहता कहते हैं कि कहानी यहीं से शुरू होती है। देर रात तक मोबाइल चलाना, कम नींद लेना और सुबह फिर जल्दी उठ जाना आज यह सब नॉर्मल लगता है। लेकिन रिसर्च बताती है कि लगातार नींद की कमी शरीर की रिपेयर सिस्टम को कमजोर करती है। जब शरीर को रोज खुद को ठीक करने का समय ही नहीं मिलता, तो बीमारी के लिए रास्ता बनना आसान हो जाता है। यह एक दिन की गलती नहीं, सालों की आदत का नतीजा होता है।
गलती 2: घर का खाना है तो कुछ भी खा लो
अक्सर हम सोचते हैं कि घर का खाना है तो सुरक्षित ही होगा। यहीं हम में से ज्यादातर लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो -
- रोज जली हुई रोटी
- बहुत ज्यादा तेल
- रिफाइंड आटा
- चीनी का अधिक सेवन आदि
ये सब धीरे-धीरे शरीर पर असर डालते हैं। वैज्ञानिक तौर पर माना जाता है कि बार-बार जला हुआ या बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाना शरीर में सूजन और नुकसानदायक बदलाव ला सकता है। गलती खाने की नहीं, रोज उसी तरीके से खाने की है।
कैंसर की रोकथाम के लिए जागरूता जरूरी है (PC- AI)
गलती 3: खाने का कोई टाइम न होना
डॉ. मेहता बताते हैं कि यह ज्यादातर भारतीय घरों की कहानी है। हमारे यहां लोगों दिनभर में जब भूख लगे खाना शुरू कर देते हैं। रात 11 बजे खाना, टीवी देखते-देखते डिनर, खाने के बाद तुरंत सो जाना, यह आज के समय में हर घर की कहानी है।
लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि गलत समय पर खाना पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है। जब पाचन लगातार खराब रहता है, तो शरीर में मोटापा, हार्मोनल असंतुलन और सूजन बढ़ती है। यही स्थितियां लंबे समय में कैंसर के रिस्क से जुड़ी मानी जाती हैं।
गलती 4: तनाव को नजरअंदाज करना
आज के समय में हमने काम का प्रेशर, घर की जिम्मेदारियां, मोबाइल की लगातार नोटिफिकेशन आदि के तनाव को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक तनाव में रहने से इम्युनिटी कमजोर होती है। नींद और मानसिक शांति की कमी शरीर को अंदर से थका देती है। कैंसर दिवस पर भी इसको लकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है कि मानसिक सेहत भी उतनी ही जरूरी है, जितनी शारीरिक।
गलती 5: दिनभर बैठे-लेटे रहना
हम सभी अब रोज देखते हैं कि ज्यादातर लोगों की जिंदगी अब सिर्फ कुर्सी, सोफा और स्क्रीन के बीच सिमट गई है। लेकिन वे यह नहीं जानते हैं कि कम चलना और ज्यादा बैठना शरीर की सबसे खामोश गलती है। फिजिकल इनएक्टिविटी से मोटापा और सूजन बढ़ती है, जिसे वैज्ञानिक कैंसर के रिस्क फैक्टर से जोड़ते हैं। रोज थोड़ा चलना इलाज नहीं, लेकिन एक जरूरी सुरक्षा जरूर है।
किचन से भी होती है कैंसर की शुरुआत (PC- AI)
गलती 6: किचन की गलतियों को आम समझना
आपने अक्सर अपने घरों में यह जरूर देखा होगा। ज्यादातर घरों में खाना स्टोर या पैक करने के लिए प्लास्टिक डिब्बे में गर्म सब्जी और एल्युमिनियम फॉयल का प्रयोग किया जाता है। बहुत से लोग एक बार यूज किए हुए तेल को बार-बार कुकुिंग में यूज करते हैं। इसके अलावा किचन में टूटे-फूटे, खुरचे नॉन-स्टिक बर्तनों का प्रयोग भी काफी अधिक होता है। ये सभी गलतियां कैंसर के रिस्क को धीरे-धीरे बढ़ाने में योगदान देती हैं।
डॉ. मेहता की मानें तो गलती चीजों में नहीं, उनके गलत और लगातार इस्तेमाल में है। वैज्ञानिक रिसर्च मानती है कि गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर कुछ केमिकल्स खाने में जा सकते हैं, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विश्वस कैंसर दिवस का मकसद आपको जागरूक बनाना है और यह बताना है कि बीमारी अचानक नहीं आती। वह हमारी रोज की आदतों के साथ चुपचाप बनती है। ऐसे में आपको डरने की नहीं, रुककर सोचने की जरूरत है, क्योंकि कई बार बचाव इलाज से कहीं आसान होता है।
