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लोग क्यों बोलते हैं Touch Wood, कैसे शुरू हुआ टच वुड का चलन, क्या सच में बुरी नजर से बचाती है लकड़ी?

Why Do We Say Touch Wood: बड़ी संख्या में लोग बुरी नजर और उससे बचने के लिए टोटकों पर विश्वास करते हैं। ऐसा ही एक टोटका लकड़ी छूकर टच वुड कहना भी है। जी हां कई देशों में लोग लकड़ी छूकर टच वुड कहते हैं ताकि वह किसी भी अनहोनी या बुरी नजर से बच सकें।

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बुरी नजर से बचने को टच वुड क्यों कहते हैं लोग, क्या है Touch Wood का इतिहास

History and Origin of Touch Wood: दुनिया भर में अजब गजब मान्यताएं सदियों से चली आ रही है। ऐसी ही एक मान्यता है टच वुड कहने की। जब जीवन में कुछ अच्छा हो रहा हो तो अकसर हमें यह डर रहता है कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए। बस इसीलिए कुछ लोग लकड़ी छूकर कहते हैं-टच वुड। उनका विश्वास है कि ऐसा करने से जीवन से बुरी बलाएं दूर रहेंगी। लेकिन असल सवाल यह है कि टच वुड कहने का यह अंधविश्वास कैसे उपजा? क्या लकड़ी छूकर टचवुड बोलने से सचमुच बुरी नजर या बला टल जाती है? यहां हम ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे:

सबसे पहले समझे क्या है बुरी नजर

कोई भी देश, धर्म या सभ्यता हो, बुरी नजर का डर लगभग हर संस्कृति में है। बुरी नजर या एविल्स आई को लेकर समान मान्यता है कि जब कोई जलन, ईर्ष्या या बहुत ज्यादा तारीफ की नजर से देखता है तो उसकी नकारात्मक ऊर्जा सीधे सामने वाले को नुकसान पहुंचा सकती है। अचानक बीमारी, दुर्घटना या बनते काम बिगड़ जाने जैसी चीजें इसका लक्षण मानी जाती हैं।

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बुरी नजर से बचने के टोटके (Photo: iStock)

बुरी नजर से बचने के लिए लोग अलग-अलग तरह के टोटके इस्तेमाल करते हैं। कोई नींबू-मिर्च लटकाता है तो कोई ताबीज पहनता है। भले इन सारी बातों का कोई वैज्ञानिक मान्यता ना हो फिर भी बड़ी संख्या में लोग बुरी नजर और उससे बचने के लिए टोटकों पर विश्वास करते हैं। ऐसा ही एक टोटका लकड़ी छूकर टच वुड कहना भी है। जी हां कई देशों में लोग लकड़ी छूकर टच वुड कहते हैं ताकि वह किसी भी अनहोनी या बुरी नजर से बच सकें।

कब और कैसे शुरू हुआ टच वुड का चलन

टच वुड का हिन्दी मतलब होता है लकड़ी छूना। इसका प्रयोग कब से हो रहा है इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हां, ये फैक्ट है कि काफी पुराने समय से ही पेड़ों से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी रही है। अलग-अलग संस्कृति में अलग-अलग पेड़ों का अपना महत्व है। भारत में तो पीपल से लेकर आंवले और बरगद तक के पेड़ों की पूजा होती है। ऐसी आस्था है कि पेड़ों पर पवित्र आत्माओं या देवताओं का वास होता है जिन्हें छूकर या जिनपर दस्तक देकर आप अपनी अच्छी किस्मत के लिए आभार व्यक्त करते हैं।

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पेड़ों से जुड़ा लोगों का विश्वास (Photo: iStock)

ग्रीस के लोग ये मानते थे कि अगर आप बांज के पेड़ को छूएं तो सीधे देवाधिदेव ज़ूस से सम्पर्क कर सकते हैं, जो किसी भी मुसीबत से बचा लेंगे। ईसाइयों के लिए लकड़ी, सलीब का प्रतीक है और क्योंकि ईसा मसीह को सलीब पर लटकाया गया था इसलिए लोग उसे छूकर अच्छे भाग्य के लिए प्रार्थना करते थे।

यहूदियों के लिए सबसे सुरक्षित उनके मंदिर हैं। वह अपने मंदिरों को सिनगॉग कहते हैं। ऐसा प्रचलित है कि सन 1500 के आसपास यहूदी विरोधियों से अपनी जान बचाने के लिए जगह-जगह सिनगॉग में छिप रहे थे। सिनगॉग के अंदर पहले से मौजूद यहूदियों की सुरक्षा के लिए उन्होंने दस्तक देने का एक ख़ास तरीका निकाला था। इससे बहुतों की जान बची इसलिए लकड़ी पर दस्तक देना शुभ माना जाने लगा।

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यहूदियों के मदिर (Photo: iStock)

बुरी नजर से बचाने को लकड़ी ही क्यों?

सेल्टिक, ड्रुइड और नॉर्स संस्कृतियों में ओक (बलूत) का पेड़ सबसे शक्तिशाली माना जाता था। माना जाता था कि लकड़ी में इतनी पॉजिटिव एनर्जी होती है कि वह नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है। इसलिए जब कोई टच वुड करता है तो वह उस पवित्र ऊर्जा से खुद को चार्ज कर लेता है और बुरी नजर उस तक नहीं पहुंच पाती।

ज्योतिष शास्त्र में लकड़ी को शनि और राहु की नकारात्मकता से बचाने वाला माना जाता है। खासकर पीपल, नीम और शीशम की लकड़ी को सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है। यही वजह है कि गांवों में आज भी लोग नई चीज आने पर उस पर लाल धागा बांधकर लकड़ी से थपथपाते हैं।

आधुनिक विज्ञान इसे मनोवैज्ञानिक प्रभाव कहता है। जब आप लकड़ी छूते हैं तो दिमाग को लगता है कि अब हम सुरक्षित हैं। इससे तनाव कम होता है और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं। न्यूरोसाइंस के अनुसार, यह एक तरह का सुपरस्टिशियस बिहेवियर है जो चिंता को कम करता है। यानी भले ही बुरी नजर लगे न लगे, लेकिन उसका डर जरूर कम हो जाता है।

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मनोविज्ञान या अंधविश्वास है टच वुड (Photo: iStock)

तो सच क्या है?

बुरी नजर लगती भी है और नहीं भी। यह उस इंसान के विश्वास पर निर्भर करता है। जो मानता है, उसे सचमुच नुकसान महसूस होता है। जो नहीं मानता, उसके लिए यह सिर्फ अंधविश्वास है। लेकिन लकड़ी छूना नुकसान तो करता नहीं। इसी कारण आज जब विज्ञान इतना तरक्की कर चुका है तब भी बड़ी संख्या में लोगों का विश्वास इस बात पर बना हुआ है कि लकड़ी छूकर टच वुड कहने से उनका जीवन बुरी नजर से बचा रहेगा।

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