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कुदरत की अनोखी कारीगरी; बिना सीमेंट, सरिया के सालों साल डटे रहते हैं मेघालय के Living Root Bridge

Meghalaya Living Root Bridges: इसे लिविंग रूट ब्रिज कहा जाता है। ये ब्रि‍ज कहीं और नहीं, बल्कि भारत के मेघालय राज्‍य में स्‍थ‍ित हैं। ऐसा लगता है मानों मेघालय को प्रकृति ने खुद अपने हाथों से सजाया है।

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'लिविंग रूट ब्रिज' की खासियतें करती हैं हैरान
KEY HIGHLIGHTS
    1. सीमेंट नहीं, लोहा नहीं, फिर भी सालों साल पुराने ये जिंदा पुल!
    2. मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज क्यों कहलाते हैं सबसे अनोखे पुल?
    3. मेघालय के 'लिविंग रूट ब्रिज' जो कभी बूढ़े नहीं होते

भारत विविध संस्कृति, भाषा और परंपराओं का देश है। यहां पर घूमने के ल‍िए तमाम सुंदर जगहें मौजूद हैं। बात अगर नार्थ ईस्ट की करें तो उसका अलग ही मिजाज और खूबसूरती है। भारत ने मेघालय के मशहूर 'लिविंग रूट ब्रिज' (Meghalaya Living Root Bridges) को यूनेस्को के 2026-27 वर्ल्ड हेरिटेज मूल्यांकन साइकिल के लिए नॉमिनेट किया है। इसे अहम उपलब्धि माना जा रहा है, अपनी सुंदरता और अनूठेपन के लिए यह अलग ही पहचान रखते हैं, जानिए इन 'लिविंग रूट ब्रिज' के बारे में....

इस अद्भुत पुल को देख कर लोग दंग रह जाते हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज इंसान और प्रकृति की साझेदारी से बनी ऐसी संरचनाएं हैं, जो समय के साथ बूढ़ी नहीं बल्कि और मजबूत होती जाती हैं।

कैसे होते हैं 'लिविंग रूट ब्रिज'

मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज दुनिया की सबसे अनोखी और प्राकृतिक इंजीनियरिंग में से एक हैं। ये न लकड़ी से बने होते हैं, न पत्थर से ये पेड़ों की जड़ों से तैयार हुए 'जिंदा पुल' (Living Bridge) होते हैं। ये पुल रबर फिग (Ficus elastica) नाम के पेड़ की हवाई जड़ों से बनाए जाते हैं। जिन्हें बड़ी धैर्य और परिश्रम के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलाया जाता है। यह प्रक्रिया कई सालों तक चलती है, और पुल को पूरी तरह से विकसित होने में करीब 10-15 साल लगते हैं। यह पुल जिंदा होता है, बढ़ता है और समय के साथ और मजबूत हो जाता है।

'लिविंग रूट ब्रिज' एक अनोखा और अद्भुत निर्माण

मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज एक अनोखा और अद्भुत निर्माण है, जो पेड़ों की जड़ों से बनाया जाता है। ये पुल मेघालय के पूर्वी खासी पहाड़ियों और पश्चिमी जयंतिया पहाड़ियों में पाए जाते हैं। लिविंग रूट ब्रिज को स्थानीय भाषा में 'जिंगकिएंग जरी' (Jingkieng Jri) कहा जाता है, इसका अर्थ होता है-'जीवित जड़ों से बना पुल'। बता दें कि लिविंग रूट ब्रिज मेघालय की संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये टूरिस्टों के लिए एक प्रमुख आकर्षण हैं साथ ही स्थानीय लोगों के लिए आवागमन के अहम साधन तो यह हैं ही।

'लिविंग रूट ब्रिज' यूनेस्को के 2026-27 वर्ल्ड हेरिटेज मूल्यांकन साइकिल के लिए नॉमिनेट

'लिविंग रूट ब्रिज' की खासियतें करती हैं हैरान

ये पुल 50 मीटर तक लंबे और 1.5 मीटर चौड़े होते हैं। अनुमान के मुताबिक ये पुल सालों- साल तक खड़े रह सकते हैं। ये पुल प्राकृतिक रूप से विकसित होते हैं और समय के साथ मजबूत होते जाते हैं। ये पुल पर्यावरण के लिए फायदेमंद होते हैं और आसपास के वन्यजीवों और पौधों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इस पुल को बनाने के लिए कोई सीमेंट या लोहे-सरिया आदि की जरूरत नहीं होती है। यह ब्रिज पेड़ की जड़ों से बनाया जाता है। इसलिए इसे लिविंग रूट ब्रिज कहा जाता है।

सालों- साल से खड़े हुए हैं ये 'लिविंग रूट ब्रिज'

इन पुलों को खासी और जयंतिया जनजातियों ने कई सालों की मेहनत से तैयार किया है। ये पुल 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और आज भी मजबूती से खड़े हुए हैं। बता दें क‍ि ये पेड़ की जड़ों से बने होते हैं और वह भी पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से। इन्हीं खासियतों के चलते इस अद्भुत पुल को देख कर हर कोई हैरान रह जाता है।

मेघालय के 'लिविंग रूट ब्रिज' जो कभी बूढ़े नहीं होते

कहां पाए जाते हैं ये 'लिविंग रूट ब्रिज'?

मेघालय के खासी और जयंतिया पहाड़ खासतौर पर-चेरापूंजी (सोहरा), नोंगरियात, मावलिननोंग मे यह पुल ज्यादा पाए जाते हैं। बता दें कि ये इलाके भारी बारिश वाले हैं, जहां लकड़ी और लोहे के पुल जल्दी खराब हो जाते हैं। मेघालय का सबसे लंबा लिविंग रूट ब्रिज 175 फीट लंबा है। यहां अलग-अलग गांवों में करीब सौ या उससे ज्‍यादा लिविंग रूट ब्रिज हैं। ये पुल न केवल उन इलाकों की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि वहां के विकास और खुशहाली में भी मददगार होते हैं।

मेघालय में ही क्यों पाए जाते हैं ज्यादातर?

मेघालय में बहुत ज्यादा बारिश होती है साथ ही यहां गहरी घाटियों के साथ ही नमी वाली मिट्टी है जिसके चलते रबर फिग की जड़ें यहां तेजी से बढ़ती और मजबूत होती हैं। इन पुलों को खासी और जयंतिया जनजातियों ने सालों की कड़ी मेहनत से तैयार किया है। पीढ़ी दर पीढ़ी यह ज्ञान आगे बढ़ाया जाता है और बच्चे अपने बड़ों से सीखते हैं कि जड़ों को कैसे मोड़ा जाए साथ ही कैसे बांस या लकड़ी से रास्ता दिखाया जाए।

यह पेड़ों की जड़ों से तैयार हुए 'जिंदा पुल'

Living Root Bridges कितने मजबूत ?

रबर के पेड़ की जड़ें बहुत मजबूत होती हैं और ये पुल को मजबूती प्रदान करती हैं। ये पुल जड़ों के जाल से बनाए जाते हैं, जो पुल को और भी मजबूत बनाता है। पुल पेड़ की वृद्धि के साथ मजबूत होते जाते हैं, जिससे ये और भी अधिक मजबूत होते जाते हैं। एक लिविंग रूट ब्रिज के बारे में कहा जाता है कि यह करीब 40 से 50 लोगों का वजन उठा लेता है। वहीं यह तेज बहाव और बाढ़ के साथ भारी बारिश आसानी से झेल सकता है। चूंकि यह ये पुल प्राकृतिक रूप से विकसित होते हैं, जिससे ये अपने आसपास के वातावरण के साथ तालमेल आसानी से बैठा लेते हैं।

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