अब कार्बन डाइऑक्साइड से बनेगा हाइड्रोजन ईंधन, मैंगनीज ने दिखाई नई राह; जानें कैसे काम करेगी यह तकनीक
- Authored by: Nishant Tiwari
- Updated Feb 15, 2026, 02:33 PM IST
येल और मिसूरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मैंगनीज धातु का इस्कतेमाल करके कार्बन डाइऑक्साइड को सफलतापूर्वक 'फॉर्मेट' में बदलने की तकनीक विकसित की है। यह सस्ती और टिकाऊ प्रक्रिया हाइड्रोजन फ्यूल सेल के लिए वरदान साबित हो सकती है। इससे हाइड्रोजन को बतौर ईंधन स्टोर करने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है और हवा से एक ग्रीनहाउस गैस की भी खपत हो सकती है। आइए जानते हैं इस ताजा शोध के बारे में।
येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खोजी CO2 से हाइड्रोजन ईंधन बनाने की तकनीक
CO2 To Hydrogen Fuel: येल यूनिवर्सिटी और मिसूरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) की दिशा में एक क्रांतिकारी खोज की है। वैज्ञानिकों ने 'मैंगनीज' (Manganese) जैसी सस्ती और आसानी से मिलने वाली धातु का इस्तेमाल करके कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को 'फॉर्मेट' (Formate) में बदलने का एक बेहद कारगर तरीका ढूंढ निकाला है। पहले यह जान लेते हैं कि फॉर्मेट क्या होता है। आसान शब्दों में कहें, तो फॉर्मेट (Formate) एक 'लिक्विड बॉक्स' की तरह है जिसका इस्तेमाल हाइड्रोजन गैस को सुरक्षित तरीके से कैद करने के लिए किया जाता है। हाइड्रोजन एक गैस है जिसे संभालना बहुत मुश्किल है क्योंकि यह बहुत जगह घेरती है और इसमें आग लगने का खतरा रहता है। 'फॉर्मेट' इस मामले में एक सूटकेस की तरह काम करता है, जो इस गैस को अपने अंदर समेट लेता है और इसे तरल बना देता है। इस तरल को ले जाना और कहीं भी रखना बहुत आसान है। यह खोज भविष्य में हाइड्रोजन कारों और Fuel Cells के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
यह नई खोज प्रसिद्ध जर्नल 'Chem' में छपी है। इस शोध का नेतृत्व येल के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता जस्टिन वेडल और मिसूरी यूनिवर्सिटी के काइलर वर्च्यू ने किया, जिसमें येल के प्रोफेसर निलाय हजारी और मिसूरी के प्रोफेसर वेस्ले बर्न्सकोएटर का मुख्य मार्गदर्शन रहा। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल: भविष्य की बैटरी
हाइड्रोजन फ्यूल सेल ठीक एक बैटरी की तरह काम करते हैं, जो हाइड्रोजन की रासायनिक ऊर्जा को बिजली में बदलते हैं। यह तकनीक स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है, लेकिन अब तक इसके साथ सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोजन को सुरक्षित और सस्ते तरीके से स्टोर करने की थी। हाइड्रोजन को गैस के रूप में रखना मुश्किल और महंगा होता है, लेकिन 'फॉर्मेट' के रूप में इसे स्टोर करना काफी आसान है।
कार्बन डाइऑक्साइड से बनेगा ईंधन
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम हवा में मौजूद CO2 को फॉर्मेट में बदल दें, तो इसके दो बड़े फायदे होंगे। पहला, यह ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने वाली जहरीली गैस को कम करेगा। दूसरा, यह फॉर्मेट हाइड्रोजन के लिए एक 'कैरियर' का काम करेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
अभी तक फॉर्मेट बनाने के लिए जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) का इस्तेमाल होता है, लेकिन येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निलाय हजारी का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए अब हमें CO2 के सीधे इस्तेमाल पर ध्यान देना होगा।
मैंगनीज ने दिखाया कमाल
अब तक CO2 को फॉर्मेट में बदलने के लिए सोना, प्लेटिनम या इरिडियम जैसी बहुत महंगी और दुर्लभ धातुओं का इस्तेमाल होता था। सस्ती धातुएं (जैसे मैंगनीज) जल्दी खराब हो जाती थीं। लेकिन वैज्ञानिकों ने इस बार मैंगनीज के उत्प्रेरक (Catalyst) के ढांचे में बदलाव किया। इसे एक सरल उदाहरण से समझें, जैसे एक पुरानी कार के इंजन में कुछ खास पुर्जे बदलकर उसकी उम्र और ताकत बढ़ा दी जाए, वैसे ही वैज्ञानिकों ने उत्प्रेरक के साथ एक अतिरिक्त 'दाता परमाणु' (Donor Atom) जोड़ दिया। इस छोटे से बदलाव ने मैंगनीज की कार्यक्षमता को इतना बढ़ा दिया कि इसने महंगी धातुओं को भी पीछे छोड़ दिया।
क्या होगा इस खोज का असर?
शोधकर्ता जस्टिन वेडल इस खोज को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक न केवल CO2 को ईंधन में बदलने के काम आएगी, बल्कि रसायन विज्ञान की कई अन्य प्रक्रियाओं को भी सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बना देगी।
