IIT Kanpur: आईआईटी कानपुर की नई पहल, औद्योगिक कार्बन से बनाएंगे बायो एनर्जी, इंडियन ऑयल कॉर्पो से किया करार

Bio Energy: आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप ग्रीनजिन ने ऐसी तकनीक विकसित की जिससे औद्योगिक कार्बन से बायो एनर्जी बनाई जाएगी। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर निस्तारण किया जाएगा।

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कानपुर समाचार  |  तस्वीर साभार: Facebook
मुख्य बातें
  • औद्योगिक कार्बन को बायो एनर्जी में बदलेगा ग्रीनजिन
  • आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप ग्रीनजिन ने विकसित की तकनीक
  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ किया समझौता

IIT Kanpur: जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मुख्य कारण औद्योगिकी कार्बन को अब बायोएनर्जी और बायोमैटेरियल्स में बदला जाएगा। इसके लिए आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप ग्रीनजिन ने तकनीक विकसित कर ली है। जल्द यह स्टार्टअप इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की मदद से औद्योगिकी कार्बन का निस्तारण करेगा। जिससे देश के हर शहर को ग्रीन सिटी में तब्दील किया जा सकेगा। आईआईटी के स्टार्टअप ग्रीनजिन और इंडियन ऑयल के बीच एक समझौता हुआ है। 

ग्रीनजिन के फाउंडर नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि समझौते के तहत इंडियन ऑयल इस स्टार्टअप को मेंटरिंग, फंडिंग सहायता, बुनियादी ढांचे बनाने में मदद करेगा। जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड को बायो एनर्जी व बायो मैटेरियल में रीसाइकिल किया जाएगा। 

जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए कार्बन को रीसाइकल करना जरूरी

नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि इस समझौते से ग्रीनजिन की तकनीक को जमीनी स्तर पर उतारा जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए कार्बन को रीसाइकल करना जरूरी है। आपको बता दें कि नितिन श्रीवास्तव ने आईआईटी कानपुर से इनवायरमेंटल इंजीनियरिंग से एमटेक किया है। नितिन पहले कूड़ा निस्तारण को लेकर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने कूड़े से बायोगैस बनाने को लेकर काम किया है। ग्रीनजिन की इस उपलब्धि पर आईआईटी के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) के प्रभारी प्रोफेसर अमिताभ बंदोपाध्याय ने नितिन श्रीवास्तव को बधाई दी है।

कानपुर आईआईटी आर्थिक सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करेगा 

वहीं, कानपुर आईआईटी अब बैंक उपभोक्ताओं को हैकिंग और धोखाधड़ी से बचाएगा। संस्थान के एक इंक्यूबेटर नेपिड ने साइबर सिक्योरिटी आधारित एक ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जिसकी मदद से किसी भी उपभोक्ता के बैंक खाते से फ्रॉड करना आसान नहीं होगा। इस पूरे सिस्टम का नेपिड ने पेटेंट भी करा लिया है। इसकी मदद से बैंक के जरूरी फॉर्म व लेनदेन सिर्फ उनके उपभोक्ता ही कर सकेंगे। आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेटर नेपिड साइबरसिक के निदेशक सौम्या त्रिवेदी, वेंगटेसन कलिमुथु व विजयरंगम हैं। टीम ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से हैकिंग व फ्रॉड के शिकार हो रहे लोगों और बैंकों को बचाया जा सके। टीम के सदस्यों के मुताबिक यह वन टच ऑथेंटिकेटर है, जिसे साइबर सिक्योरिटी के साथ फ्रॉड फिल्टर सिस्टम और स्लीप मोड टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किया गया है।

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