राजस्थान में सियासी संकट के बीच आयकर विभाग की छापेमारी, CM गहलोत के करीबी के यहां रेड

Rajasthan IT Raid: आयकर विभाग ने आभूषण के कारोबार से जुड़े राजस्थान के एक समूह के खिलाफ कर चोरी मामले में दिल्ली और जयपुर समेत चार शहरों में छापेमारी की।

IT Raid
आयकर विभाग की छापेमारी  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौर और राज्य कांग्रेस कार्यालय के सदस्य राजीव अरोड़ा आयकर विभाग के रडार पर
  • आयकर विभाग राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र में कई जगहों पर सर्च कर रहा
  • भाजपा के 3 अग्रिम विभाग हैं, आयकर विभाग, ED और CBI: रणदीप सुरजेवाला

नई दिल्ली: राजस्थान में मचे सियासी घमासान के बीच आयकर विभाग ने राजस्थान स्थित आभूषण कंपनी के खिलाफ कर चोरी के मामले में दिल्ली और जयपुर समेत चार शहरों में छापे मारे। आयकर विभाग ने राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र में कई जगहों पर छापे मारे। जयपुर, कोटा, दिल्ली और मुंबई में सर्च चल रही है। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि ये सर्च कर चोरी की शिकायत पर की जा रही हैं। 

आयकर विभाग ने कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौर और राज्य कांग्रेस कार्यालय के सदस्य राजीव अरोड़ा के कार्यालय और आवास सहित पूरे राज्य में कई स्थानों पर छापेमारी की। कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है। 

देश के बाहर की लेनदेन भी आयकर विभाग की जांच के दायरे में है। 200 से अधिक आईटी अधिकारी इन छापेमारी में शामिल हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इन छापेमारी पर कहा, 'आख़िर भाजपा के वकील मैदान में आ ही गए। इनकम टैक्स विभाग ने जयपुर में रेड शुरू कर दी। ईडी कब आएगी?' उन्होंने कहा कि भाजपा के 3 अग्रिम विभाग हैं आयकर विभाग, ED, CBI, जब भी मोदी सरकार, भाजपा को प्रजातंत्र की हत्या करनी होती है तो भाजपा के ये विभाग सबसे पहले आगे आकर खड़े हो जाते हैं। कल देर रात और आज सुबह से ये विभाग फिर से राजस्थान की वीरभूमि पर कायरता दिखाने के लिए उतर आए हैं। 

राजस्थान में सत्ता संघर्ष

वहीं पार्टी में चल रहे संघर्ष पर सुरजेवाला ने कहा, 'कांग्रेस नेतृत्व ने पिछले 48 घंटे में सचिन पायलट से अनेकों बार वार्तालाव और चर्चा की है। व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा वाजिब हो सकती है लेकिन राजस्थान व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा से बड़ा है। कभी-कभी वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो जाता है जो प्रजा​तांत्रित प्रणाली में स्वा​भाविक है। परन्तु वैचारिक मतभेद पैदा होने से चुनी हुई अपनी ही पार्टी की सरकार को कमजोर करना या भाजपा को खरीद-फरोख्त का मौका देना अनुचित है। अगर कोई मतभेद है तो सचिन पायलट समेत सभी विधायकों के लिए कांग्रेस पार्टी के दरवाजे सदैव खुले थे, हैं और रहेंगे।'

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