जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में ली शपथ। तस्वीर-ANI
CJI Surya Kant : जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें प्रधान न्यायाधीश बन गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उन्हें 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कैबिनेट मंत्री एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 15 महीने का होगा। इस पद पर वह नौ फरवरी 2027 तक रहेंगे। बीते 30 अक्टूबर को न्यायमूर्ति सूर्यकांत को अगले प्रधान न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। जस्टिस सूर्यकांत ने निवर्तमान सीजेआई बीआर गवई का जगह लिया है।
शीर्ष अदालत में अपने अब तक के कार्यकाल में जस्टिस सूर्यकांत कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इन फैसलों में अनुच्छेद 370, SIR और पेगासस केस शामिल हैं। आने वाले दिनों में वह संवैधानिक कानून, साइबर लॉ, आपराधिक न्याय एवं चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट आने से पहले वह हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। मई 2019 में उनकी नियुक्ति शीर्ष अदालत में हुई। उन्होंने 1981 में हिसार के गवर्न्मेंट पोस्ट ग्रेजुएक कॉलेज से स्नातक और 1984 में रोहतक के महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली।
जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखा। यह हाल के वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसला माना गया, जिसने केंद्र-राज्य संबंधों और राष्ट्रीय एकीकरण पर स्थायी प्रभाव छोड़ा।
राजद्रोह कानून (124A) को सस्पेंड करने वाला आदेश:
जस्टिस सूर्यकांत ने उस बेंच में अहम भूमिका निभाई जिसने राजद्रोह कानून पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि सरकार इसके पुनरीक्षण तक 124A के तहत नई FIR दर्ज न करे। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़े कदम के रूप में देखा गया।
पेगासस स्पाइवेयर केस
पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राज्य को ऐसे जाने नहीं दिया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने साइबर विशेषज्ञों की स्वतंत्र कमेटी गठित की।
बिहार SIR: 65 लाख वोटरों की पारदर्शिता
हाल के अपने एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश में जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से 65 लाख हटाए गए वोटरों का पूरा विवरण साझा करने का निर्देश दिया। यह चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की दिशा में अहम निर्णय था।
ओआरओपी पर भी सुनाया है फैसला
न्यायमूर्ति सूर्यकांत उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक की जांच के लिए शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। उन्होंने रक्षा बलों के लिए ‘वन रैंक-वन पेंशन’ (ओआरओपी) योजना को भी बरकरार रखा था और इसे संवैधानिक रूप से वैध बताया तथा सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन में समानता का अनुरोध करने वाली महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत उन सात न्यायाधीशों की पीठ में भी थे, जिसने 1967 के एएमयू के फैसले को खारिज कर दिया था, जिससे उसके अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों से निपटने में राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित राष्ट्रपति के परामर्श पर हाल में सुनवाई करने वाली न्यायालय की पीठ में शामिल हैं। इस फैसले का बेसब्री से इंतजार है, जिसका असर सभी राज्यों पर पड़ सकता है।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारत के भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह, और दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय मंत्री और हस्तियां उपस्थित थे।
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