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West Bengal SIR: कोई राज्य से बाहर हो तो कोई भी रिश्तेदार जा सकता है ERO दफ्तर, मिली बड़ी राहत

पश्चिम बंगाल के वो मतदाता जिनकी जुड़ी जानकारी में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी मिली है या वो अपने पते पर नहीं मिले और वो स्टडी, इलाज या नौकरी की वजह से दूसरे देश में हैं उन्हें भी व्यक्तिगत पेशी से छूट मिली है।

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प. बंगाल SIR पर अहम खबर

Photo : PTI

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल के वो मतदाता जो छात्र हैं, या फिर निजी नौकरी या इलाज के चलते राज्य से बाहर हैं उन्हें SIR की सुनवाई के लिए फिजिकली पेश नहीं होना होगा। इसकी जगह उनका कोई भी रिश्तेदार ERO के दफ्तर में जा सकता है, 13 में से कोई एक दस्तावेज दे सकता है। रिश्तेदार के पास उस मतदाता से रिश्तेदारी साबित करने वाला पहचान पत्र होना चाहिए। पश्चिम बंगाल के वो मतदाता जिनकी जुड़ी जानकारी में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी मिली है या वो अपने पते पर नहीं मिले और वो स्टडी, इलाज या नौकरी की वजह से दूसरे देश में हैं उन्हें भी व्यक्तिगत पेशी से छूट मिली है।

साथ ही सरकारी कर्मचारी, भारतीय सेना और केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों से जुड़े हुए जवानों के साथ ही पीएसयू से जुड़े केंद्रीय कर्मचारी जो काम के सिलसिले में प. बंगाल से बाहर हैं, SIR के दौरान वो अपने पते पर मौजूद नहीं मिले या फिर उनके दस्तावेजों में कोई कमी मिली है उन्हें भी व्यक्तिगत पेशी से छूट मिली है।

SIR में क्या डेटा आया सामने

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के तहत मतदाता सूची के एन्यूमरेशन चरण के अहम नतीजे 16 दिसंबर 2025 को सामने आए थे। 4 नवंबर 2025 से 11 दिसंबर 2025 तक चले इस चरण में कुल 7 करोड़ 66 लाख से अधिक मतदाताओं में से 7 करोड़ 8 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए, जो करीब 92.40 प्रतिशत भागीदारी को दर्शाता है। चुनाव आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया में 24.16 लाख मतदाता मृत पाए गए, 32.65 लाख मतदाता स्थानांतरित या अनुपस्थित मिले, जबकि 1.38 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम दावे और आपत्ति की अवधि के दौरान दोबारा जोड़े जा सकते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, राज्य के सभी 24 जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचन अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से यह चरण सफलतापूर्वक पूरा हुआ। 80 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर घर घर जाकर फॉर्म वितरित और एकत्र किए गए। इस दौरान सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और बूथ लेवल एजेंटों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहेगा

आयोग ने भरोसा दिलाया कि कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहेगा। 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियों की अवधि तय की गई है। इस दौरान नाम जोड़ने, सुधार करने या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

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गौरव श्रीवास्तव
गौरव श्रीवास्तव author

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुना... और देखें

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