CAA के मुद्दे पर क्या चिदंबरम मुसलमानों को भड़का रहे हैं, जेएनयू में दिया विवादित बयान

देश
ललित राय
Updated Feb 14, 2020 | 00:16 IST

नागरिकता संशोधन के मुद्दे पर पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को सीएए को वैध ठहराती है और किसी भी मुसलमान को डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है तो जनांदोलन होना चाहिए।

CAA के मुद्दे पर क्या चिदंबरम मुसलमानों को भड़का रहे हैं, जेएनयू में दिया विवादित बयान
पूर्व गृहमंत्री रहे हैं पी चिदंबरम 

मुख्य बातें

  • नागरिकता संशोधन कानून पर जेएनयू में पी चिदंबरम का विवादित बयान
  • 'अगर सुप्रीम कोर्ट सीएए को वैध ठहराए तो भी देश में जनांदोलन होना चाहिए'
  • 'किसी एक भी मुसलमान को डिटेंशन सेंटर भेजे जाने का पूरजोर विरोध होना चाहिए'

नई दिल्ली। क्या देश के पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम मुसलमानों को भड़का रहे हैं। क्या कांग्रेस को लगता है कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी के मुद्दे पर छिटका हुआ मुस्लिम समाज कांग्रेस के साथ आ सकता है। क्या उन्हें भारत की न्यायपालिका में ऐताबार नहीं है। दरअसल गुरुवार को जेएनयू में छात्रों को संबोधित करते हुए वो कहते हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा संशोधित नागरिकता कानून (CAA) को वैध ठहराया जाता है और उसके बाद अगर किसी मुसलमान को हिरासत शिविर में भेजा जाता है तो देश भर में बड़ा जनांदोलन होना चाहिए। 

चिदंबरम ने कहा कि असम में एनआरसी का जब अंतिम आंकड़ा आया तो 19 लाख लोगों का नाम राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण रजिस्टर से बाहर हो गया। खास बात यह थी कि उसमें करीब 12 लाख हिंदू थे। अब बीजेपी के सामने दिक्कत यह थी जिन लोगों के वोट के बल पर वो सत्ता में आई उनके अधिकारों को मौजूदा कानून के तहत नहीं बचा सकती थी। इस तरह से 12 लाख हिंदुओं को नागरिकता देने के लिए सीएए लाया गया। लेकिन कांग्रेस की सोच स्पष्ट है कि इस कानून को निरस्त किया जाना चाहिए और राजनीतिक लड़ाई लड़ने की जरूरत है ताकि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को 2024 के बाद लाया जा सके । सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य की भागीदारी के बिना एनपीआर नहीं किया जा सकता है।


अब सवाल यही से खड़ा होता है कि आखिर कांग्रेस यह बात क्यों कह रही है कि 2024 के बाद सीएए को ठकेल देना चाहिए। क्या कांग्रेस को लगता है कि ऐसा न होने पर उसे 2014, 2019 की तरह 2024 में भी वनवास का सामना करना पड़ेगा। क्या कांग्रेस को यह लगता है कि अगर नागरिकता संशोधन कानून पर विरोध यूं ही जारी रहा तो उसकी राह आसान हो जाएगी। 

चिदंबरम ने  इतिहास की बातों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी कानून को अंजाम तक पहुंचाने में भीमराव आंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार पटेल जैसे लोगों ने तीन महीने या उससे ज्यादा का समय लिया। लेकिन सीएए में क्या हुआ मोदी सरकार  8 दिसंबर को नागरिकता संशोधन बिल को ड्राफ्ट करती है और इसके अगले दिन इसे लोकसभा से पास करा दिया। बिल को कानून बनाने में इस सरकार ने महज एक हफ्ते का समय लिया।

सीएए और एनपीआर पर चिदंबरम के रुख पर गृहमंत्री अमित शाह मे Times Now Summit 2020 में जवाब देते हुए कहा कि वो ये तो नहीं कहेंगे कि वो किस तरह की बात करते हैं। लेकिन एक बात साफ है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता जिसमें चिदंबरम भी शामिल हैं उन्हें समझना चाहिए कि वो लोग सीएए और एनपीआर के बारे में क्या सोचते थे। 

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