तमिलनाडु में NDA का मास्टरप्लान: PMK को 18 सीटें, दिल्ली में EPS–शाह की निर्णायक बैठक
- Authored by: हिमांशु तिवारी
- Updated Jan 8, 2026, 07:41 PM IST
तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले NDA के भीतर सीट बंटवारे पर सहमति बनती दिख रही है। PMK को 18 विधानसभा और एक राज्यसभा सीट मिलने की संभावना है। इसे अंतिम रूप देने के लिए EPS दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं। बैठक के बाद NDA की चुनावी रणनीति और संरचना तय मानी जा रही है।
तमिलनाडु के लिए अमित शाह का फॉर्मूला
तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीट बंटवारे की तस्वीर अब काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, NDA में शामिल पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अंबुमणि रामदास गुट को 18 विधानसभा सीटें और एक राज्यसभा सीट देने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। इसके साथ ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि PMK आगामी विधानसभा चुनाव NDA के साथ मिलकर लड़ेगी।
गठबंधन फॉर्मूले को दिया जा रहा अंतिम रूप
इस गठबंधन फॉर्मूले को अंतिम रूप देने के लिए AIADMK प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी (EPS) दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंचे थे। उनके दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अहम बैठक हुई। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को तमिलनाडु में NDA की संरचना, सीट शेयरिंग और साझा रणनीति पर अंतिम मुहर लगाने वाली बैठक के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि EPS–शाह बैठक में बीजेपी, AIADMK और PMK के बीच सीटों के बंटवारे, चुनावी समन्वय और साझा अभियान को लेकर अंतिम सहमति बन गई है। बीजेपी जहां तमिलनाडु में NDA को एक संगठित और मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं AIADMK गठबंधन की धुरी बने रहकर अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्रों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
PMK का वन्नियार वोट बैंक उत्तर और मध्य तमिलनाडु में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में सीमित लेकिन प्रभावशाली सीटें देकर NDA सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश में है। साथ ही, राज्यसभा सीट का आश्वासन PMK नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का संकेत माना जा रहा है।
2021 विधानसभा चुनाव के आंकड़े इस रणनीति की अहम पृष्ठभूमि बनते हैं। उस चुनाव में AIADMK और बीजेपी ने NDA के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था। NDA को कुल 75 सीटें मिली थीं, जिनमें AIADMK ने 66 और बीजेपी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि शेष सीटें सहयोगी दलों के खाते में गई थीं। वोट शेयर की बात करें तो DMK को लगभग 38 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि AIADMK को करीब 33 प्रतिशत, कांग्रेस को 4 से 4.3 प्रतिशत और बीजेपी को लगभग 2.6 प्रतिशत वोट मिले थे।
अमित शाह की तमिलनाडु यात्रा से सियासी हलचल तेज
हाल के महीनों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तमिलनाडु यात्राओं ने सियासी हलचल तेज कर दी है। शाह ने न केवल बड़ी सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया, बल्कि बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक भी की, जिससे यह संकेत मिला कि पार्टी राज्य में संगठन और चुनावी रणनीति दोनों मोर्चों पर आक्रामक तैयारी में जुटी है।
बीजेपी इस बार कोयंबटूर, मदुरै और चेन्नई पर विशेष फोकस कर रही है। पार्टी ने शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। कोयंबटूर की दो सीटों पर बीजेपी मजबूती से दावा ठोक रही है, जबकि चेन्नई महानगर क्षेत्र की 3 से 4 सीटों पर पार्टी की नजर है, जहां मध्यम वर्गीय और हिंदी भाषी मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं।
जानिए अमित शाह की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह की रणनीति केवल बीजेपी को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे NDA को चुनावी रूप से अभेद्य बनाने की है। इसी रणनीति के तहत AIADMK के दोनों धड़ों—टीटीवी दिनाकरन और ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS)—को EPS के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन में वापस लाने की कोशिशें भी तेज हैं। यदि यह सियासी सोशल इंजीनियरिंग सफल होती है, तो DMK के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लग सकती है। रामेश्वरम क्षेत्र में भी इसी समीकरण के तहत उम्मीदवार उतारने की तैयारी की जा रही है।
कुल मिलाकर, EPS–अमित शाह बैठक के बाद तमिलनाडु में NDA का चुनावी ब्लूप्रिंट लगभग तय माना जा रहा है। इसके बाद गठबंधन औपचारिक घोषणा और साझा नैरेटिव के साथ 2026 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करेगा।
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