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'क्या PM मोदी को अधिकार है...', शंकराचार्य की पदवी मामले पर कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल

Swami Avimukteshwaranand Dispute: प्रयागराज मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच विवाद काफी बढ़ गया है। इसी बीच इस मामले पर राजनेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। इस मामले पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रशासन की आलोचना की और इसे परंपराओं के खिलाफ बताया। बता दें कि प्रशासन ने उन्हें 24 घंटे में यह साबित करने को कहा कि वे शंकराचार्य हैं और सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन मामले के बावजूद यह उपाधि इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मेला प्रशासन को नोटिस भेजा और कहा कि प्रशासन माघ मेले की कमियों को छुपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है।

Swami Avimukteshwaranand Dispute

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज मेला प्रशासन के बीच विवाद पर कांग्रेस नेता ने दी प्रतिक्रिया।(फोटो सोर्स: ani)

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Swami Avimukteshwaranand Dispute: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज मेला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा। मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर 24 घंटे में यह साबित करने को कहा है कि वे शंकराचार्य हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद यह उपाधि इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी मेला प्रशासन को नोटिस भेज दिया है। उन्होंने कहा कि है कि मेला प्रशासन अपनी नाकामयाबी को छिपा रही है।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

इस मामले पर राजनातिक बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है। कांग्रेस मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि पिछले 48 घंटे से शंकराचार्य धरणा पर बैठे हैं, बिना भोजन और पानी के। लेकिन प्रशासन ने रात के समय उन्हें नोटिस भेजकर उनके शंकराचार्य होने के दर्जे पर सवाल उठाया।

पवन खेड़ा ने कहा,"क्या किसी सरकार, डीएम, पुलिस कमिश्नर, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को शंकराचार्य की स्थिति पर सवाल उठाने का अधिकार है? यह परंपराओं के खिलाफ है और अभूतपूर्व घटना है।” उन्होंने आगे कहा कि “पूरे विश्व के हिंदू इस घटना को देख रहे हैं। जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे पापी हैं और उन्हें कभी माफी नहीं मिलेगी।”

मेला प्रशासन ने क्या आपत्ति की है जाहिर?

प्रशासन ने नोटिस में कहा है कि माघ मेला 2025-26 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगे बोर्डों पर उन्हें “ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य” के रूप में दिखाया जा रहा है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि “आपके इस कार्य से माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना हो रही है।”अब प्रशासन जानना चाहता है कि वे किस आधार पर स्वयं को इस पद पर प्रचारित कर रहे हैं। 24 घंटे के भीतर जवाब नहीं देने पर प्रशासन इस मामले में कड़ी कार्रवाई कर सकता है।

बता दें कि मेला प्राधिकरण के नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एक मामले का उल्लेख है।मेला प्रशासन का कहना है कि अभी तक इस मामले में कोई आदेश पारित नहीं हुआ है, ऐसे में कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता। बावजूद इसके स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला क्षेत्र में लगे शिविर के बोर्ड पर अपने नाम के आगे 'शंकराचार्य' अंकित किया है प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि माघ मेला 2025-26 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगे बोर्डों पर उन्हें 'ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य' प्रदर्शित किया जा रहा है।

नोटिस के अनुसार, "आपके इस कृत्य से माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना दर्शित हो रही है।" अब प्रशासन यह जानना चाहता है कि किस आधार पर वे खुद को इस पद पर प्रचारित कर रहे हैं। 24 घंटे की समयसीमा बीतने के बाद इस मामले में प्रशासन कड़ी कार्रवाई कर सकता है।

प्रशासन के नोटिस पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

शंकराचार्य ने कहा कि वो भी मेला प्रशासन को नोटिस जारी करेंगे। हम भी लिखित तौर पर उन्हें नोटिस जारी करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कभी नहीं कहा कि अपने नाम के आगे शंकराचार्य मत लिखिए। अगर ऐसा कोई आदेश दिया है तो मुझे दिखाया जाए। माघ मेले की कमियों को छुपाने के लिए प्रशासन सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है। प्रशासन जवाब दें कि आप अपनी कमियों को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बता दें कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उनके गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद शंकराचार्य बनाया गया था।

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Piyush Kumar
Piyush Kumar author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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