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सुप्रीम कोर्ट से एम्बिएंस आइलैंड को राहत, हाईकोर्ट का फैसला रद्द; किरायेदारों को मिलेगी बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम की एम्बिएंस आइलैंड परियोजना से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने परियोजना को राहत दी और संबंधित सभी निर्देशों को प्रभावहीन माना। इससे निवासियों और निवेशकों को राहत मिली, वहीं एनजीटी में लंबित मामलों पर फिलहाल स्थगन का आदेश जारी किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

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गुरुग्राम स्थित एम्बिएंस आइलैंड परियोजना से जुड़े कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।(फोटो सोर्स: istock)

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गुरुग्राम स्थित एम्बिएंस आइलैंड परियोजना से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए परियोजना को राहत दी है। इस फैसले से वहां रहने वाले निवासियों और किरायेदारों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से अनिश्चितता की स्थिति में थे।

हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

यह विवाद एम्बिएंस आइलैंड परियोजना में भूमि के उपयोग और लाइसेंस से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था। कुछ खरीदारों ने आरोप लगाया था कि जिन भूखंडों को आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया था, उनका उपयोग व्यावसायिक निर्माण के लिए किया गया। इसी आधार पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2020 को परियोजना से जुड़े डी लाइसेंसिंग और री लाइसेंसिंग आदेशों को रद्द कर दिया था और जांच के आदेश भी दिए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है और संबंधित सभी निर्देशों को प्रभावहीन माना है। अदालत ने कहा कि इस मामले में अब आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

एनजीटी में लंबित मामलों पर भी असर

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एम्बिएंस आइलैंड से जुड़े जो मामले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में लंबित हैं, वे फिलहाल स्थगित रहेंगे। साथ ही अदालत ने यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में लंबित एक अन्य याचिका पर फैसला स्वतंत्र रूप से किया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से वह प्रभावित नहीं होगी। इस निर्देश से परियोजना से जुड़े विभिन्न कानूनी मोर्चों पर चल रही अनिश्चितता को विराम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

निवासियों और निवेशकों को मिली राहत

एम्बिएंस आइलैंड गुरुग्राम की प्रमुख लक्जरी आवासीय परियोजनाओं में शामिल है। यहां रहने वाले परिवारों और किरायेदारों के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है, क्योंकि पिछले कई वर्षों से परियोजना की वैधता को लेकर सवाल बने हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। परियोजना से जुड़े लोगों ने अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे लंबे विवाद के अंत की दिशा में एक अहम कदम बताया है।

दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने रखी दलीलेंइस मामले में एम्बिएंस ग्रुप और राज सिंह गहलोत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी, पिनाकी मिश्रा और संजीव रल्ली ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता लोकेश सिंघल ने दलीलें दीं। वहीं, होमबायर्स की ओर से अधिवक्ता कामिनी जायसवाल और वरिष्ठ अधिवक्ता उत्तरा बाब्बर ने अदालत में पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को परियोजना से जुड़े सभी पक्षों के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

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गौरव श्रीवास्तव
गौरव श्रीवास्तव author

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुना... और देखें

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