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PM Modi Malaysia Visit: 1000 साल पुराना इतिहास, रामायण से नाता... कितना अहम है भारत और मलेशिया का रिश्ता?

PM Modi Malaysia Visit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के दो दिवसीय दौरे पर हैं। दोनों देशों के लिए यह दौरा बेहद खास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मौजूदगी में भारत और मलेशिया के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया। वहीं, कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।

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Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल
पीएम मोदी के दो दिवसीय मलेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए।
Authored by: Piyush Kumar
Updated Feb 8, 2026, 16:01 IST
KEY HIGHLIGHTS
  • दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया।

  • रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ाने पर दोनों देशों का जोर।

  • दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई है।

PM Modi Malaysia Visit 2026: कुछ रिश्ते महज कूटनीति से नहीं बनते, वे इतिहास, संस्कृति और साझा स्मृतियों से गढ़े जाते हैं। भारत और मलेशिया का संबंध भी ऐसा ही है। समुद्र पार फैली सभ्यताओं, व्यापारिक यात्राओं और सांस्कृतिक संवाद से जन्मा एक रिश्ता, जो समय के साथ और परिपक्व होता जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के दो दिवसीय दौरे पर हैं। मलेशिया और भारत की संस्कृति और इतिहास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस देश की 63.5 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम धर्म का पालन करती है, वहां आज भी लोगों के मन में भगवान राम के लिए भक्ति कूट-कूटकर भरी है और आज भी रामायण परंपरा जीवित है।

शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कुआलालंपुर में 'हिकायत सेरी राम' पर आधारित पारंपरिक मलय कठपुतली प्रदर्शन 'तिता सेरी राम' देखा। बता दें कि मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम ने एयरपोर्ट पर खुद अपनी कार से पीएम मोदी को रिसीव किया।

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भारत मलेशिया के संबंध की जड़ें चोल साम्राज्य से जुड़ी हैं। 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच चोल शासकों (राजराज चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम) ने दक्षिण भारत और मलय प्रायद्वीप के बीच समुद्री व्यापार मार्गों को सशक्त बनाया, जिससे सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।

'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का अहम हिस्सा है मलेशिया

1947 में भारत की आजादी के बाद और 1957 में मलेशिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के साथ ही दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए। तब से लेकर अब तक भारत-मलेशिया रिश्ते लगातार मजबूत होते गए हैं। आज के समय भारत के 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का मलेशिया अहम हिस्सा है।

नए आयाम पर पहुंच रहे द्विपक्षीय संबंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मौजूदगी में भारत और मलेशिया के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया। यह कदम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज हमारा सहयोग कृषि और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर तक हर क्षेत्र में गहरा हो रहा है। हम कौशल विकास और क्षमता निर्माण में भी महत्वपूर्ण साझेदार हैं। हमारा रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है।

मलेशिया में करीब 29 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु का काम करते हैं। पीएम मोदी ने शनिवार को कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत को “विश्व का भरोसेमंद विकास साझेदार” बताया।

भारत के लिए मलेशिया क्यों है इतना अहम?

भारत और मलेशिया के रिश्ते केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी बुनियाद लोगों, व्यापार और रणनीतिक हितों पर टिकी है। मलेशिया आज भारत के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक ऐसा साझेदार बन चुका है, जिसकी अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है।

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प्रवासी भारतीय: रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी

मलेशिया भारतीय प्रवासी समुदाय के लिहाज़ से दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दुनिया भर में रह रहे करीब 3.54 करोड़ भारतीयों में से लगभग 29 लाख मलेशिया में निवास करते हैं। यह भारत के बाहर रहने वाला तीसरा सबसे बड़ा भारतीय समुदाय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा प्रवासी भारतीयों, उद्योग जगत और कारोबारी प्रतिनिधियों से संवाद का भी अवसर बनेगा। ये प्रवासी केवल सांस्कृतिक पहचान को जीवित नहीं रखते, बल्कि व्यापार, निवेश और भारत-मलेशिया संबंधों को मजबूती देने में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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ASEAN में भारत का भरोसेमंद साझेदार

पश्चिमी देशों में आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत का फोकस अब क्षेत्रीय सहयोग पर और तेज़ी से बढ़ा है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन ASEAN इस रणनीति का केंद्र बिंदु है। वित्त वर्ष 2016 में जहां भारत-ASEAN व्यापार लगभग 65 अरब डॉलर का था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 123 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। इस समूह में मलेशिया भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

मलक्का जलडमरूमध्य: समुद्री सुरक्षा का रणनीतिक केंद्र

मलेशिया की भौगोलिक स्थिति उसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह देश मलक्का जलडमरूमध्य के किनारे स्थित है, जो हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ने वाला सबसे अहम समुद्री मार्ग है। भारत के कुल समुद्री व्यापार का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। दक्षिण चीन सागर में चीन, ताइवान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह जलमार्ग संवेदनशील बना हुआ है, जिससे भारत-मलेशिया समुद्री सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है।

रणनीतिक साझेदारी की ओर एक और कदम

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करना चाहता है। मलेशिया के साथ गहराता सहयोग भारत को आर्थिक लाभ के साथ-साथ सामरिक और कूटनीतिक स्तर पर भी मजबूती देता है। यह यात्रा दोनों देशों की साझेदारी को एक नई दिशा देने और आने वाले वर्षों के लिए साझा रोडमैप तय करने के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है।

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कितना खास रहा पीएम मोदी का दौरा?

  • पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, डिजिटल इकॉनमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, हेल्थकेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।ॉ
  • द्विपक्षीय व्यापार को आसान बनाने के लिए रुपये और रिंगिट में लेनदेन को प्रोत्साहित करने तथा आवश्यक कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी सहमति बनी। मलेशिया ने भारत को टिकाऊ पाम ऑयल की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिलाया है।
  • डिजिटल सहयोग को विस्तार देने के लिए मलेशिया–इंडिया डिजिटल काउंसिल की शुरुआत का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही यूपीआई और पेननेट को जोड़ने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था को और सरल बनाया जा सके।
  • रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर प्रोजेक्ट्स में साझेदारी के साथ-साथ सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को मजबूत करने पर भी दोनों पक्षों की सहमति बनी है।
  • रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ाने और संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
  • आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए सीमा-पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और आतंकी फंडिंग पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी समन्वय बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष पद्धति के प्रचार, सस्ती दवाओं और नर्सिंग सेवाओं में सहयोग पर सहमति बनी, जबकि पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के लिए साझा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत हुई। इसके अलावा बिग कैट संरक्षण पहल में साझेदारी को लेकर भी दोनों देशों ने प्रतिबद्धता जताई।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के समर्थन को दोहराते हुए सेमीकंडक्टर, हेल्थ, राष्ट्रीय सुरक्षा, स्किल ट्रेनिंग और ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन समेत कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिन्हें भारत-मलेशिया संबंधों को और गहराई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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