एसआईआर के विरोध में ममता बनर्जी ने की रैली। फोटो- एएनआई
Mamta on SIR: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी इसका व्यापक विरोध कर रही है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर के खिलाफ बनगांव में रैली की। इस दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। ममता बनर्जी ने रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि बिहार चुनाव का नतीजा एसआईआर का परिणाम है। वहां विपक्ष भाजपा की चाल को भांप नहीं सका। उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया की समयावधि पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि एसआईआर दो-तीन वर्षों में किया जाए,तो हम इस प्रक्रिया को हरसंभव संसाधन के साथ समर्थन देंगे। लेकिन अभी जब अगले साल ही राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, तब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण किया जाना गलत है। आगे उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर भाजपा बंगाल में मुझे चोट पहुंचाने की कोशिश करेगी तो मैं पूरे भारत में उसकी नींव हिला दूंगी।
गौरतलब है कि एसआईआर के खिलाफ ममता बनर्जी की इस रैली से पहले टीएमसी के नेताओं ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के लिए अपील की थी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने टीएमसी को 28 नवंबर को बैठक के लिए पत्र भेजकर आमंत्रित किया है।
ममता बनर्जी ने जनसभा में एसआईआर के जरिए मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की भाजपा की साजिश का विरोध करते हुए कहा कि मैंने भाजपा से बार-बार कहा है कि आप अपनी सभी एजेंसियों के साथ आ जाओ लेकिन मुझे हरा नहीं पाओगे। ममता बनर्जी ने बनगांव में एसआईआर विरोधी रैली में कहा कि भाजपा राजनीतिक रूप से मेरा मुकाबला नहीं कर सकती और न ही मुझे हरा सकती है। एसआईआर के बाद जब मतदाता सूची का मसौदा जारी हो जाएगा तब लोगों को चुनाव आयोग और भाजपा द्वारा पैदा की गई आपदा का एहसास होगा। इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि‘इलेक्शन कमीशन’अब एक निष्पक्ष संस्था नहीं रह गई है,यह ‘बीजेपी कमीशन’बन गई है।
ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में बहुत समय लगता है,ऐसा आखिरी बार 2002 में हुआ था। हमने कभी नहीं कहा कि SIR नहीं होना चाहिए,हम बस इतना कह रहे हैं कि आप किसी का भी नाम सूची से नहीं काट सकते जो सालों से यहां रह रहा है। सरकार जनता तय करती है,चुनाव आयोग नहीं। यदि एसआईआर दो-तीन वर्षों में किया जाए,तो हम इस प्रक्रिया को हरसंभव संसाधन के साथ समर्थन देंगे। सीएम ने यह भी कहा कि इस पुनरीक्षण के लिए बीएलओ को ठीक से प्रशिक्षित तक नहीं किया गया है, इसलिए तीन लोग पहले ही आत्महत्या कर चुके हैं।
आगे बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि मैं केंद्र सरकार से सवाल करना चाहती हूं कि अगर एसआईआर बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए है तो आप मध्य प्रदेश और राजस्थान में नाटक क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्या भाजपा शासित राज्यों में एसआईआर का आयोजन यह दर्शाता है कि केंद्र स्वीकार करता है कि वहां 'घुसपैठिये' मौजूद हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि ट्रेन,प्लेन और बॉर्डर का ध्यान सेंट्रल एजेंसियां रखती हैं। पासपोर्ट,कस्टम और एक्साइज,सभी कुछ सेंट्रल गवर्नमेंट के अधीन है। ऐसे में हमने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशियों की घुसपैठ कैसे कराई?
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