महाराष्ट्र: अमित शाह, उद्धव ठाकरे "50:50" फॉर्मूले को देंगे अंतिम रूप- बीजेपी

Maharashtra government formation: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच बयानबाजी के बीच उद्धव ठाकरे ने सीएम देवेंद्र फड़णवीस के बयान के बाद बीजेपी के साथ बैठक रद्द कर दी है।

Uddhav Thackeray
Amit Shah, Uddhav Thackeray, Devendra Fadnavis  |  तस्वीर साभार: IANS

मुख्य बातें

  • बीजेपी-शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर मंगलवार शाम 4 बजे बैठक होनी थी
  • देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि शिवसेना से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद का वादा नहीं किया गया था
  • उद्धव ठाकरे का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले 50:50 के फॉर्मूले पर सहमति बनी थी

मुंबई: महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर पेंच फंसता ही जा रहा है। आज (मंगलवार) शाम बीजेपी-शिवसेना की बैठक (BJP-Shiv Sena meeting) होने वाली थी लेकिन स्थगित हो गई। शिवसेना के सीनियर नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि बीजेपी-शिवसेना के बीच आज शाम 4 बजे बातचीत होनी थी। लेकिन अगर खुद सीएम कह रहे हैं कि '50 -50 फॉर्मूले' (50-50 formula) पर चर्चा नहीं हुई तो हम क्या बात करेंगे? हमें किस आधार पर उनसे बात करनी चाहिए? इसलिए उद्धव जी ने आज की बैठक रद्द कर दी है। उधर बीजेपी के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में अगली सरकार के गठन के लिए सत्ता साझेदारी के "50:50" फॉर्मूले को अंतिम रूप देंगे। 

गौर हो कि पिछले सप्ताह उद्धव ठाकरे  (Uddhav Thackeray) ने बीजेपी (BJP) को उनके और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस (Devendra Fadnavis) के बीच, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 50:50 के फॉर्मूले पर बनी सहमति की याद दिलाई थी। उसके बाद सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने मंगलवार को कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले जब गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया था तब शिवसेना से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद का वादा नहीं किया गया था। और उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों के लिए बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनेगी और इसे लेकर किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारे पास दूसरे विकल्प भी हैं लेकिन हम उन विकल्पों को स्वीकार करने का पाप नहीं करना चाहते। शिवसेना ने सत्य की राजनीति की है और पार्टी सत्ता के लिए भूखी नहीं है। राउत ने सोमवार को कहा था कि उनकी पार्टी को महाराष्ट्र में अगली सरकार बनाने के वास्ते विकल्प खोजने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि राजनीति में कोई संत नहीं हैं। उन्होंने दावा किया था दोनों पार्टियां सत्ता में समान भागीदारी के फॉर्मूले पर सहमत थीं और मुंबई में तो इस बारे में घोषणा भी कर दी गई थी।

शिवसेना के एक अन्य नेता ने मंगलवार को कहा था कि मेलघाट, अचलपुर, रामटेक और नेवासा सीटों के चार निर्दलीय विधायकों ने ठाकरे से मुलाकात कर उनकी पार्टी को अपना समर्थन देने का आग्रह किया था। उन्होंने दावा किया था कि शिवसेना के पास अब 60 विधायकों का समर्थन है। 

महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। शरद पवार की एनसीपी ने 54 सीट जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 44 सीटों पर कब्जा किया। प्रदेश में अगली सरकार में सत्ता में भागीदारी को लेकर दोनों (बीजेपी-शिवसेना) के बीच तकरार चल रही है।

24 अक्टूबर को चुनाव रिजल्ट के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के तबकों की ओर से ऐसे संकेत मिलते रहे हैं कि राज्य में बीजेपी से अलग सरकार गठन का शिवसेना का कदम हकीकत में बदल सकता है। हालांकि, कांग्रेस-एनसीपी की ओर से इस बारे में औपचारिक रूप से बयान नहीं आया है।

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