Maharashtra-Haryana polls :  मोदी के अनुच्छेद 370 'तीर' के आगे बेबस हुआ विपक्ष  

Narendra Modi attacks Congress on article 370 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस सहित विपक्ष पर जमकर निशाना साध रहे हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को वोट पड़ेंगे।

Maharashtra-Haryana polls : Opposition is helpless before PM Narendra Modi's article 370 jibe
महाराष्ट्र-हरियाणा में 21 अक्टूबर को पड़ेंगे वोट। (तस्वीर-भाजपा ट्विटर) 

मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनावों के लिए 21 अक्टूबर को डाले जाएंगे वोट
  • भाजपा अनुच्छेद 370 और राफेल को बना रही चुनावी मुद्दा तो कांग्रेस बेरोजगारी-किसानों को
  • दोनों राज्यों में वापसी करने की भाजपा को है उम्मीद, सत्ता विरोधी लहर के सहारे है विपक्ष

महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। इन दोनों राज्यों में मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे सियासी पार्टियां के बीच जुबानी जंग तेज और हमले तीखे होते जा रहे हैं। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कमान संभाल चुके हैं। सोमवार को बल्लभगढ़ की अपनी चुनावी रैली में उन्होंने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा और अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। इससे पहले उन्होंने महाराष्ट्र में मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए विपक्ष को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले की आलोचना कर रहा है लेकिन उसमें साहस है तो वह अपने घोषणापत्र में इस बात का जिक्र करे कि सत्ता में आने पर वह इस अनुच्छेद को हटा देगा।

महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनावी मुद्दे अब तक के चुनाव प्रचार से स्पष्ट हो चुके हैं। भाजपा अनुच्छेद 370, राफेल और तीन तलाक विधेयक के आधार पर मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में जुटी है तो वही कांग्रेस बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था और किसानों की दशा पर सरकार को घेर रही है। दोनों ही बड़ी पार्टियों ने अपने चुनावी मुद्दों को जनता के सामने रख दिया है। हरियाणा और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में लोग फौज से जुड़े हैं। जम्मू-कश्मीर और अनुच्छेद 370 उनके लिए भावनात्मक मुद्दा भी है। भाजपा इस बात को भलीभांति जानती है इसलिए वह अनुच्छेद 370 पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके अलावा पीएम और भाजपा तीन तलाक विधेयक, राफेल और विदेशों में भारत की छवि को भी चुनावी मुद्दे के रूप में पेश कर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में हैं। अनुच्छेद 370 विपक्ष के लिए ऐसा मसला है कि वह चाहकर भी इसका विरोध नहीं कर सकते। इसकी खिलाफत करने पर उन्हें चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

इन दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। भाजपा की कोशिश दोबारा सत्ता में वापसी की है। इन दोनों राज्यों में विपक्ष भाजपा को टक्कर देने की कोशिश कर रहा है लेकिन वह कोई ऐसा मुद्दा नहीं उभार सका है जिससे कि भाजपा को सीधे तौर पर चुनौती दी जा सके। महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा की हालत ठीक नहीं है। चुनावों से पहले दोनों ही पार्टियों के बड़े-बड़े नेता भाजपा और शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। हरियाणा में विपक्ष का और भी बुरा हाल है। कांग्रेस आंतरिक गुटबाजी का शिकार है तो इनेलो पारिवारिक कलह की छाया से उबर नहीं पाया है। विपक्ष को लगता है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में उसे सत्ता विरोधी लहर का लाभ मिलेगा।

2019 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा है। विधानसभा के मुकाबले उसके वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई है। हरियाणा में उसने 58 प्रतिशत वोटों के साथ लोकसभा की सभी 10 सीटों पर कब्जा जमाया। भाजपा इस वोट प्रतिशत के साथ काफी उत्साहित है उसे लगता है कि यह वोट प्रतिशत यदि वह विधानसभा चुनाव में बरकरार रख सकी तो उसे मिशन-75 पूरा करने में दिक्कत नहीं होगी। हरियाणा की 90 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने पिछले चुनाव में 47 सीटें जीती थीं। 

महाराष्ट्र में पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग लड़ा था लेकिन सरकार बनाने के लिए दोनों एक साथ आ गए। इस बार दोनों एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा-शिवसेना के एक साथ आने से और कमजोर विपक्ष के चलते यह गठबंधन इस बार भी सरकार बनाने में सफल हो जाएगा। महाराष्ट्र में फड़णवीस सरकार के खिलाफ लोगों में ज्यादा आक्रोश देखने को नहीं मिल रहा है। फड़णवीस सरकार ने मराठा आरक्षण के जरिए अच्छे-खासे वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत की है।

महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी और अंतर्कलह से परेशान है। हरियाणा में अशोक तंवर और मुंबई में संजय निरूपम और अन्य पदाधिकारियों ने खुले तौर पर पार्टी के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाए हैं। चुनाव से ठीक पहले इन दोनों राज्यों में कांग्रेस नेताओं के बागी बोल ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर किया है जिसका असर चुनाव परिणामों पर देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि इन दोनों ही राज्यों में विपक्ष इस हालत में नहीं दिख रहा है कि वह भाजपा को कड़ी टक्कर या चुनौती दे सके। फिलहाल चुनावी बाजी किसके हाथ लगेगी इस बारे में जनता अपना जनादेश 21 अक्टूबर को देगी।

(डिस्क्लेमर: इस प्रस्तुत लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

 
अगली खबर
Maharashtra-Haryana polls :  मोदी के अनुच्छेद 370 'तीर' के आगे बेबस हुआ विपक्ष   Description: Narendra Modi attacks Congress on article 370 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस सहित विपक्ष पर जमकर निशाना साध रहे हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को वोट पड़ेंगे।
loadingLoading...
loadingLoading...
loadingLoading...