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Madhav Gadgil Passes Away: नहीं रहे पर्यावरणविद् माधव गाडगिल, पश्चिमी घाट संरक्षण में निभाई थी अहम भूमिका

Madhav Gadgil Passes Away: वरिष्ठ पर्यावरणविद् और गाडगिल आयोग के अध्यक्ष माधव गाडगिल का 83 वर्ष की उम्र में पुणे में निधन हो गया। पश्चिमी घाट संरक्षण को लेकर उनकी रिपोर्ट ने पर्यावरण नीति में अहम भूमिका निभाई, हालांकि इसकी सख्ती को लेकर विवाद भी हुए। गाडगिल ने IISc में अध्यापन किया और हरित आंदोलन को दिशा दी, जिसके लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

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वरिष्ठ पर्यावरणविद् माधव गाडगिल का 82 वर्ष की आयु में हुआ निधन।(फोटो सोर्स: Jayram Ramesh X handle)

Photo : Twitter

Madhav Gadgil Passes Away: देश के वरिष्ठ पर्यावरणविद् और पश्चिमी घाट के संरक्षण को लेकर अपनी दूरदर्शी सोच के लिए पहचाने जाने वाले माधव गाडगिल का बुधवार रात पुणे में निधन हो गया। 83 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। वो कुछ समय से बीमार चल रहे थे। गाडगिल पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) के अध्यक्ष थे, जिसे आमतौर पर गाडगिल आयोग के नाम से जाना जाता है। इस पैनल ने पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए कई सिफारिशें की थीं। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं।

हरित आंदोलन को आकार देने में निभाई भूमिका

माधव गाडगिल एक प्रतिष्ठित पर्यावरण वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने भारत के हरित आंदोलन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 20वीं सदी के अंत और 21वीं सदी की शुरुआत में पर्यावरण के मुद्दों पर उनकी वकालत ने देश में पर्यावरण चेतना को बढ़ाने में मदद की।

IISc में प्रोफेसर थे गाडगिल

माधव गाडगिल का जन्म 1942 में हुआ था। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर हार्वर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। गाडगिल ने कई वर्षों तक भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में पढ़ाया। उन्होंने कई सरकारी समितियों में भी काम किया, जिनमें पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) सबसे उल्लेखनीय है।

गाडगिल आयोग

2010 में पर्यावरण और वन मंत्रालय ने गाडगिल की अध्यक्षता में पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल का गठन किया। इस पैनल को पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और उनके संरक्षण के लिए सिफारिशें करने का काम सौंपा गया था। गाडगिल आयोग ने अपनी रिपोर्ट 2011 में सौंपी, जिसमें पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गईं थीं। इनमें खनन और औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाने, बांधों के निर्माण को सीमित करने और स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन में शामिल करने जैसी बातें शामिल थीं।

रिपोर्ट की क्यों हुई थी आलोचना?

गाडगिल आयोग की रिपोर्ट को कुछ हलकों में आलोचना का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों का मानना था कि सिफारिशें बहुत कठोर थीं और इनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, गाडगिल ने अपनी सिफारिशों का बचाव करते हुए कहा कि पश्चिमी घाट को बचाने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी है।

जयराम रमेश ने किया याद

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने वरिष्ठ पर्यावरणविद् माधव गाडगिल के निधन पर उन्हें याद किया। सोशल मीडिया हैंडल पर उन्होंने एक विस्तृत पोस्ट किया। उन्होंने लिखा," एक असाधारण वैज्ञानिक, संस्थान-निर्माता और राष्ट्र-निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि गाडगिल आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के बीच सेतु थे, जिनकी भूमिका साइलेंट वैली आंदोलन, बस्तर के जंगलों की रक्षा और पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट में ऐतिहासिक रही। जयराम रमेश के मुताबिक, माधव गाडगिल एक सच्चे विद्वान थे—विनम्र, संवेदनशील और गहरे ज्ञान से भरपूर—जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।"

माधव गाडगिल को उनके काम के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया था, जिनमें 2015 में मिला 'टाइलर पुरस्कार' भी शामिल है।

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Piyush Kumar
Piyush Kumar author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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