Jharkhand: अपनी सीट भी नहीं बचा पाए सीएम रघुबर दास, सरयू राय ने इतने बड़े अंतर से हराया

CM Raghubar defeat by Saryu Rai: झारखंड के चुनावी नतीजों में वहां के सीएम रघुवर दास अपनी सीट जमशेदपुर ईस्ट से सरयू राय के हाथों हार गए हैं। 

Jharkhand: अपनी सीट भी नहीं बचा पाए सीएम रघुबर दास, सरयू राय ने इतने बड़े अंतर से हराया
जमशेदपुर ईस्ट सीट से रघुवर सरयू राय के हाथों पराजित हुए हैं 
मुख्य बातें
  • जमशेदपुर ईस्ट सीट से रघुवर सरयू राय के हाथों पराजित हुए है,सरयू राय ने उन्हें करीब 15833 मतों से हराया है
  • रघुवर दास ने अपनी हार स्वीकार कर ली और राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया
  • बीजेपी को राज्य में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री को लड़ाने का खामियाजा भुगतना पड़ा है

रांची: झारखंड की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है और बीजेपी ने यहां की सत्ता गंवा दी है, राज्य के नए सीएम अब हेमंत सोरेन होंगे वहीं राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। जमशेदपुर ईस्ट सीट से रघुवर सरयू राय के हाथों पराजित हुए हैं, सरयू राय ने उन्हें करीब 15833 मतों से हराया है। 

राज्य के चुनाव परिणाम को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी की सत्ता में वापसी मुश्किल लग रही थी वैसा ही हुआ। राज्य में विपक्ष ने दमदारी के साथ चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 

 

 

 

वहीं बीजेपी को राज्य में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री को लड़ाने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। वहीं रघुवर दास ने सोमवार को अपनी हार स्वीकार कर ली और रात्रि साढ़े सात बजे राजभवन जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। साथ ही उन्होंने भाजपा की करारी हार के लिए सरकार में सहयोगी आजसू से गठबंधन नहीं हो पाने को एक बड़ा कारण बताया।

मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता का धन्यवाद दिया और कहा कि वह जनता के आदेश को सहर्ष स्वीकार करते हैं लेकिन इस हार को उन्होंने पार्टी की नहीं बल्कि अपनी व्यक्तिगत हार बताया। उन्होंने कहा, 'एक तरफ विपक्षी झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ा जबकि दूसरी तरफ भाजपा अपने सरकार में सहयोगी आजसू से गठबंधन नहीं कर सकी। इसका हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा है।'

 

 

उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनाव परिणामों की हर पहलू से समीक्षा करेगी और सभी कारणों की पहचान अवश्य की जायेगी। बीजेपी और आजसू के बीच नये झारखंड के निर्माण के बाद से ही लगातार सभी चुनावों में गठबंधन रहा है लेकिन इस बार चुनाव में वे एकजुट नहीं हो सके और एक-दूसरे के नेताओं को टिकट दिये । दोनों दल 52 सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े। 

 

 

कम से कम 12 से 15 सीटें ऐसी थीं जिन पर दोनों पार्टियों के मत जोड़ देने से वे सीटें बीजेपी और आजसू के पक्ष में जातीं लेकिन एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने से ये सीटें दोनों के खिलाफ और विपक्ष के पास चली गयीं।

सरयू राय ने कहा था कि उनका टिकट कटवा कर उन्होंने जिस तरह उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचायी गयी उसी के चलते उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ने की ठानी थी।

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