सिर्फ दो साल में बीजेपी का विस्तार 71 फीसद से घटकर 35 फीसद हुआ

Jharkhand election results 2019: 2017 में देश के करीब 71 फीसद हिस्सों पर बीजेपी का शासन था। लेकिन दिसंबर 2019 आते आते बीजेपी का विस्तार अब 35 फीसद हो गया है।

सिर्फ दो साल में बीजेपी का विस्तार 71 फीसद से घटकर 31 फीसद हुआ
2017 से 2019 तक बीजेपी के हाथ से कई राज्य निकले  |  तस्वीर साभार: AP
मुख्य बातें
  • सिर्फ दो साल में बीजेपी का आधार सिकुड़ा
  • 2017 में 71 फीसद आबादी पर बीजेपी राज कर रही थी।
  • मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़, राजस्थान के बाद अब झारखंड बीजेपी के हाथ से निकला

नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ है कि बीजेपी का कमल खिल कर भी पूरी तरह से नहीं खिला। 2014 की तुलना में वोट शेयर में इजाफा जरूर हुआ है। लेकिन सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े 42 से पीछे रह गई। लेकिन उससे भी बड़ी बात ये है कि दिसंबर 2017 में देश के 71 फीसद हिस्सों पर बीजेपी का राज था। लेकिन दो साल बाद दिसंबर 2019 के नतीजों के बाद बीजेपी का राज अब सिर्फ 35 फीसद राज्यों में है। 

सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ की बीजेपी का राज्यों में विस्तार घट रहा है। 2018 से लेकर 2019 तक बीजेपी उत्तर भारत खासतौर से हिंदी बेल्ट के तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ साथ झारखंड से पत्ता साफ हो चुका है। इसके साथ ही महाराष्ट्र में बीजेपी बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद भी सरकार बनाने से चूक गई।  

71 फीसद विस्तार से 35 फीसद पर सिमटी बीजेपी
2017 में बीजेपी देश की करीब 67 फीसद आबादी पर शासन कर रही थी। इसका अर्थ ये है कि बीजेपी का उन सभी राज्यों पर कब्जा था जिसमें इतनी आबादी रहती है। 
जिस तरह से बीजेपी एक के बाद एक राज्य चुनाव हार रही है उससे स्पष्ट है कि अगर अंतिम नतीजों में बीजेपी झारखंड को गंवा देती है तो वो सिर्फ 43 फीसद आबादी पर ही राज कर पाएगी।
2014 में बीजेपी के खाते में सात राज्य थे और 2018 में इसकी संख्या बढ़कर 18 हो गई थी। लेकिन 2019 के अंत तक बीजेपी के हाथ से कई राज्य निकल गए जिसमें हिंदी हार्टलैंड महत्वपूर्ण हैं। 

जानकारों की इस मुद्दे पर अलग अलग राय है। कुछ लोगों का कहना अगर राज्यों में बीजेपी के प्रदर्शन की बात करें तो ये बात सही है कि भारत के राजनीतिक नक्शे में कुछ हिस्सों में भगवा रंग गायब है। लेकिन अगर आप मध्य प्रदेश और राजस्थान की बात करें तो बीजेपी के वोट शेयर में किसी तरह की कमी नहीं आई थी बल्कि इजाफा ही हुआ था। इसके साथ ही महाराष्ट्र पर नजर डालें तो बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई। ये बात अलग है कि सरकार बनाने की कवायद की गई लेकिन वो नाकाम रही।
 

इसके साथ ही कुछ जानकारों का कहना है कि झारखंड की तस्वीर ऐसी ना होती। लेकिन बीजेपी को गैर आदिवासी चेहरे पर जरूरत से ज्यादा ऐतबार और आजसू का साथ न होना भारी पड़ा। झारखंड में जेएमएम के नेताओं ने करीब करीब सभी रैलियों में स्पष्ट तौर पर रखा कि बीजेपी को सिर्फ आदिवासियों के वोटों से मतलब होता है। जब सरकार में भागीदारी की बात आती है तो बीजेपी के नेताओं को लगता है कि अब वो पैराशूट शख्स को भी कमान दे सकते हैं। 

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