जम्मू-कश्मीर पुलिस के DGP की प्रेस वार्ता
J&K Police Station Blast: श्रीनगर के बाहरी इलाके में नौगाम पुलिस थाने में दुर्घटनावश विस्फोट होने से 9 लोगों की मौत हो गई है और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं। यह विस्फोट उस समय हुआ जब पुलिसकर्मी 'सफेदपोश' आतंकवादी मॉड्यूल मामले के संबंध में फरीदाबाद से जब्त विस्फोटक सामग्री के नमूने ले रहे थे। इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस के DGP ने कहा कि विस्फोटक को सही जगह पर ओपन एरिया में नौगाम थाने में रखा गया था। उन्होंने मामले पर प्रेस वार्ता करते हुए हादसे से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आगे की जांच के लिए उन विस्फोटकों को थाने में रखा गया था। बताया कि FSL द्वारा इन विस्फोटकों की जांच के लिए पिछले दो दिनों से काम चल रहा था, कल और उससे भी पहले।
DGP ने बताया कि बड़ी सावधानी से FSL टीम द्वारा विस्फोटक की जांच की जा रही थी। हालांकि, बीती रात दुर्घटनावश विस्फोट हो गया। उन्होंने विस्फोट होने के पीछे और किसी भी कारण के होने को खारिज किया। जैसे ही इसके पीछे आतंकवादी घटना होने की बात कही जा रही थी।
बताया गया कि कुल 9 लोगों की मौत हुई है। इसमें एक SIA का सदस्य रहा, 3 FSL टीम से थे, दो क्राइम फोटोग्राफर, मजिस्ट्रेट टीम से जुड़े दो रेवेन्यू ऑफिशल, एक टेलर की मौत हो गई। साथ ही 27 पुलिसवाले घायल हैं और कई आम नागरिक भी धमाके में घायल हुए हैं। DGP ने कहा कि पुलिस मामले में आगे जांच कर रही है।
वहीं, ग्राउंड पर फिलहाल स्थिति ये है कि SGRF की टीम मौके पर पहुंची है, जहां थाने व आसपास से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। साथ ही बॉब्म स्काउड और FSL की टीम भी पुलिस थाने में पहुंच चुकी है। ये पता लगाएंगे कि आखिर किस तरीके से ये ब्लास्ट हुआ।
बताया गया कि बीती राज 11 बजकर 22 मिनट पर यह धमाका हुआ। ये ब्लास्ट उस समय हुआ, जब फरीदाबाद से जब्त किए गए विस्फोटक की सैंपलिंग हो रही थी। यह एक लीगल प्रोसेस है और जब्त किया गया सारा मवाद यही थाने में रखा गया था, जहां उसकी सैंपलिंग हो रही थी।
बताया गया कि जब सैंपलिंग हो रही थी तो SIA यानी स्टेट जांच एजेंसी की एक टीम मौके पर थी, FSL की टीम वहां थी और एक मजिस्ट्रेट थे। उनकी मौजूदगी में सैंपलिंग हो रहा था। साथ ही एक लोकल टेलर भी वहां था। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी भी उस समय मौजूद थे। नायब तहसिलदार भी मौजूद थे, जहां इन सबकी धमाके में मौत हो गई।
फिलहाल जांच जारी है और जम्मू-कश्मीर पुलिस के DG मीडिया से बातचीत करेंगे, जहां वे बताएंगे कि आखिर धमाका किन कारणों से हुआ और मामले की हकीकत क्या है। बता दें कि धमाका ऐसा था कि पूरा थाना उड़ गया। आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा।
आखिर इतनी मात्रा में विस्फोटक थाने में क्यों रखा गया था? सवाल ये कि जम्मू-कश्मीर पुलिस आज से IED व ऐसे विस्फोटकों की जांच नहीं कर रही है। पिछले कई दशकों से इसे ऐसी जांच के लिए उपयुक्त माना जाता है। तो ऐसे क्या हुआ इस बार जो इतनी बड़ी चूक हो गई और 9 लोगों की जान चली गई। वह कई सारे लोग घायल हो गए।
बता दें कि दिल्ली से कोई जांच अधिकारी धमाके के वक्त मौजूद नहीं था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में जो दो ऑपरेशन चलाए थे। उनमें कुल 3000 किलो के आसपास विस्फोटक सामान मिला, लेकिन पहले ऑपरेशन में जो 360 किलो का विस्फोटक बरामद हुआ था, वह थाने में लाया गया था, जहां इसके नेचर की जांच की जा रही थी। क्योंकि इसको डेटरमाइन करने से ही बाकी जो 2600 किलो विस्फोटक बनाने का सामान दूसरे ऑपरेशन में मिला था, उसको लेकर भी जांच आगे बढ़ सकती थी।
अधिकारियों ने कहा कि विस्फोट उस समय हुआ जब पुलिसकर्मी हरियाणा के फरीदाबाद से लाई गई विस्फोटक सामग्री से नमूने ले रहे थे।
उन्होंने बताया कि यह सामग्री गिरफ्तार चिकित्सक मुजम्मिल गनई के किराए के आवास से बरामद 360 किलोग्राम विस्फोटक का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि मामले की जारी जांच के तहत इसके नमूने लिए जा रहे थे। वहीं, शवों को श्रीनगर स्थित पुलिस नियंत्रण कक्ष ले जाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 24 पुलिसकर्मियों और तीन आम नागरिकों को शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
विस्फोट के बाद रात के सन्नाटे में एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों के सायरन गूंजने लगे और घायलों को अस्पताल ले जाया गया। लगातार हुए छोटे-छोटे विस्फोटों के कारण बम निरोधक दस्ते के लिए तत्काल बचाव अभियान चलाना मुश्किल हो गया। बरामद विस्फोटकों में से कुछ को पुलिस की फोरेंसिक प्रयोगशाला में रखा गया है जबकि 360 किलोग्राम विस्फोटकों का बड़ा हिस्सा पुलिस थाने में रखा गया था। इस थाने में आतंकवादी मॉड्यूल के संबंध में प्राथमिक मामला दर्ज किया गया है।
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