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रेलवे को मिल रही रफ्तार, 2047 तक 4500 वंदे भारत पटरियों पर भरेंगी फर्राटा! नए वर्जन में होंगी खास सुविधाएं

Vande Bharat: भारत जब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, तब वंदे भारत एक्सप्रेस देश की आधुनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ बनकर उभर रही है। रेलवे ने 2030 तक 800 वंदे भारत चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि दिसंबर 2025 तक 164 वंदे भारत ट्रेनें पटरियों पर फर्राटा भर रही हैं।

Vande Bharat

वंदे भारत ट्रेनों की खासियत (फोटो साभार: iStock)

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Vande Bharat: भारत जब 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, तब वंदे भारत एक्सप्रेस देश की आधुनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ बनकर उभर रही है। यह ट्रेन केवल एक यातायात साधन नहीं, बल्कि तेज विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और यात्री-केंद्रित सोच का प्रतीक है। भारतीय रेल की यह महत्वाकांक्षी पहल देश के शहरों को कम समय में, सुरक्षित और आरामदायक तरीके से जोड़ रही है।

प्रीमियम रेल यात्रा का नया अध्याय

'वंदे भारत' देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है, जिसे पूरी तरह देश में डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह पारंपरिक इंजन-आधारित ट्रेनों से अलग, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है, जिससे यात्रा तेज़, स्मूद और भरोसेमंद बनती है। राजधानी और शताब्दी के बाद वंदे भारत ने इंटर-सिटी रेल यात्रा को नई ऊंचाई दी है।

अत्याधुनिक फीचर्स और सुरक्षा

वंदे भारत ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। इनमें झटके-रहित कपलर और बेहतर सस्पेंशन मौजूद हैं।

क्या-क्या हैं सुविधाएं

  • कवच (KAVACH) जैसी स्वदेशी ट्रेन टक्कर-रोधी सुरक्षा प्रणाली
  • ऑटोमैटिक प्लग डोर्स और चौड़े गैंगवे
  • UV-C आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम
  • CCTV, इमरजेंसी अलार्म और टॉक-बैक सिस्टम
  • दिव्यांग-अनुकूल शौचालय और बायो-वैक्यूम टॉयलेट
  • GPS आधारित पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम
  • ये सभी सुविधाएं वंदे भारत को सुरक्षित, स्वच्छ और स्मार्ट ट्रेन बनाती हैं

मेक इन इंडिया की मिसाल

वंदे भारत ट्रेनसेट का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में लगभग 90 फीसदी स्वदेशी सामग्री से किया गया है। ऊर्जा दक्षता और सतत निर्माण के लिए ICF को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार भी मिल चुका है। यह भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का मजबूत प्रमाण है।

अब ट्रेन में मिलेगा क्षेत्रीय स्वाद

दिसंबर 2025 से चुनिंदा वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं। महाराष्ट्र का कांदा पोहा, गुजरात की थेपला, बंगाल का कोषा पनीर, केरल का पारंपरिक भोजन, बिहार का चंपारण चिकन जैसे स्वाद यात्रियों को भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करा रहे हैं।

आंकड़ों में वंदे भारत की सफलता

दिसंबर 2025 तक 164 वंदे भारत ट्रेनें पटरियों पर फर्राटा भर रही हैं जिन्होंने देश के 274 जिलों को जोड़ा है। इन ट्रेनों की बदौलत अब तक 7.5 करोड़ से अधिक यात्री आरामदायक सफर का लुत्फ उठा चुके हैं। साथ ही यात्रा समय में 45 फीसदी तक की कमी आई है और 2025-26 में ऑक्यूपेंसी 105 फीसदी से अधिक रही है।

कैसी होंगी आगामी वंदे भारत

  • वंदे भारत 2.0: हल्की, तेज़ और 15% ज्यादा ऊर्जा-कुशल
  • वंदे भारत 3.0: 0 से 100 किमी/घंटा सिर्फ 52 सेकंड में
  • वंदे भारत 4.0: कवच 5.0, बेहतर इंटीरियर, ग्लोबल स्टैंडर्ड और भविष्य में 350 किमी/घंटा की क्षमता

वंदे भारत स्लीपर: लंबी दूरी की नई सुविधा

जनवरी 2026 में शुरू होने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन हावड़ा-गुवाहाटी के बीच चलेगी। इससे यात्रा समय करीब 3 घंटे कम होगा। 16 एसी कोच, 823 यात्रियों की क्षमता और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह ट्रेन रात की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का नया विकल्प बनेगी।

रेलवे का क्या है लक्ष्य

  • 2030 तक 800 वंदे भारत ट्रेनें
  • 2047 तक लगभग 4500 ट्रेनसेट

यह पहल न सिर्फ देश की कनेक्टिविटी बढ़ाएगी, बल्कि भारत को रेल तकनीक के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

वंदे भारत एक्सप्रेस

  • यह भारत में बनी पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है।
  • तेज़, सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक यात्रा के लिए डिजाइन की गई।
  • मध्यम दूरी (Inter-city) सफर में समय की बड़ी बचत करती है।

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भावना किशोर
भावना किशोर author

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यू... और देखें

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