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नंदा देवी-शिवालिक से आई 92,712 टन एलपीजी भारत में कितने दिन चलेगी, और कितने जहाजों से आ रही घरेलू गैस?

होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से छह एलपीजी लाने वाले जहाज हैं। वहीं एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है। इसके अलावा, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं।

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शिवालिक और नंदा देवी जहाजों से लाई गई एलपीजी भारत में कितने दिन चलेगी?

भारत में एलपीजी को लेकर मचे हाहाकार के बीच युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के बाद भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर मंगलवार तड़के भारत पहुंच गया है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एलपीजी टैंकर नंदा देवी मंगलवार तड़के लगभग 2:30 बजे गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। इससे पहले, सोमवार को पहला जहाज, शिवालिक गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पर पहुंचा था।

कितने दिन की खपत के बराबर है लाई गई गैस

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, इन दोनों जहाज पर लगभग 92,712 टन एलपीजी लदी है। यह मात्रा देश में एक दिन की खाना पकाने की गैस की आवश्यकता के बराबर है। राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों जहाजों ने एलपीजी उतारना शुरू कर दिया है। इस समय, नंदा देवी मुख्य जहाज से अपने छोटे जहाजों में एलपीजी स्थानांतरित कर रहा है।

अब तक चार जहाज आए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित

एलपीजी लाने वाले दोनों जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था। इसके साथ ही युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या चार हो गई है।

फारस की खाड़ी में फंसे भारतीयों पर भी आया अपडेट

उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय जहाजों से जुड़ी कोई भी घटना नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 611 नाविकों को ले जा रहे 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर संचालन पर करीबी नजर रख रहा है।

फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला संकरा जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद प्रभावी रूप से बंद हो गया है। जब युद्ध शुरू हुआ था, तब जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में 24 और पूर्वी हिस्से में चार जहाज सहित कुल 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे। वर्तमान में, पश्चिमी हिस्से में 22 और पूर्वी हिस्से में दो जहाज बचे हैं।

आज 80,800 टन मुरबान कच्चे तेल के साथ भारत आ रहा जग लाडकी

पूर्वी हिस्से में मौजूद जहाजों में से, कच्चे तेल का टैंकर जग लाडकी मंगलवार को लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चे तेल के साथ भारत पहुंचने वाला है। जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुका है और तंजानिया के रास्ते में है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा है।

22 जहाजों में छह एलपीजी ला रहे

होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से छह एलपीजी लाने वाले जहाज हैं, एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क कैरियर हैं। इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और उसमें कोई माल नहीं है और तीन नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में हैं।

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Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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