Haryana Election Result : 'किंगमेकर' की भूमिका में दुष्यंत चौटाला, JJP के सहयोग से बनेगी हरियाणा में सरकार 

हरियाणा चुनाव
Updated Oct 24, 2019 | 11:16 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

JJP and Dushyanat Chautala in Haryana politics : हरियाणा में किसी दल को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। यहां जननायक जनता पार्टी (JJP) किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है।

हरियाणा में विधानसभा चुनाव 2019
हरियाणा में विधानसभा चुनाव 2019  |  तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली : हरियाणा में विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर खड़ा होता दिख रहा है। चुनाव रुझानों में भाजपा और कांग्रेस किसी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। 90 सीटों के रुझानों में भाजपा को 45, कांग्रेस को 30 और अन्य के खाते में 15 सीटें जाती दिख रही हैं। हरियाणा में सरकार बनाने के लिए 46 सीटों की जरूरत होगी। हालांकि, ये अभी चुनाव नतीजे नहीं बल्कि रुझान हैं लेकिन रुझानों यदि हकीकत में तब्दील हो गए तो सत्ता की चाबी जननायक जनता पार्टी (जजपा) के पास होगी। अन्य को मिल रही 20 सीटों में से 11 सीटें जेजेपी के खाते में जाते दिख रही हैं। 

हरियाणा में सरकार बनाने में जाट वोटों की हमेशा से अहम भूमिका रही है। राज्य में जाट वोटरों का प्रतिशत करीब 27 प्रतिशत है। कहा जाता है कि इस समुदाय का समर्थन जिस पार्टी को मिलता है राज्य में उसकी सरकार बनती है लेकिन पिछले चुनाव में भाजपा ने गैर-जाट वोटों की बदौलत अपनी सरकार बनाने में कामयाबी पाई। इस बार के चुनाव में कांग्रेस, इनेलो और जजपा के बीच जाट वोटरों के बंटने की बात कही जा रही है लेकिन (जजपा) के खाते में जा रही 11 सीटें इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि जाट वोटों का ज्यादा बिखराव नहीं हुआ है और ये वोट (जजपा) के खाते में गए हैं। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में (जजपा) और इनेलो की मजबूत पकड़ मानी जाती है।

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रुझानों के आधार पर यदि नतीजों का विश्लेषण करें तो सत्ता की चाबी जजपा के पास रहने वाली है। भाजपा को 40 से 45 सीटें मिलती दिख रही हैं। उसे बहुमत के आंकड़े पर पहुंचने के लिए जजपा और अन्य की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस के खाते में 30 से 35 सीटें जाती दिख रही हैं। कांग्रेस यदि 35 सीटें भी हासिल कर लेती है तो वह बहुमत से 11 सीट दूर रहेगी। ऐसे में उसे जजपा और अन्य सभी के समर्थन की जरूरत होगी। जाहिर तौर पर बहुमत के आकंड़े (46) से जो पार्टी जितना करीब रहेगी उसे सरकार बनाने में उतनी ही आसानी होगी। 

रुझानों में बीजेपी सबसे आगे लेकिन जादुई आंकड़े से दूर

पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने इनेलो से अलग होकर अपनी अलग जजपा पार्टी बनाई है। जजपा पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है। जजपा के युवा नेता दुष्यंत चौटाला जाट वोटरों को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल हुए हैं। जजपा में अनुभवी नेताओं की कमी है लेकिन इस कमी को दूसरे दलों से आए नेताओं से भरने की कोशिश की गई है। पिछले कुछ समय से जाट वोटर अपने समुदाय एक मजबूत नेता की तलाश में हैं। शायद उनकी यह तलाश दुष्यंत चौटाला में पूरी हो रही है। 

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