हरियाणा चुनाव: भाजपा और उसकी सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी होगी आमने-सामने

हरियाणा
Updated Sep 26, 2019 | 23:53 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी और केंद्र सरकार में शामिल शिरोमणी अकाली दल हरियाणा में अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी।

Daljeet SIngh Cheema
दलजीत सिंह चीमा, शिरोमणी अकाली दल 

मुख्य बातें

  • शिरोमणी अकाली दल और भाजपा हरियाणा विधानसभा चुनाव में आमने सामने होंगे
  • गुरुवार को ही हरियाणा में एकमात्र अकाली विधायक ने बीजेपी की सदस्यता ले ली थी
  • हरियाणा में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं और 24 को नतीजे घोषित होंगे

चंडीगढ़: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के दो सबसे पुराने सहयोगी हरियाणा विधानसभा चुनाव में आमने सामने होंगे। एनडीए की सहयोगी पार्टी   शिरोमणि अकाली दल (SAD) भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी हरियाणा विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने का फैसला किया है।केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत भी हुई लेकिन अंत में दोनों ने अलग-अलग लड़ने का फैसला किया है।

अकेले चुनाव लड़ने के निर्णय की पुष्टि करते हुए और भाजपा के साथ गठबंधन में नहीं होने पर शिरोमणी अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया, 'शिरोमणी अकाली दल अपने दम पर हरियाणा में चुनाव लड़ने जा रहा है।' अकाली दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता, मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अकाली अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। दरअसल शिरोमणी अकाली दल ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब कालांवली से शिरोमणि अकाली दल के विधायक बलकौर सिंह ने गुरुवार को ही भाजपा का दामन दाम लिया।

अपने विधायाक के के बीजेपी में शामिल होने से नाराज शिरोमणी अकाली दल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर रही है जो गठबंधन 'धर्म' के सिद्धांत के खिलाफ है। अकाली दल ने अपने बयान में कहा, 'कोर कमेटी ने नोट किया कि बीजेपी ने न केवल शिरोमणी अकाली दल को धोखा दिया है, बल्कि हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए प्रतिबद्धताओं से भी पीछे हट गई है। अकाली विधायक बलकौर सिंह को भाजपा में शामिल करने का फैसला गलत है। एक पुराने सहयोगी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है।'

अपने बयान में अकाली दल ने कहा कि उसने खट्टर पर भरोसा किया क्योंकि उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। सूत्रों की मानें तो गठबंधन इसलिए नहीं हो सका क्योंकि बीजेपी ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की वजह से अपने सहयोगी शिरोमणी अकाली दल को सीटें देने से इंकार कर दिया। जबकि दूसरी तरफ शिरोमणी अकाली दल आगामी विधानसभा चुनाव में खुद के लिए पांच सीटों की मांग कर रहा था।

हरियाणा में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, भाजपा ने बार-बार कहा है कि वह अपने दम पर बहुमत हासिल कर सकती है इसलिए पार्टी ने विधानसभा चुनाव में अकेले जाने का निर्णय किया है। आपको बता दें कि अकालियों का पंजाब से लगी सीमा की लगभग आधा दर्जन सीटों पर प्रभाव है जहां सिख आबादी अधिक है। हरियाणा में विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को होने हैं और 24 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

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