बंगाल सहित 12 राज्यों में हो रहा SIR। तस्वीर-PTI
Bengal voter list : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है। इस बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को बड़ा दावा किया। EC ने कहा कि बंगाल की मौजूदा मतदाता सूची में लगभग 26 लाख मतदाताओं के नाम 2002 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहे हैं। यह दावा ऐसे समय हुआ जब एसआईआर को लेकर बंगाल की ममता सरकार सड़क पर उतर आई है और इसे लेकर वह ईसी एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों पर आक्रामक है। इस बीच चुनाव आयोग का यह आंकड़ा टीएमसी की बेचैनी बढ़ाने वाला है।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि राज्य की नवीनतम मतदाता सूची की तुलना पिछली एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 2002 और 2006 के बीच विभिन्न राज्यों में तैयार की गई सूचियों से करने पर यह विसंगति सामने आई। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया के तहत बुधवार दोपहर तक पश्चिम बंगाल में छह करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र अपलोड कर दिए गए थे।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘पोर्टल पर अपलोड होने के बाद, इन प्रपत्रों को ‘मैपिंग’ प्रक्रिया के तहत लाया जाता है, जहां इनका मिलान पिछले एसआईआर रिकॉर्ड से किया जाता है। शुरुआती निष्कर्षों से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में लगभग 26 लाख मतदाताओं के नामों का मिलान अब भी पिछले एसआईआर चक्र के आंकड़ों से नहीं किया जा सका है।’
इस बीच भाजपा ने बुधवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में 'फर्जी और संदिग्ध' नाम शामिल कराए जाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात के दौरान यह भी अनुरोध किया कि राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतुआ समुदाय के साथ-साथ बौद्ध, जैन और अन्य 'हिंदू समूहों' के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन आयोग के अधिकारियों को सौंपा।
इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय, राज्य इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और सांसद खगेन मुर्मू शामिल थे। बैठक के बाद मालवीय ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमने एसआईआर के पहले चरण में अब तक हुई अनियमितताओं को उजागर किया। हमने आयोग को बताया कि तृणमूल कार्यकर्ता और स्वयं मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) बीएलओ को फर्जी और संदिग्ध प्रविष्टियां स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।' उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि तृणमूल कार्यकर्ताओं और “निचले स्तर की नौकरशाही” के दबाव में कई मृत मतदाताओं को सूची में शामिल किया जा रहा है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।