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अनुशासन तोड़ने वाले नेताओं पर कार्रवाई करेंगे फडणवीस, बोले-कांग्रेस, AIMIM के साथ गठबंधन मंजूर नहीं

फडणवीस ने कहा, 'मैं यह साफ कर रहा हूं कि कांग्रेस या AIMIM के साथ कोई भी गठबंधन मंजूर नहीं होगा। अगर किसी स्थानीय नेता ने अपनी मर्जी से ऐसा फैसला लिया है, तो यह अनुशासन के हिसाब से गलत है, और एक्शन लिया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे गठबंधन तोड़ने के लिए पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

Devendra fadnavis

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। तस्वीर-PTI

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Maharashtra Local body polls: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में एक अलग तरह की राजनीति देखने को मिल रही है। अंबरनाथ नगर पालिका और अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में AIMIM के साथ भाजपा के गठबंधन की खबरों ने सभी को चौंका दिया। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और AIMIM के साथ हुए इस कथित गठबंधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। विरोधी दलों के साथ आने पर कड़ा एतराज जताते हुए फडणवीस ने बुधवार को कहा कि इस तरह के किसी गठबंधन को शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी नहीं मिली है और इस तरह का गठबंधन अनुशासन का उल्लंघन है।

'यह अनुशासन के हिसाब से गलत, एक्शन लिया जाएगा'

एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में फडणवीस ने कहा, 'मैं यह साफ कर रहा हूं कि कांग्रेस या AIMIM के साथ कोई भी गठबंधन मंजूर नहीं होगा। अगर किसी स्थानीय नेता ने अपनी मर्जी से ऐसा फैसला लिया है, तो यह अनुशासन के हिसाब से गलत है, और एक्शन लिया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे गठबंधन तोड़ने के लिए पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ के बैनर तले गठबंधन

भाजपा ने 20 दिसंबर को हुए स्थानीय चुनावों के बाद अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ के बैनर तले गठबंधन करके अंबरनाथ नगर पालिका परिषद का नेतृत्व संभाला और सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली) को दरकिनार कर दिया। भाजपा ने अकोला जिले की अकोट नगर पालिका परिषद में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और अन्य पार्टियों के साथ इसी तरह का गठबंधन किया।

कांग्रेस ने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को निलंबित किया

इस घटनाक्रम से असहज स्थिति में आ गई कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए अंबरनाथ नगर पालिका परिषद के अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया। शिवसेना (उबाठा) ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि यह सत्तारूढ़ पार्टी के दोहरे मापदंड को दर्शाता है और दिखाता है कि वह सत्ता हथियाने के लिए कुछ भी कर सकती है।

कांग्रेस-राकांपा के साथ चुनाव बाद समझौता किया

अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस और राकांपा के साथ चुनाव बाद समझौता किया और 31 सीट के साथ बहुमत साबित किया, जबकि शिवसेना 27 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। शिवसेना ने 60 सदस्यीय नगर पालिका परिषद के चुनाव में 27 सीट जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा को 14 सीट, कांग्रेस को 12, राकांपा को चार सीट मिलीं, जबकि दो सीट पर निर्दलीय निर्वाचित हुए। एक निर्दलीय के समर्थन से, तीन दलों के गठबंधन की ताकत बढ़कर 32 पार्षद हो गई है, जो बहुमत के लिए जरूरी 30 के आंकड़े को पार कर गई।

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आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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