Bangladesh intelligence chief: बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों में जुट गई है। अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के रिश्ते में जो तल्खी एवं कड़वाहट आई थी उसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी के प्रमुख का भारत दौरा हुआ है। रिपोर्टों में कहा गया है कि बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी के प्रमुख मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी ने एक से तीन मार्च तक दिल्ली का दौरा किया। तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका है जब बांग्लादेश सरकार का कोई शीर्ष अधिकारी दिल्ली के दौरे पर आया है।
1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया-रिपोर्ट
रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रॉ के प्रमुख पराग जैन और मिलिट्री इंटेलिजेंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन से मुलाकात की। 22 फरवरी को, प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के पांच दिन बाद, रहमान ने ब्रिगेडियर जनरल कैसर राशिद को पदोन्नत कर मेजर जनरल बनाया और उन्हें DGFI का महानिदेशक नियुक्त किया था।
खुफिया प्रमुखों की एक रात्रिभोज पर बैठक हुई
सूत्रों के अनुसार, 2 मार्च को खुफिया प्रमुखों की एक रात्रिभोज पर बैठक हुई, जिसमें खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की गई। भारत को बांग्लादेश में भारत-विरोधी गतिविधियों को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं हैं और दिल्ली इन गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए ढाका की नई सरकार के साथ साझेदारी करना चाहता है। आकलन यह भी रहा है कि प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो गई थी। ऐसे में आने वाले हफ्तों और महीनों में सुरक्षा मोर्चे पर सहयोग किस तरह आगे बढ़ता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
सिंगापुर के एक अस्पताल में हुई हादी की मौत
एक सप्ताह बाद, 8 मार्च को, बांग्लादेशी राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के मामले में आरोपी दो बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल के बोंगांव इलाके से गिरफ्तार किया गया। हादी की 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी, जब 12 दिसंबर को ढाका में उनके सिर में गोली मारी गई थी। 32 वर्षीय हादी 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान एक प्रमुख युवा नेता के रूप में उभरे थे, जिसके कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता गंवानी पड़ी थी।
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