क्या अब बसपा के राज्यसभा सांसदों पर है बीजेपी की नजर?

देश
Updated Sep 11, 2019 | 13:38 IST | मनोज यादव

राज्यसभा में बहुमत के लिए भाजपा दूसरे दलों के सांसदों को इस्तीफा दिलाकर पार्टी में शामिल करके बचे हुए कार्यकाल के लिए फिर से राज्यसभा में भेजने का वादा कर रही है।

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क्या बसपा सांसदों पर है भाजपा की नजर? 

मुख्य बातें

  • टीडीपी, सपा और इंडियन नेशनल लोकदल के राज्यसभा सांसद थाम चुके बीजेपी का दामन
  • नीरज शेखर ने सपा से इस्तीफा देकर थामा था बीजेपी का हाथ
  • राज्यसभा में बहुमत हासिल करना है भाजपा का लक्ष्य
नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों में कई पार्टियों के राज्यसभा सांसदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। चंद्रबाबू नायडु की टीडीपी के राज्यसभा सांसदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय कर लिया, जिससे राज्यसभा में भाजपा का संख्याबल और बढ़ गया। इसके साथ इंडियन नेशनल लोकदल के एक मात्र राज्यसभा सांसद ने भी अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। अब भाजपा की निगाहें बसपा के राज्यसभा सांसदों पर गड़ी हुई हैं।
 
राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं, जिसमें से 233 राज्यसभा सांसदों को अलग-अलग राज्यों के विधानसभा सदस्यों ने चुनकर भेजा है और 12 सांसदों को भारत के राष्ट्रपति ने मनोनीत किया है। राज्यसभा में बहुमत के लिए 123 सांसदों की आवश्यकता है। सत्ताधारी पार्टी के पास राज्यसभा में कुल 78 सांसद हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टियों के पास कुल 13 सांसद हैं। इस तरह से राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। राज्यसभा में किसी बिल को पास कराने के लिए भाजपा को सहयोगी दलों और विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार बिल राज्यसभा में पास नहीं हो पाता है।
 
हाल ही में नीरज शेखर हुए थे बीजेपी में शामिल
लोकसभा में बंपर बहुमत वाली पार्टी के पास राज्यसभा में बहुमत न होना पार्टी के लिए चिंता का विषय है। इसलिए भाजपा अब एक सूत्रीय कार्यक्रम में लगी है कि किस तरह से राज्यसभा में बहुमत हासिल किया जाए। इसके लिए वह अन्य दलों के सदस्यों को अपनी तरफ करने के लिए या तो राज्यसभा सांसदों को पार्टी में विलय करवाने में जुटी है या दूसरी पार्टियों के राज्यसभा सांसदों को इस्तीफा दिलाकर उन्हें उसी जगह से बचे हुए कार्यकाल के लिए राज्यसभा में भेजने का वचन देकर पार्टी में शामिल कर रही है। पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। उनसे यह वादा किया गया कि बचे हुए कार्यकाल के लिए पार्टी उन्हें राज्यसभा में भेज देगी। जिससे भाजपा के संख्याबल में बढ़ोतरी हो जाएगी।
 
राज्यसभा में बहुमत हासिल करना है भाजपा का लक्ष्य
इस तरह से भाजपा अब राज्यसभा में संख्याबल बढ़ाकर अकेले दम पर राज्यसभा में बहुमत हासिल करना चाहती है। इसके लिए छोटी-छोटी पार्टियों के राज्यसभा सदस्यों पर डोरे डाल रही है। भाजपा की नजरें अब बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा सदस्यों पर टिकी हुई हैं। बसपा के पास राज्यसभा में केवल चार सांसद हैं। अशोक सिद्धार्थ, सतीश चंद्र मिश्रा, राजाराम और वीर सिंह राज्यसभा में बसपा के सांसद हैं और ये सभी सांसद उत्तर प्रदेश से चुनकर आए हैं।
 
मुश्किल नहीं है भाजपा का लक्ष्य
वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश भाजपा के 301 विधायक हैं। 12 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिसमें से दस विधायक भाजपा के थे। ऐसे में जो राज्यसभा सांसद दूसरा पार्टी से आकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उनको राज्यसभा में भेजना भाजपा के लिए बहुत आसान है। भाजपा के लिए मुश्किल केवल राज्यसभा से सांसदों को इस्तीफा दिलवाना है। लेकिन जिस तरह से लोग आसानी से इस्तीफा देकर सत्ताधारी दल के साथ जुड़ते जा रहे हैं।
उससे यह लग रहा है कि यह काम भाजपा के लिए अब मुश्किल नहीं रहा।यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि बसपा के कितने सांसद पार्टी का साथ छोड़कर सत्ताधारी दल का रुख करते हैं। क्या बसपा के राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होकर बचे हुए कार्यकाल के लिए दुबारा चुनकर आने के लिए तैयार होते हैं या सभी सांसद एक साथ भाजपा में विलय करते हैं।

(डिस्क्लेमर : मनोज यादव अतिथि लेखक हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

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