जानिए कौन हैं पंडित हयातउल्ला चतुर्वेदी, मुस्लिम परिवार में पैदा हुए लेकिन रखते हैं 4 वेदों का ज्ञान      

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Updated Nov 21, 2019 | 14:25 IST

Pandit Hayatullah Chaturvedi भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का झंडा बुलंद करने वाले मुस्लिम समुदाय में ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने संस्कृत भाषा को सीखने और उसके प्रचार-प्रसार में अपना पूरा जीवन लगा दिया।

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जानिए कौन हैं कौन हैं पंडित हयातउल्ला चतुर्वेदी।  |  तस्वीर साभार: YouTube

मुख्य बातें

  • कौशांबी जिले में पैदा हुए पंडित हयातउल्ला चतुर्वेदी को है चार वेदों का ज्ञान
  • 78 साल के हो चुके हैं हयातउल्ला, रिटायर होने के बाद बच्चों को देते हैं मुफ्त शिक्षा
  • हयातउल्ला का मानना है कि संस्कृत के ज्ञान के बिना अधूरा है मनुष्य का जीवन

नई दिल्ली : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर फिरोज खान की नियुक्ति पर विवाद हो रहा है। विरोध करने वाले संस्कृत विभाग के ही छात्र हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है फिरोज खान मुस्लिम हैं इसलिए वह संस्कृत पढ़ाने में न्याय नहीं कर पाएंगे। संस्कृत पढ़ाने वाले व्यक्ति के लिए हिंदू संस्कृति के बारे में समझ होनी जरूरी है। फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध करने वाले लोगों का तर्क चाहे जो भी हो लेकिन यह बात नहीं भुलाई जा सकती कि मुस्लिम समुदाय ने ऐसे लोग दिए हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में खपा दिए। 

भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का झंडा बुलंद करने वाले मुस्लिम समुदाय में ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने संस्कृत भाषा को सीखने और उसके प्रचार-प्रसार में अपना पूरा जीवन लगा दिया। मुस्लिम समुदाय के ऐसे ही लोगों में एक नाम है हयातउल्ला का। हयातउल्ला संस्कृत भाषा के प्रकांड विद्वान हैं। इन्हें चारों वेदों पर महारत हासिल है। इसलिए लोगों ने इनका नाम हयातउल्ला की जगह पंडित हयातउल्ला चतुर्वेदी कर दिया। हयातउल्ला को अपने बचपन में संस्कृत भाषा के प्रति ऐसे लगाव पैदा हुआ कि उन्होंने अपना पूरा जीवन संस्कृत भाषा के प्रति समर्पित कर दिया। 

कौन हैं पंडित हयातउल्ला चतुर्वेदी
हयातउल्ला उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के रहने वाले हैं। इनका जन्म जिले के मूरतकंज ब्लॉक के हर्रायपुर गांव में हुआ। बचपन में उन्होंने जब संस्कृत की पढ़ाई शुरू की तो रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया लेकिन पिता ने हयातउल्ला की संस्कृत की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। हयातउल्ला ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत भाषा में स्नातक किया। इस दौरान उन्होंने चार वेदों-ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद का अध्ययन किया। थोड़े समय बाद ही हयातउल्ला की प्रसिद्धि चार वेदों के प्रकांड विद्वान के रूप में फैल गई। संस्कृत भाषा एवं वेदों पर महारत होने के कारण इनका नाम पंडित हयातउल्ला चतुर्वेदी पड़ गया।

रिटायर होने के बाद भी बच्चों को देते हैं निशुल्क शिक्षा
हयातउल्ला इलाहाबाद के एमआर शेरवानी इंटर कॉलेज में करीब 30 सालों तक हिंदी औ संस्कृत भाषा की शिक्षा देने के बाद साल 203 में सेवानिवृत हो गए। खास बात यह है कि रिटायर होने के बाद भी हयातउल्ला की अपने शिक्षण के प्रति दिलचस्पी कम नहीं हुई है। हयातउल्ला 78 साल के हो गए हैं फिर भी वह बच्चों को निशुल्क संस्कृत भाषा पढ़ाते हैं। संस्कृत भाषा के प्रति उनका जज्बा जरा सा भी कम नहीं हुआ है। वह आज भी एक युवा की तरह काम करते दिखाई देते हैं।

कई देशों का किया है दौरा  
संस्कृत भाषा के प्रति हयातउल्ला का लगाव इस कदर है कि उन्होंने दुनिया के कई देशों में जाकर संस्कृत भाषा की अलख जगाई। संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए वह अमेरिका, नेपाल और मॉरीशस की यात्रा कर चुके हैं। हयातउल्ला का मानना है कि अपनी संस्कृति एवं परंपरा के बारे में जानकारी के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। वह मदरसों में भी संस्कृत की शिक्षा देने के पक्षधर हैं। हयातउल्ला का मानना है कि संस्कृत के अभाव में मनुष्य अधूरा है। इन्होंने संस्कृत परिचारिका सहित कई किताबें लिखी हैं।

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