अमित शाह बोले- नेहरू का कश्मीर मसले को UN में ले जाना हिमालय से भी बड़ी गलती

देश
Updated Sep 29, 2019 | 15:22 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लेकर कोई शंका नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह कश्मीर को भी विकास के पथ पर ले जाने के लिए अनुच्छेद 370 हटाना जरूरी था।

Amit Shah
गृहमंत्री अमित शाह  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • बीजेपी चीफ ने कहा कि नेहरू ने कश्मीर मसले को यूएन में ले जाकर हिमालय से भी बड़ी गलती की थी
  • अमित शाह ने कहा कि इतिहास लिखने वालों ने जम्मू-कश्मीर का गलत इतिहास लिखा
  • गृहमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोगों के सामने सही इतिहास पेश किया जाए

नई दिल्ली: Amit Shah on article 370 revocation बीजेपी चीफ और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने साफतौर पर कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि नेहरू का कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र (UN) में ले जाना हिमालय से भी बड़ी गलती थी।

शाह ने कहा, 'जवाहरलाल नेहरू के असामयिक युद्ध विराम की घोषणा के कारण पीओेके (PoK) का निर्माण हुआ। 1948 में संयुक्त राष्ट्र में जाने का उनका निर्णय हिमालय से बड़ी गलती थी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में मामले को संदर्भित करने के लिए गलत चार्टर का चयन करके एक और गलती की।'

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के मन में जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (article 370) हटाने के लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, 'नरेन्द्र मोदी जी को देश की जनता ने दूसरी बार प्रधानमंत्री चुना और मोदी जी ने पहले ही सत्र के अंदर 70 साल के नासूर को उखाड़ कर फेंकने का काम किया।'

अमित शाह ने कहा,  'आज भी अनुच्छेद 370 और कश्मीर को लेकर कई तरह की अफवाहें चल रही हैं। उन्हें स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। हम जानते हैं कि 1947 से कश्मीर चर्चा और विवाद का विषय रहा है लेकिन इतिहास को लोगों के सामने तोड़ा-मरोड़ के पेश किया गया।'

बीजेपी चीफ ने आगे कहा,  'चूंकि इतिहास लिखने की जिम्मेदारी उन्हीं लोगों के हाथों में थी, जिन्होंने गलतियां की थीं, इसलिए परिणामस्वरूप सच्चे तथ्य छिपे थे। मुझे लगता है कि समय आ गया है कि लोगों के सामने सही इतिहास लिखा और प्रस्तुत किया जाए।'

शाह ने कश्मीरी पंडितों और सूफी संतों का जिक्र करते हुए कहा, 'कश्मीर में सूफी संतों की संस्कृति नष्ट हो गई, ये मानवाधिकार के चैंपियन कहां थे? जब कश्मीरी पंडितों को इस क्षेत्र से बाहर निकाल दिया गया तो वे कहां थे? धारा 370 की वजह से कश्मीर को नुकसान उठाना पड़ा है।'

 

नई दिल्ली में समकलप पूर्व सिविल सर्वेंट्स फोरम में राष्ट्रीय सुरक्षा पर संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा,  '630 अलग-अलग राज्य एक खंड के अंदर समाहित करना और अखंड भारत बनाना ये हमारे लिए बहुत बड़ा चुनौती का काम था। आज मैं आदर के साथ देश के प्रथम गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को प्रणाम करके ये बात कहना चाहता हूं कि वो न होते तो ये काम कभी न होता।'

उन्होंने कहा, '630 रियासतों को एक करने में कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन जम्मू-कश्मीर को अटूटरूप से अखंड रूप से एक करने में 5 अगस्त, 2019 तक का समय लग गया।'

अमित शाह ने कहा,  'जो लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि ये राजनीतिक स्टैंड है उनको मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये हमारा स्टैंड तब से है जब से मेरी पार्टी बनी। ये हमारी मान्यता है कि जब अनुच्छेद 370 था, तब देश की एकता और अखंडता के लिए ठीक नहीं था।'

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, '370 के कारण जम्मू-मश्मीर में आतंकवाद का एक दौर चालू हुआ जिसमें अब तक 41,800 लोग मारे गए। ह्यूमन राइट्स के सवाल उठाने वालों को मैं पूछना चाहता हूं कि इन मारे गए लोगों कि विधवाओं और इनके यतीम बच्चों की आपने कभी चिंता की है क्या?'

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों को विभाजित करते हुए केंद्रशासित प्रदेश बना दिया  था।

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