ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में पास: विपक्षी दलों ने इस तरह दी प्रतिक्रिया

देश
Updated Jul 31, 2019 | 01:04 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी ट्रिपल तलाक बिल पास हो गया। नरेंद्र मोदी सरकार को एक और बड़ी सफलता मिली गई है। इस बिल में तलाक देने वाले पति को तीन साल जेल की सजा हो सकती है।

Triple talaq Bill passed in Rajya Sabha
Triple talaq Bill passed in Rajya Sabha  |  तस्वीर साभार: IANS

नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार को एक और बड़ी सफलता मिली। संसद ने मंगलवार को मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक देने की प्रथा को क्राइम मानने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक बिल मंजूरी दे दी। बिल में ट्रिपल तलाक का क्राइम साबित होने पर पति को तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। सत्तारूढ़ दल ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 को राज्यसभा ने 84 के मुकाबले 99 मतों से पास करा लिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।

बिल पास होने के बाद भाजपा ने सराहना की जबकि कांग्रेस ने कहा कि इसे क्रिमनल एक्ट बनाने की कोई जरूरत नहीं थी। कांग्रेस के सीनियर नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'हमने बुनियादी तौर पर इस बिल का समर्थन किया था। हम इसमें संशोधन चाहते थे ताकि मुस्लिम महिलाओं को सहयोग मिल सके। हमारा विरोध दो-तीन मुद्दों पर था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को शून्य एवं अमान्य कर दिया है, ऐसे में इसे फौजदारी का मामला बनाने की क्या जरूरत है। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने राज्य सभा में बिल पर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे सदस्यों और पार्टियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह दुखद है कि जिन्होंने दावा किया था कि वो बिल का विरोध करेंगे और इसके खिलाफ वोट करेंगे वो सदन में मौजूद नहीं थे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजबब्बर ने बिल पास किए जाने को ऐतहासिक भूल बताया। उन्होंने बिल पारित किए जाने को देश में परिवार कानूनों के लिए बड़ा झटका बताया।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कि ट्रिपल तलाक बिल को 2014 में बीजेपी नीत एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद से मुस्लिम अस्मिता पर हुए कई हमलों के महज एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि बिल मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है तथा यह उन्हें और अधिक हाशिए पर धकेलेगा।

टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया कि संसद का मजाक बनाना जारी है। दोनों सदनों ने इस सत्र में 18 बिल पास किए गए हैं और उसे कानून बनाया है। केवल एक की जांच संसदीय समिति ने की है।  

बिल पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य अमी याज्ञनिक ने कहा कि महिलाओं को धर्म के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि सभी महिलाओं के प्रति क्यों नहीं चिंता की जा रही है? उन्होंने कहा कि समाज के सिर्फ एक ही तबके की महिलाओं को समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक कौम में ही नहीं है।  उन्होंने कहा कि वह बिल का समर्थन करती हैं लेकिन इसे अपराध की श्रेणी में डालना उचित नहीं है। 

चर्चा में भाग लेते हुए जदयू के बशिष्ठ नारायण सिंह ने बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वह न तो बिल के समर्थन में बोलेंगे और न ही इसमें साथ देंगे। उन्होंने कहा कि हर पार्टी की अपनी विचारधारा होती है और उसे पूरी आजादी है कि वह उस पर आगे बढ़े। जदयू के सदस्यों ने बिल का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। 

राज्यसभा में बीजद के समर्थन तथा सत्तारूढ़ एनडीए के घटक जदयू एवं अन्नाद्रमुक के वॉक आउट के चलते सरकार इस विवादास्पद बिल को पास कराने में सफल हो गई।विपक्षी दल कांग्रेस, सपा एवं बसपा के कुछ सदस्यों तथा टीआरएस एवं वाईएसआर कांग्रेस के कई सदस्यों के सदन में उपस्थित नहीं रहने के कारण सरकार को बिल पास कराने में काफी राहत मिल गई। 

Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।

Times Now Navbharat
Times now
zoom Live
ET Now
ET Now Swadesh
Live TV
अगली खबर