अबकी दफा झूमकर बरसेंगे बदरा, समय पर आएगा मॉनसून

देश
ललित राय
Updated Apr 15, 2020 | 15:37 IST

जिस तरह से सैलरीड क्लास को समय पर वेतन का इंतजार होता है, ठीक वैसे ही देश की बड़ी आबादी को मॉनसून का इंतजार होता है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस साल शानदार बारिश होगी।

अबकी दफा झूमकर बरसेंगे बदरा, समय पर आएगा मॉनसून
समय पर होगा मॉनसून का आगमन  |  तस्वीर साभार: Representative Image

मुख्य बातें

  • देश में मॉनसून समय पर देगा दस्तक, सभी इलाकों में झूमकर बरसेंगे बदरा
  • भारतीय मौसम विभाग का पूर्वानुमान, मॉनसून के आगमन और वापसी की तारीख में किया गया बदलाव
  • केरल में सबसे पहले दस्तक देता है मानसून, दिल्ली में जून के आखिर में काले भूरे बादलों से लोगों का होता है दीदार

नई दिल्ली। अप्रैल के मध्य में पूरे देश में चर्चा शुरू हो जाती है कि इस दफा मॉनसून का मिजाज कैसा रहेगा। क्या बदरा जमकर बरसेंगे या यूं ही ललचाते और तरसाते हुए किसी और दिशा की तरफ निकल जाएंगे। अगर हम देश के मौजूदा हालात की बात करें तो चर्चा सिर्फ कोरोना की हो रही है। लेकिन इन सबके बीच मौसम विभाग ने मॉनसून की भविष्यवाणी की है, जो दिल को खुश करने वाली है। इस बार धरती मां तप्त नहीं होंगी। काले भूरे बादल जमकर बरसेंगे और धरती की प्यास बुझेगी। देश के कई हिस्सों में मानसून के आगमन और वापसी की तारीखों में बदलाव किया गया, केरल में मानसून एक जून को ही दस्तक देगा।

जून से सितंबर तक अच्छी बारिश 
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम. राजीवन ने यहां एक एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि आगामी मानसून सीजन में लंबी अवधि की बारिश का औसत शतप्रतिशत रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के अनुसार, मानसून के दौरान 96 फीसदी से 104 फीसदी के बीच लंबी अवधि के औसत बारिश को सामान्य बारिश माना जाता है। यहां लंबी अवधि से मतलब पूरे मानसून सीजन से है जो जून से लेकर सितंबर तक रहता है।


मॉनसून का बेसब्री से रहता है इंतजार
भारत के ज्यादातर हिस्सों में सिंचाई की सुविधा होने के बावजूद ज्यादातर इलाकों में किसान मानसून का इंतजार करते हैं। बेहतर मानसून का अर्थ होता है कि पैदावार बेहतर होती है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को दम मिलता है। हालांकि इसका दूसरा पक्ष यह भी होता है कि ज्यादातर इलाकों में बाढ़ की भी दिक्कत होती है जिसका खामियाजा उठाना पड़ता है। 

इसलिए कहते हैं दक्षिण पश्चिम मॉनसून
भारत में मॉनसून को दक्षिण पश्चिम मॉनसून भी कहा जाता है। गरमी के महीनों में अरब सागर में उथल पुथल होने लगता है और मॉमसूनी हवा का निर्माण होता है। चूंकि इसकी दिशा दक्षिण पश्चिम की तरप से होती है और केरल के तट इसके संपर्क में आते हैं, कन्याकुमारी के पास यह दो हिस्सों में बंट जाती है। एक हिस्सा अंडमान की तरफ होते हुए पूर्वोत्तर राज्यों की तरफ रुख कर लेता है। 

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