अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मामले को नहीं भेजा जाएगा बड़ी बेंच के पास

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रामानुज सिंह
Updated Mar 02, 2020 | 11:26 IST

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले को बड़ी बेंच के पास नहीं भेजा जाएगा। 

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अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

मुख्य बातें

  • जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई
  • याचिकाकर्ता चाहते थे कि मामले को 7 जजों की बेंच के पास भेजा जाए
  • अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच के पास नहीं भेजा जाएगा। मामले की सुनवाई पांच जजों की बेंच ही करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द किए जाने की वैधता को चुनौती देनी वाली याचिकाओं को 7 जजों की बड़ी बेंच को भेजने का कोई कारण नहीं है। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पांच-जजों की संविधान पीठ ने 23 जनवरी को इस मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था।

एनजीओ पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (PUCL), जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और एक हस्तक्षेपकर्ता ने मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग की थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसले प्रेम नाथ कौल बनाम जम्मू-कश्मीर 1959 में और संपत प्रकाश बनाम जम्मू-कश्मीर 1970 के आधार पर एक बड़ी बैंच के पास भेजने की मांग की थी। जिसमें अनुच्छेद 370 के मुद्दे से निपटने के लिए एक दूसरे से सीधे टकराव होते हैं और इसलिए 5 जजों की वर्तमान बैंच इस मुद्दे पर सुनवाई नहीं कर सकी।

जस्टिस संजय किशन कौल, आर सुभाष रेड्डी, बीआर गवई और सूर्यकांत की बेंच के समक्ष केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाना अब बीती बात हो गई है। इस छोड़कर परिवर्तन को स्वीकार करना ही एकमात्र विकल्प है। सुप्रीम कोर्ट में जम्मू और कश्मीर प्रशासन का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अटॉर्नी जनरल के तर्कों के साथ सहमति व्यक्त की और कहा कि मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है। सीनियर वकील राजीव धवन ने जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का प्रतिनिधित्व करते हुए इस मामले पर केंद्र का समर्थन किया और सुझाव दिया कि मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें प्राइवेट व्यक्ति, वकील, कार्यकर्ता और राजनीतिक दल शामिल हैं और उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को भी चुनौती दी है, जो जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं।

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