Nirbhaya case: गुनहगारों के दांवपेंच से अदालत भी हैरान, फांसी की सजा के संबंध में सर्कुलर जारी

देश
ललित राय
Updated Feb 14, 2020 | 20:50 IST

फांसी की सजा पाए जाने के बाद किस तरह से निर्भया के गुनहगार ताल तिकड़म कर रहे हैं सबको पता है। फांसी की सजा से संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने सर्कुलर जारी किया है।

Nirbhaya case: गुनहगारों के दांवपेंच से अदालत भी हैरान, फांसी की सजा के संबंध में सर्कुलर जारी
सुप्रीम कोर्ट 

मुख्य बातें

  • फांसी की सजा मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सर्कुलर जारी
  • फांसी के सभी मामलों को 6 महीने के अंदर सूचीबद्ध करने के निर्देश
  • अलग अलग उच्च न्यायालयों से ज्यादातर फांसी की सजा के मामले सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक नहीं पहुंचे

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप केस के गुनहगारों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन उसके क्रियान्वयन में देरी हो रही है। पटियाला हाउस कोर्ट की तरफ से दो बार डेथ वारंज जारी किया गयाय़। लेकिन दोषियों के ताल तिकड़म की वजह से फांसी की सजा को अंजाम तक पहुंचाने में देरी हो रही है। अदालत को भी इस बात की जानकारी है कि जानबूझकर मामले को लटकाया जा रहा है। लेकिन कानून के प्रावधानों की वजह से जजों के सामने और कोई रास्ता नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसे मामले जिनमें फांसी की सजा दी गई है उसे फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनने के लिए दिशानिर्देश जारी किया है। 

फांसी की सजा मामले में सुप्रीम कोर्ट से सर्कुलर जारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले जिनमें फांसी की सजा सुनाई गई है उसमें तेजी लाई जाएगी।अभी तक के हालात ऐसे हैं कि वो मामले जिनमें हाईकोर्ट की तरफ से डेथ पेनाल्टी दी गई है वो सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक नहीं पहुंची है। अब इस दिशा में सर्कुलर जारी कर कहा गया है कि इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए 6 महीने के भीतर सूचीबद्ध की जाए। 

दोषियों के ताल तिकड़म से अदालत भी हैरान
निर्भया के एक गुनहगार विनय शर्मा जब सभी ताल तिकड़मों के बावजूद बचने से नाकाम रहा तो उसने अदालत में अर्जी दी कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को दो फैसले सुनाने थे। केंद्र सरका ने दिल्ली हाइकोर्ट में अपील दायर की थी कि अब जबकि तीन दोषियों के पास किसी तरह का विकल्प नहीं है तो उन्हें फांसी के तख्ते पर चढ़ाया जा सकता है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की दलील को ठुकरा दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई थी और अदालत को फैसला सुनाना था।

दोषी विनय शर्मा को नहीं मिली राहत
इस विषय पर फैसला सुनाने से पहले जस्टिस आर भानूमति बेहोश हो गईं और फैसला सोमवार तक के लिए टाल दिया गया है। इसके साथ ही अदालत ने विनय शर्मा को किसी तरह का राहत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि दोषी विनय शर्मा शारीरिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ है। लिहाजा उसकी अपील निरस्त की जाती है।

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