प्लीज समझो! जितना रहोगे घर में उतना भागेगा कोरोना, सोशल डिस्टेंसिंग से इतने कम हो जाएंगे मामले

सरकार से लेकर डॉक्टर तक, जानकारों से लेकर रिसर्च तक ये बात सामने आई है कि कोरोना वायरस से लड़ने में सबसे कारगर हथियार सोशल डिस्टेंसिंग है, यानी लोग सिर्फ घरों में रहें, बिल्कुल बाहर न निकलें।

social distancing
भारत के 548 जिलों में लॉकडाउन  |  तस्वीर साभार: AP

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश के 548 जिलों में लॉकडाउन किया गया है। बार-बार लोगों से कहा जा रहा है कि घर में रहें क्योंकि कोरोना से लड़ने में ये सबसे बढ़िया हथियार हैं। लेकिन लॉकडाउन के बावजूद लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं, जो कि बेहद खतरनाक है। लॉकडाउन का कढ़ाई से पालन न करने के बाद कई जगहों पर कर्फ्यू लगाया गया है। देश के प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी इस पर जोर दिया है।

आईसीएमआर के अनुसार, सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) से कोरोना वायरस के कुल संभावित मामलों की संख्या 62 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। COVID-19 के प्रसार की शुरुआती समझ के आधार पर  ( ने जो गणितीय मॉडल तैयार किया है, उसके मुताबिक कोरोना वायरस के संदिग्ध लक्षणों वाले यात्रियों की प्रवेश के समय स्क्रीनिंग से अन्य लोगों में वायरस के संक्रमण को एक से तीन सप्ताह तक टाला जा सकता है।

आईसीएमआर ने कहा, 'कोरोना वायरस के लक्षणों वाले और संदिग्ध मामलों वाले लोगों के घरों में एकांत में रहने जैसे सामाजिक दूरी बनाने के उपायों का कड़ाई से पालन करने से कुल संभावित मामलों की संख्या में 62 प्रतिशत की और सर्वाधिक मामलों की संख्या में 89 प्रतिशत की कमी आएगी। और इस तरह से ग्राफ समतल हो जाएगा तथा रोकथाम के अधिक अवसर मिल सकेंगे।' 

इसलिए रहिए घर में
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी आंकड़ें पेश कर बताया है कि घर में रहना क्यों जरूरी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'जागो लोगों जागो। 29 फरवरी को अमेरिका में केवल 68 केस थे और 3 मृत्यु हुई थी। 25 दिनों में सीन बदला अब 40,000 मामले हैं और 400 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई है। इटली में 1 महीने पहले चंद  मामले थे और 1-2 मृत्यु हुई थी। आज 40,000 से ज्यादा मामले हैं और लगभग 5000 मृत्यु हुई हैं। स्वयं बचो और दुसरो को भी बचाओ। घर में रहो। एक ही मंत्र घर में रहो।' 

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