संभल में पुलिस वालों की हत्या, सोनभद्र में 'खूनी' खेल, खुल रही सरकारी दावों की पोल

देश
Updated Jul 18, 2019 | 18:42 IST | मनोज यादव

उत्तर प्रदेश में अपराध के ग्राफ में गिरावट आने के सरकारी दावों की पोल बुधवार को राज्य के दो अलग-अलग हिस्सों में हुई दो घटनाओं से खुल गई है। अपराधियों में कानून का डर समाप्त हो गया है।

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सोनभद्र में हिंसा की हारदात से इलाके में तनाव।   |  तस्वीर साभार: ANI

उत्तर प्रदेश में सोनभद्र एवं संभल में अपराध एवं हिंसा की वारदातों ने सूबे की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि आए दिन बलात्कार और हत्या की घटनाएं घटित हो रही हैं। सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश में अपराध का ग्राफ गिरा है और ज्यादातर अपराधी जेल के अंदर हैं। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी के एक ट्वीट पर सरकार ने नहीं पुलिस ने आगे आकर आंकड़े पेश किए थे। लेकिन प्रियंका गांधी ने दो साल पहले का आंकड़ों की बात नहीं की थीं, बल्कि ताजा हालात का जिक्र करते हुए कहा था कि राज्य में कानून व्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई है। 

पुलिस और प्रशासनिक चूक का नतीजा हैं दोनों घटनाएं 
राज्य में बुधवार को दो घटनाएं घटित हुईं। एक घटना सुदूर पूर्व में तो दूसरी राज्य के पश्चिमी भाग में घटित हुई। दोनों ही घटनाएं स्वयं इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था किस कदर खराब हो गई है। पूर्व यानि सोनभद्र में मौत का तांडव देखा गया। खूनी खेल खेला गया। यह सब प्रशासनिक लापरवाही की वजह से हुआ। पश्चिम यान संभल की घटना का जिक्र इसलिए जरूरी है क्योंकि वहां पर जो भी हुआ वह भी एक मिशाल बन गई है। अभी कुछ दिन पहले भी इसी तरह की घटना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही घटित हुई थी। फिर पुलिस ने नहीं चेता। हां इतना जरूर किया कि तुरंत ही पुलिस ने उसका बदला ले लिया। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ में वहीं लोग मारे गए थे, जो बैन में पुलिस इंस्पेक्टर को घायल करके भाग निकले थे। जिसमें इलाज के दौरान पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई। 

संभल में दो सिपाहियों की हत्या पुलिस की चूक का नतीजा
सम्भल में दिनदहाड़े दो सिपाहियों की जघन्य हत्या और तीन कैदियों के फरार होने की घटना पुलिस की चूक का परिणाम है। खाकी के लहूलुहान होने का जिम्मेदार वह जेल प्रशासन है, जिसने खूंखार कैदियों के मंसूबे पढऩे और गतिविधि पर नजर रखने में भारी चूक कर दी। चन्दौसी न्यायालय में पेशी के बाद वापस मुरादाबाद जेल ले लाए जा रहे तीन बंदी वैन में मौजूद दो सिपाहियों की हत्या कर फरार हो गए। बंदियों ने योजनाबद्ध तरीके से सबसे पहले सिपाहियों की आंख में मिर्च पाउडर डाला, उसके बाद उन्हें अपने पास मौजूद पिस्टल और तमंचे से गोली मार दी। इससे दोनों सिपाहियों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों सिपाहियों की रायफल लेकर बदमाश फरार हो गए।

झूठे केस में फंसाने के डर से जनता चुप  
इन दोनों घटनाओं के अलावा भी राज्य में कई ऐसी वारदातें हुई हैं, जो राज्य सरकार के कानून व्यवस्था के दुरुस्त होने की पोल खोलती हैं। आये दिन राज्य में हत्यायें हो रही हैं। गाजीपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर में कई हत्याएं और आगरा में वकील की हत्या। ये सब कैसे हो रहा है? यह समझ से परे है। अगर सरकार ने पुलिस को इतनी खुली छूट दे रखी है, तो पुलिस अपना काम सही ढंग से क्यों नहीं कर रही है? क्या पुलिस स्थानीय नेताओं के इशारे पर काम कर रही है। अगर पुलिस ने स्थानीय नेताओं के इशारे पर अपने आंख-कान बंद कर लिया है, तो एलआईयू विभाग क्या कर रहा है? ऐसे न जाने कितने सवाल हैं जो जनता के मन में उठ रहे हैं। लेकिन लोगों के मन में एक खौफ का भाव पैदा हो गया है कि अगर हम सरकार के खिलाफ इस तरह की बाते करेंगे, तो पुलिस हमको झूठे केस में फंसा देगी। 

अखिलेश बोले, अपराधियों के आगे नतमस्तक सरकार 
सोनभद्र में जिस तरह से मौत का नंगा नाच खेला गया है। उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। सोनभद्र की घटना पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए कहा है कि- अपराधियों के आगे नतमस्तक भाजपा सरकार में एक और नरसंहार...! सोनभद्र में भूमाफियाओं द्वारा जमीन विवाद को लेकर नौ लोगों की हत्या दहशत एवं दमन का प्रतीक...! सभी मृतकों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दें...! दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करे सरकार...!

प्रियंका गांधी ने पूछा- क्या ऐसे बनेगा अपराध मुक्त प्रदेश?  
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया कि भाजपा राज में अपराधियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि दिनदहाड़े हत्याओं का दौर जारी है। सोनभद्र में भूमाफियाओं द्वारा तीन महिलाओें सहित नौ गोंड आदिवासियों की सरेआम हत्या ने दिल दहला दिया। प्रशासन, प्रदेश, मुखिया, मंत्री सब सो रहे हैं। क्या ऐसे बनेगा अपराध मुक्त प्रदेश...। 

(डिस्क्लेमर : मनोज यादव अतिथि लेखक हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

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