Maharashtra Political Crisis: खत के इंतजार में बिगड़ा शिवसेना का खेल, सुर्खियों में आए शरद पवार

देश
Updated Nov 13, 2019 | 09:46 IST

shivsena failed to form government: सच ये है कि महाराष्ट्र में अब राष्ट्रपति शासन है। गवर्नर की तरफ से शिवसेना और एनसीपी को मौका दिया गया। लेकिन दोनों दल सरकार बनाने में नाकाम रहे।

sharad pawar
एनसीपी के अध्यक्ष हैं शरद पवार 

मुख्य बातें

  • किसी की सरकार न बनने पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन
  • राज्यपाल द्वारा और समय न देने पर शिवसेना सुप्रीम कोर्ट में
  • कांग्रेस-एनसीपी ने राष्ट्रपति शासन लागू करने को गैरसंवैधानिक बताया

नई दिल्ली। सियासत की सड़क पर फिसलन कुछ ज्यादा ही मिलती है,अगर ऐसा न होता तो महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना की सरकार बन गई होती। अगर ऐसा न होता तो शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली होती। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और राज्य राष्ट्रपति शासन में है। इन सबके बीच एक ऐसा चेहरा है जो सुर्खियों में है वो हैं शरद पवार। 56 सीटों के साथ शिवसेना के लिए ये नामुमकिन था कि वो अपने बलबूते सरकार बनाती। ये बात दीगर है कि शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत कहा करते थे कि वो 170 विधायकों का समर्थन हासिल कर सकते हैं। लेकिन मौजूदा तस्वीर गवाही दे रही है कि वो शिवसेना और कांग्रेस का समर्थन पत्र नहीं हासिल कर सके। 

इंतजार था उस खत का
अगर महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के आंकड़ों को अलग अलग कर देखें तो कोई भी दल अपने बलबूते सरकार बनाने के हालात में नहीं है। इन दलों के सामने सिर्फ एक ही विकल्प था या है कि वो मिलकर सरकार बनाए। शिवसेना को उम्मीद थी कि उसे दोनों दलों का समर्थन हासिल हो जाएगा। लेकिन शिवसेना समय सीमा खत्म होने के इंतजार के साथ समर्थन की चिट्ठी का भी इंतजार करती रह गई। कांग्रेस, विपरीत विचार वाली शिवसेना का समर्थम करेगी या नहीं शीर्ष नेतृत्व मंथन करता रह गया। केरल कांग्रेस ने शिवसेना को समर्थन देने के मुद्दे पर ऐतराज जताया था। 

महाराष्ट्र में अब तक तीन दफा राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र में पहली बार राष्ट्रपति शासन 1980 में 112 दिन के लिए लगा था। खास बात ये थी कि उस समय के सीएम शरद पवार के पास पूर्ण बहुमत था लेकिन उन्होंने सदन को भंग कर दिया था। महाराष्ट्र में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन 2014 में सितंबर के महीने में लगाया गया और उस वक्त कांग्रेस के पृथ्वीराज चव्हाण सीएम थे। उस वक्त सरकार में शामिल एनसीपी का कांग्रेस के नेताओं से मनमुटाव था और दूसरे सहयोगी दलों ने किनारा कर लिया था। इस दफा राज्य में 32 दिन तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा। 

देश के अलग अलग सूबों में अब तक 126 बार राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में सबसे ज्यादा 10 बार, पंजाब में 9 बार( आतंकवाद के दौरान), उत्तर प्रदेश में 9 बार, बिहार में आठ बार, कर्नाटक में 6 बार, पुडुचेरी में 6 बार, ओडिशा में 6 बार, केरल में 4 दफा। इसके साथ ही गुजरात में 5, गोवा में पांच, मध्य प्रदेश में 4, राजस्थान में 4, तमिलनाडु में 4, नागालैंड में 4, असम में 4, हरियाणा में तीन, झारखंड में 3, त्रिपुरा में 3, मिजोरम में 3, आंध्रप्रदेश में 3, महाराष्ट्र में 3, अरुणाचल में 2 बार, हिमाचल, मेघालय, सिक्किम, उत्तराखंड में दो बार, एक बार दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा।

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Maharashtra Political Crisis: खत के इंतजार में बिगड़ा शिवसेना का खेल, सुर्खियों में आए शरद पवार Description: shivsena failed to form government: सच ये है कि महाराष्ट्र में अब राष्ट्रपति शासन है। गवर्नर की तरफ से शिवसेना और एनसीपी को मौका दिया गया। लेकिन दोनों दल सरकार बनाने में नाकाम रहे।
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